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एयरलाइंस को जल्द मिले क्रेडिट सपोर्ट FIA ने नागरिक उड्डयन मंत्री से की अपील
Ratna Netam
5 Oct 2026 6:24 PM IST

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नई दिल्ली। भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के सामने बढ़ती वित्तीय और परिचालन चुनौतियों के बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने केंद्र सरकार से तत्काल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाले FIA ने नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू को पत्र लिखकर 'इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0' के तहत पात्र सदस्य एयरलाइंस को जल्द से जल्द क्रेडिट सपोर्ट जारी करने का आग्रह किया है।FIA ने अपने पत्र में कहा है कि भारतीय विमानन क्षेत्र अप्रैल 2026 से लगातार कई तरह के दबावों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, एयरस्पेस पर पाबंदियां, उड़ानों के मार्ग में बदलाव, रुपये की कीमत में गिरावट और परिचालन लागत में वृद्धि ने एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति पर असर डाला है। इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने भी एयरलाइंस के खर्च को और बढ़ा दिया है।
एयरलाइंस की लिक्विडिटी पर असर
FIA के मुताबिक, इन सभी परिस्थितियों का सीधा असर एयरलाइंस की लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल पर पड़ा है। विमानन कंपनियों को रोजमर्रा के परिचालन खर्च, ईंधन लागत और अन्य आवश्यक भुगतान के लिए पर्याप्त नकदी की जरूरत होती है। ऐसे में लगातार बढ़ते खर्च और परिचालन संबंधी बाधाओं ने कंपनियों की वित्तीय जरूरतों को बढ़ा दिया है।FIA ने सरकार से कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए योग्य एयरलाइंस को ECLGS 5.0 के तहत मिलने वाला क्रेडिट सपोर्ट जल्द जारी किया जाना जरूरी है। संगठन का कहना है कि समय पर वित्तीय सहायता मिलने से एयरलाइंस को मौजूदा दबाव से निपटने और अपने परिचालन को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम एशिया संघर्ष से बढ़ी चुनौती
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय विमानन परिचालन पर भी पड़ा है। एयरस्पेस से जुड़ी पाबंदियों और सुरक्षा परिस्थितियों के कारण कई उड़ानों के मार्ग में बदलाव करना पड़ रहा है। लंबे या वैकल्पिक रूट अपनाने से उड़ान संचालन का खर्च बढ़ सकता है। ईंधन की खपत, उड़ान समय और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी का असर एयरलाइंस की लागत संरचना पर पड़ता है।FIA ने इन्हीं परिस्थितियों को भारतीय एविएशन सेक्टर के सामने मौजूद अभूतपूर्व वित्तीय और परिचालन चुनौतियों का हिस्सा बताया है। संगठन के मुताबिक, एक साथ कई मोर्चों पर बढ़ते दबाव ने एयरलाइंस के लिए अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करना मुश्किल बनाया है।
एयरलाइंस के खर्च पर रुपये की विनिमय दर का भी प्रभाव पड़ता है। विमानन उद्योग में कई तरह के खर्च विदेशी मुद्रा से जुड़े होते हैं। ऐसे में रुपये की कीमत में गिरावट से कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।इसके साथ ही ATF की कीमतों में बढ़ोतरी एयरलाइंस के लिए सबसे महत्वपूर्ण लागत संबंधी चुनौतियों में से एक है। विमान संचालन में ईंधन की बड़ी भूमिका होती है। ईंधन की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत पर सीधा असर पड़ता है। मौजूदा परिस्थितियों में जब एयरस्पेस से जुड़ी बाधाओं के कारण उड़ानों के मार्ग भी बदल रहे हैं, तब ईंधन और परिचालन लागत का दबाव और महत्वपूर्ण हो जाता है।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
FIA ने नागरिक उड्डयन मंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि ECLGS 5.0 के तहत पात्र सदस्य एयरलाइंस को क्रेडिट सपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। FIA का मानना है कि इस समय वित्तीय सहायता मिलने से एयरलाइंस अपनी लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल संबंधी जरूरतों को बेहतर तरीके से संभाल सकेंगी।FIA ने कहा कि मौजूदा हालात ने एयरलाइंस की लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल पर गंभीर असर डाला है और इसलिए सरकार से तत्काल मदद की जरूरत है। संगठन की मांग ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय विमानन क्षेत्र को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर लागत और परिचालन से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एविएशन सेक्टर के लिए राहत की उम्मीद
एयरलाइंस के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विमानन क्षेत्र का असर यात्रियों, एयरपोर्ट सेवाओं, पर्यटन, कार्गो और इससे जुड़े दूसरे कारोबारों पर भी पड़ता है। ऐसे में एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने के लिए समय पर उपलब्ध होने वाली क्रेडिट सुविधा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।अब FIA की मांग पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर विमानन क्षेत्र की नजर रहेगी। यदि ECLGS 5.0 के तहत पात्र एयरलाइंस को जल्द क्रेडिट सपोर्ट मिलता है तो इससे कंपनियों को मौजूदा वित्तीय दबाव से निपटने में राहत मिल सकती है।
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