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लाइफ स्टाइल
अत्यधिक Screen- Time से सिर्फ आँखें नहीं, पूरा शरीर प्रभावित!”
Harrison
14 Oct 2025 8:53 PM IST

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Lifestyle,लाइफस्टाइल : आज डिजिटल ज़माना है — बच्चों की ज़्यादातर पढ़ाई‑मनोरंजन स्क्रीन पर होती है। लेकिन डॉक्टरों की चेतावनी है कि स्क्रीन‑टाइम केवल आँखों को ही नुकसान नहीं पहुँचाती, बल्कि अन्य अंगों और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर कर सकती है। आइये जानते हैं ये नुकसान क्या‑क्या हैं, और कैसे बच्चों को इससे सुरक्षित रखा जा सकता है।
स्क्रीन‑टाइम के कारण होने वाले नुकसान
आँखों से जुड़े प्रभाव
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकावट, जलन, सूखापन और धुंधलापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) बढ़ने की संभावना होती है, खासकर जब वे ज्यादा समय स्क्रीन के निकट बिताते हैं।
ब्लिंक रेट (पलक झपकने की आवृत्ति) कम हो जाती है, जिससे आँसू‑फिल्म प्रभावित होती है और आँखें और अधिक सूखी हो जाती हैं।
शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
मांसपेशियों और कशेरुका (स्पाइन) से जुड़ी समस्याएँ: गर्दन, कमर, कंधे आदि में दर्द, झुकाव की गलत मुद्रा (slouching) के कारण पीठ और गर्दन पर दबाव बढ़ना।
मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता: स्क्रीन‑टाइम जितना बढ़े, उतना ही समय व्यायाम और सक्रियता घटती है, जिससे वजन बढ़ने का डर बढ़ जाता है।
नींद और जैविक लय (Circadian Rhythm)
स्क्रीन से निकलने वाला नीला (blue) प्रकाश मेलाटोनिन हार्मोन को रोकता है, जो सोने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
बच्चों की नींद में देरी होती है, नींद की गुणवत्ता खराब होती है, जिससे अगली सुबह थकावट, ध्यान की कमी और मनोदशा में गिरावट होती है।
मानसिक, सामाजिक और व्यवहारिक प्रभाव
अधिक स्क्रीन‑उपयोग वाले बच्चों में चिड़चिड़ापन, व्यवहार में अस्थिरता, ध्यान में कमी जैसे लक्षण अक्सर पाए जाते हैं।
कुछ अध्ययनों में यह भी दिखा है कि अत्यधिक स्क्रीन‑टाइम से तनाव, चिंता, अवसाद जैसी मानसिक समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
सामाजिक संपर्क और बातचीत कम हो सकती है, क्योंकि बच्चे बाहर खेलने या अन्य गतिविधियों में कम भाग ले पाते हैं।
कैसे बचाएँ बच्चों को — उपाय और सुझाव
स्क्रीन‑समय सीमित करें
छोटे बच्चों के लिए, विशेष रूप से 2 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को स्क्रीन का समय बिल्कुल नहीं। उम्र 2‑5 वर्ष के लिए अधिकतम 1 घंटे प्रति दिन। बड़े बच्चों और किशोरों में समय सीमा और उपयोग की प्रकृति (पढ़ाई, मनोरंजन आदि में संतुलन) बनाए रखना चाहिए।
20‑20‑20 नियम अपनाएँ
हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड के लिए ऐसी चीज़ देखें जो कम से कम 20 फीट दूर हो — इससे आँखों की मांसपेशियाँ विश्राम करें।
उचित दूरी और स्क्रीन की ऊँचाई
स्क्रीन को आँखों के स्तर से थोड़ा नीचे रखें, और स्क्रीन से दूरी लगभग हाथ की लंबाई होनी चाहिए (लगभग 50‑70 सेमी)।
नीले प्रकाश (blue light) का प्रबंधन
स्क्रीन पर blue light filters इस्तेमाल करें, रात के समय स्क्रीन को मंद रोशनी और warmer टोन में रखें। सोने से पहले स्क्रीन उपयोग कम करना चाहिए।
अकसर ब्रेक लें और पलकों की देखभाल करें
आँखों को रोक‑रोक कर झपकने का अभ्यास करवाएँ, और अगर ड्रायनेस हो तो डॉक्टर से सलाह लेकर आँखों की ड्रॉप्स या मॉइस्चराइज़र उपयोग किया जा सकता है।
बाहरी गतिविधियाँ और व्यायाम बढ़ाएँ
रोजाना कुछ समय बाहर खेलने, दौड़‑भाग आदि गतिविधियों के लिए निकालें। प्राकृतिक प्रकाश में होना आँखों और शरीर दोनों के लिए फायदेमंद है।
नींद की गुणवत्ता बनाए रखें
सोने से पहले स्क्रीन बंद करें, नियमित समय पर सोने और जागने का नियम बनाएं। पर्याप्त नींद मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए ज़रूरी है।
स्क्रीन‑टाइम आज की ज़रूरत है, लेकिन संतुलन बहुत ज़रूरी है। अगर बच्चों की स्क्रीन‑उपयोग की आदतों में थोड़ी सी जागरूकता और नियम शामिल किए जाएँ, तो ये नुकसान आसान‑से‑संभव टाले जा सकते हैं। आँखें ही नहीं, पूरा तन‑मन स्वस्थ रहेगा।
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