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Life style : भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक नवरात्रि है। इस दौरान पूरे देश में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में घरों और मंदिरों में विशेष पूजा होती है। ऐसे में पूजा स्थल की साफ-सफाई का भी विशेष महत्व माना जाता है। घर में रखा मंदिर रोजाना पूजा के कारण जल्दी गंदा हो सकता है। मंदिर की जालियों, कोनों और सतह पर धूल-मिट्टी जमा हो जाती है। वहीं दीया, अगरबत्ती और धूप की लौ से कई बार मंदिर की ऊपरी सतह पर कालिख भी जम जाती है।
नवरात्रि शुरू होने से पहले अगर आप भी अपने घर के मंदिर को चमकाना चाहते हैं, तो कुछ आसान घरेलू तरीकों की मदद ले सकते हैं। इससे सफाई में ज्यादा समय और मेहनत नहीं लगेगी और पूजा स्थल भी साफ-सुथरा नजर आएगा।
सबसे पहले हटाएं धूल और मिट्टी
मंदिर की सफाई शुरू करने से पहले उसमें रखी सभी पूजा सामग्री, मूर्तियां और सजावटी सामान को सावधानी से बाहर निकाल लें। इसके बाद सूखे और मुलायम कपड़े या साफ ब्रश की मदद से मंदिर की जालियों और कोनों में जमा धूल हटाएं। अगर मंदिर में बारीक जालियां हैं, तो छोटे ब्रश या पुराने साफ टूथब्रश का इस्तेमाल किया जा सकता है।
धूल को सीधे गीले कपड़े से साफ करने से कई बार मिट्टी चिपक जाती है। इसलिए पहले सूखी सफाई करना बेहतर रहता है। जालियों के अलावा मंदिर की छत, किनारों और नीचे के हिस्से की धूल भी अच्छी तरह साफ करें।
कालिख हटाने के लिए हल्के तरीके अपनाएं
दीया, अगरबत्ती और धूप के धुएं के कारण मंदिर की ऊपरी सतह पर काली परत जम सकती है। इसे साफ करने के लिए बहुत ज्यादा रगड़ने से बचें, खासकर अगर मंदिर लकड़ी, पेंट या नाजुक सजावट वाला है।
एक मुलायम कपड़े को हल्के गुनगुने पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लें और सतह को धीरे-धीरे पोंछें। अगर केवल पानी से कालिख न निकले तो बहुत हल्के साबुन के घोल का इस्तेमाल किया जा सकता है। सफाई के बाद सतह को सूखे कपड़े से जरूर पोंछें, ताकि नमी लंबे समय तक न रहे।
जालियों की सफाई ऐसे करें
मंदिर की जालियों में धूल सबसे ज्यादा जमा होती है और इन्हें साफ करना थोड़ा मुश्किल भी होता है। इसके लिए पुराने टूथब्रश या मुलायम ब्रश का इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्रश को पहले सूखा रखकर जाली के बीच जमा धूल निकालें।
अगर जाली पर चिकनाई या धुएं की परत जमी है, तो हल्के साबुन वाले पानी में कपड़ा भिगोकर जाली को धीरे-धीरे साफ करें। इसके बाद साफ पानी से हल्का पोंछकर तुरंत सूखे कपड़े से इसे सुखा दें। जाली को साफ करते समय बहुत ज्यादा पानी डालने से बचें।
कांच वाले मंदिर की सफाई
अगर घर के मंदिर में कांच लगा है तो उस पर धूल के साथ अगरबत्ती और धूप के धुएं की परत भी जम सकती है। कांच साफ करने के लिए मुलायम माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करें। हल्के कांच क्लीनर या पानी की थोड़ी मात्रा से कांच को साफ किया जा सकता है।
कांच पर किसी खुरदरे कपड़े या कठोर चीज से रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे सतह पर खरोंच आ सकती है। सफाई के बाद सूखे कपड़े से कांच को अच्छी तरह पोंछें।
पूजा की मूर्तियों को भी करें साफ
मंदिर की सफाई के दौरान पूजा की मूर्तियों को भी साफ करना जरूरी है। हालांकि हर मूर्ति को एक ही तरीके से साफ नहीं किया जा सकता। धातु की मूर्तियों को मुलायम सूखे या हल्के नम कपड़े से साफ किया जा सकता है। नाजुक, रंगीन या सजावटी मूर्तियों पर तेज केमिकल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
अगर मूर्ति पर कोई विशेष धातु, रंग या नाजुक सजावट है तो उसे साफ करने से पहले उसके लिए उपयुक्त सफाई विधि देख लेना बेहतर है। सफाई के बाद मूर्तियों को पूरी तरह सुखाकर ही वापस मंदिर में रखें।
मंदिर के कपड़े और सजावट बदलें
नवरात्रि से पहले मंदिर में बिछे कपड़े, आसन और पर्दे भी बदल दें। पुराने कपड़ों को धोकर अच्छी तरह सुखाएं या जरूरत के अनुसार नए साफ कपड़े लगाएं। फूलों की पुरानी माला, सूखे फूल और अन्य अनुपयोगी सजावटी सामग्री हटा दें।
मंदिर के आसपास भी सफाई करें। केवल मंदिर की सतह साफ करने के बजाय उसके नीचे और आसपास की जगह को भी साफ करने से पूजा स्थल ज्यादा स्वच्छ नजर आएगा।
सफाई के बाद रखें इन बातों का ध्यान
मंदिर को साफ करने के बाद पूजा की सभी वस्तुओं को व्यवस्थित तरीके से रखें। दीया और अगरबत्ती रखने की जगह ऐसी हो जहां धुआं सीधे मंदिर की छत या जाली पर ज्यादा न लगे। इससे कालिख जल्दी जमा होने की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है।
नवरात्रि जैसे पर्व से पहले मंदिर की सफाई करने से पूजा स्थल साफ और व्यवस्थित नजर आता है। इसके लिए महंगे उत्पादों या कठिन तरीकों की जरूरत हमेशा नहीं होती। नियमित धूल साफ करना, जालियों की सफाई करना और दीया-धूप से जमा कालिख को समय-समय पर हटाना काफी मददगार हो सकता है। हालांकि मंदिर की सामग्री के अनुसार ही सफाई का तरीका चुनना चाहिए, ताकि सतह या सजावट को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
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