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Lifestyle, लाइफस्टाइल : सर्दियों के मौसम में तापमान कम होना सामान्य है, लेकिन जब यह अत्यधिक गिर जाता है, तो हमारे शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। शरीर का सामान्य तापमान लगभग 36.5 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। जब बाहर का तापमान गिरता है, तो शरीर इसे बनाए रखने के लिए कई प्राकृतिक प्रक्रियाएं अपनाता है, लेकिन एक सीमा से नीचे जाने पर स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य सर्दी में शरीर अपने तापमान को बनाए रखने के लिए थर्मोरेगुलेशन प्रक्रिया का उपयोग करता है। इस प्रक्रिया में शरीर की त्वचा और अंगों में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और मांसपेशियों में कंपकंपी उत्पन्न होती है। इससे शरीर के अंदर का तापमान बनाए रखने में मदद मिलती है।
लेकिन जब तापमान बहुत कम हो जाता है, जैसे कि 0 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे, तो शरीर की क्षमता सीमित हो जाती है। अत्यधिक ठंड में शरीर के अंगों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है और अंगों की सतह ठंडी पड़ने लगती है। इससे अंगों में झुनझुनी, दर्द और कभी-कभी त्वचा पर नीला पड़ना जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
सबसे गंभीर स्थिति हाइपोथर्मिया की होती है। यह तब होता है जब शरीर का केंद्रीय तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। हाइपोथर्मिया में व्यक्ति को सर्दी का असहनीय अहसास, थकान, सांस लेने में कठिनाई और मानसिक भ्रम हो सकता है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा भी हो सकता है।
सर्दियों में शरीर की सतह पर ठंड लगने से फ्रॉस्टबाइट यानी ठंड से होने वाली चोटें भी हो सकती हैं। यह अधिकतर हाथ, पैर, नाक और कान जैसी अंगों में होती है। फ्रॉस्टबाइट में त्वचा सख्त और नीली पड़ जाती है और कभी-कभी स्थायी नुकसान भी हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ठंड में बाहर जाने से पहले पर्याप्त गर्म कपड़े पहनना, दस्ताने और टोपी का उपयोग करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि बनाए रखना और गर्म पेय या भोजन का सेवन करना शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है।
सर्दियों में बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि इन समूहों में शरीर का तापमान बनाए रखने की क्षमता कम होती है। ऐसे लोगों को ज्यादा देर तक ठंड में रहने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलना चाहिए।
इस प्रकार, सर्दियों में शरीर लगभग 0 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सह सकता है, लेकिन इससे नीचे जाने पर स्वास्थ्य के लिए खतरे बढ़ जाते हैं। हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट और अंगों में ठंड लगना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सर्दियों में उचित सावधानी बरतें, गर्म कपड़े पहनें और शरीर को प्राकृतिक रूप से गर्म रखें।
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