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Life Style : चेहरे की देखभाल के लिए घरेलू नुस्खों में नीम का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है। कोई इसकी पत्तियों का पेस्ट लगाता है, तो कोई पत्तियां उबालकर तैयार पानी से चेहरा धोता है। इसे लेकर मुंहासे कम होने, अतिरिक्त तेल हटने और त्वचा साफ दिखने जैसे दावे किए जाते हैं। लेकिन क्या रोज सुबह नीम के पानी से चेहरा धोना सभी के लिए फायदेमंद है? उपलब्ध शोध के आधार पर इसे मुंहासों, दाग-धब्बों या अन्य त्वचा समस्याओं का प्रमाणित उपचार नहीं माना जा सकता।
इस विषय में सबसे जरूरी अंतर नीम युक्त तैयार फेसवॉश और घर में बने नीम के पानी के बीच है। किसी उत्पाद में नीम के साथ सफाई करने वाले अन्य तत्व भी होते हैं। उसकी संरचना और इस्तेमाल का तरीका तय रहता है। घर पर पत्तियां उबालकर बने पानी में नीम के घटकों की मात्रा समान नहीं होती। इसलिए किसी तैयार उत्पाद पर हुए अध्ययन के नतीजे घरेलू पानी पर सीधे लागू नहीं किए जा सकते।
नीम युक्त एक फेसवॉश की प्रभावशीलता और सुरक्षा पर प्रकाशित क्लिनिकल अध्ययन उपलब्ध है। हालांकि, उसका विषय तैयार फेसवॉश था, केवल नीम की पत्तियों का पानी नहीं। इस अंतर को समझे बिना यह कहना उचित नहीं होगा कि रोज नीम के पानी से चेहरा धोने पर मुंहासे निश्चित रूप से खत्म हो जाएंगे। किसी एक उत्पाद से जुड़े शोध को नीम के हर घरेलू इस्तेमाल का प्रमाण मानना भी सही नहीं है।
चेहरा धोने के बाद साफ या ताजा महसूस होना और किसी त्वचा रोग का इलाज होना अलग बातें हैं। पानी से धुलाई के बाद मिलने वाले अनुभव के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि नीम ने त्वचा की समस्या दूर कर दी है। इसी तरह कुछ दिनों तक इस्तेमाल के बाद दिखाई देने वाला बदलाव केवल नीम के कारण हुआ, इसका निष्कर्ष निकालने के लिए भी पर्याप्त प्रमाण चाहिए। घरेलू अनुभव उपयोगी संकेत हो सकते हैं, लेकिन वे वैज्ञानिक परीक्षण का विकल्प नहीं हैं।
नीम को प्राकृतिक मानकर पूरी तरह सुरक्षित समझना भी ठीक नहीं है। नीम के तेल से एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, यानी संपर्क के कारण त्वचा में एलर्जी, होने के मामले चिकित्सा साहित्य में दर्ज हैं। ये मामले नीम के तेल से संबंधित हैं और इन्हें नीम के पानी के समान नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी इनसे इतना स्पष्ट है कि नीम से बनी सामग्री हर व्यक्ति की त्वचा को अनिवार्य रूप से अनुकूल नहीं होती।
अगर किसी सामग्री के इस्तेमाल के बाद चेहरे पर जलन, खुजली, लालिमा या सूजन आए, तो उसे फायदे का संकेत समझकर लगातार लगाते रहना उचित नहीं है। इस्तेमाल रोकें और चेहरा साफ पानी से धो लें। समस्या बनी रहने या बढ़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। संवेदनशील त्वचा, एक्जिमा या पहले से किसी त्वचा समस्या वाले लोगों के लिए नए घरेलू प्रयोग शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक उपयोगी है।
चेहरे की सामान्य सफाई के लिए त्वचा विशेषज्ञों की सलाह सरल है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी हल्का, त्वचा को न घिसने वाला और अल्कोहल रहित क्लींजर इस्तेमाल करने की सलाह देती है। चेहरा गुनगुने पानी से गीला करें और उंगलियों से हल्के हाथों से साफ करें। कपड़े, स्पंज या जोरदार रगड़ से त्वचा में परेशानी हो सकती है। धोने के बाद मुलायम तौलिए से थपथपाकर सुखाना चाहिए।
बार-बार चेहरा धोना भी बेहतर देखभाल की गारंटी नहीं है। सामान्य सलाह सुबह और रात चेहरा साफ करने तथा अधिक पसीना आने के बाद धुलाई की है। रूखापन या खुजली होने पर मॉइस्चराइजर मदद कर सकता है। चेहरा साफ करने के लिए बहुत गर्म पानी या तेज रगड़ का सहारा लेने के बजाय सौम्य तरीका अपनाना जरूरी है। त्वचा की प्रतिक्रिया देखकर देखभाल की दिनचर्या समायोजित की जानी चाहिए।
भारतीय त्वचा विशेषज्ञों की संस्था की सार्वजनिक मार्गदर्शिका भी त्वचा के प्रकार के अनुसार क्लींजर चुनने पर जोर देती है। संवेदनशील त्वचा में कठोर साबुन, अल्कोहल, एस्ट्रिंजेंट और घर्षण पैदा करने वाली सामग्री से बचने की सलाह दी गई है। मुंहासों या संवेदनशील त्वचा पर नए उत्पाद सावधानी से आजमाने चाहिए। कई सक्रिय तत्वों को एक साथ इस्तेमाल करने से भी जलन हो सकती है, इसलिए अलग-अलग नुस्खे जोड़ते जाना जरूरी नहीं है।
सुबह की देखभाल में धूप से सुरक्षा भी शामिल होनी चाहिए। नीम के पानी को सनस्क्रीन का विकल्प नहीं समझना चाहिए। बाहर निकलते समय ब्रॉड-स्पेक्ट्रम, पानी प्रतिरोधी और कम से कम एसपीएफ 30 वाला सनस्क्रीन लगाने की सलाह दी जाती है। त्वचा साफ करने, नमी बनाए रखने और धूप से बचाने की जरूरतें अलग-अलग हैं।
रोज नीम के पानी से चेहरा धोने पर निश्चित फायदा होगा, ऐसा दावा करने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। त्वचा की जरूरत के अनुसार सौम्य सफाई और नियमित देखभाल अपनाएं। लगातार मुंहासे, दाग या जलन होने पर घरेलू नुस्खे के भरोसे उपचार टालने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से समस्या का कारण और सही देखभाल समझें।
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