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IAS गौरव दहिया और के. राजेश को जबरन रिटायर करने का मामला
Ashish verma
4 Oct 2026 5:09 PM IST

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गुजरात Gujrat। गुजरात में दो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सरकार ने गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी गौरव दहिया और के. राजेश को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। यह फैसला अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद लिया गया बताया जा रहा है। इनमें गौरव दहिया का मामला खास तौर पर चर्चा में है, क्योंकि उनकी सामान्य सेवानिवृत्ति में अभी करीब 18 वर्ष का समय बाकी था।
जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के स्तर पर सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद दोनों अधिकारियों को समय से पहले सेवा से हटाने की कार्रवाई की गई। अनिवार्य सेवानिवृत्ति सामान्य सेवानिवृत्ति से अलग होती है। सरकारी सेवाओं में निर्धारित नियमों के तहत अधिकारियों के कामकाज, सत्यनिष्ठा और सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जा सकती है और निर्धारित मानदंडों के आधार पर उन्हें समय से पहले सेवानिवृत्त किया जा सकता है।
गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी गौरव दहिया लंबे समय से विभिन्न विवादों के कारण चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ सेवा अवधि के दौरान अनुशासनात्मक मामलों और कथित गलत आचरण से जुड़े आरोप सामने आए थे। इन्हीं मामलों और उनके सर्विस रिकॉर्ड को लेकर हुई समीक्षा के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया।
गौरव दहिया की उम्र करीब 42 वर्ष बताई गई है। वह वर्ष 2044 में सामान्य रूप से सेवानिवृत्त होने वाले थे। इस लिहाज से उनके पास लगभग 18 वर्ष की सेवा बाकी थी। इतने लंबे कार्यकाल के शेष रहते अनिवार्य सेवानिवृत्ति का फैसला प्रशासनिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दहिया के निजी जीवन से जुड़ा एक विवाद वर्ष 2019 में काफी सुर्खियों में रहा था। उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी से कानूनी रूप से अलग हुए बिना दूसरी शादी की। मामला सामने आने के बाद उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई हुई और उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालांकि यह आरोपों से जुड़ा मामला था और इससे जुड़े तथ्यों तथा कानूनी पक्षों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
वर्ष 2019 में निलंबन के बाद दहिया लंबे समय तक सक्रिय सेवा से बाहर रहे। बाद में 2023 में उन्हें दोबारा सेवा में बहाल कर दिया गया। बहाली के बाद उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी दी गईं। हाल में वह गुजरात की राजधानी गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर तैनात थे।
लेकिन सेवा में वापसी के कुछ वर्षों बाद ही उनके पूरे रिकॉर्ड की समीक्षा के आधार पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय सामने आया। इस फैसले के बाद उनके प्रशासनिक करियर पर समय से पहले विराम लग गया।
दूसरे अधिकारी के. राजेश के खिलाफ भी सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई की है। दोनों अधिकारियों के मामलों की परिस्थितियां और उनसे जुड़े आरोप अलग-अलग रहे हैं। इसलिए दोनों मामलों को एक ही तरह के आरोपों से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। सरकार की ओर से कार्रवाई सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद किए जाने की बात सामने आई है।
आईएएस अधिकारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में रहती है क्योंकि भारतीय प्रशासनिक सेवा को देश की सबसे महत्वपूर्ण अखिल भारतीय सेवाओं में से एक माना जाता है। आईएएस अधिकारियों के पास जिला प्रशासन से लेकर राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में उनसे प्रशासनिक दक्षता के साथ उच्च स्तर की सत्यनिष्ठा और आचरण की अपेक्षा की जाती है।
सरकारी सेवा नियमों में अधिकारियों के प्रदर्शन और सेवा रिकॉर्ड की समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था मौजूद है। ऐसी समीक्षा का उद्देश्य यह तय करना होता है कि संबंधित अधिकारी को सार्वजनिक हित में आगे सेवा में बनाए रखा जाना चाहिए या नहीं। निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत सरकार के पास कुछ परिस्थितियों में अधिकारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का अधिकार होता है।
यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति और बर्खास्तगी कानूनी रूप से एक ही चीज नहीं हैं। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों में लागू सेवा नियम, समीक्षा प्रक्रिया और अधिकारी के अधिकार महत्वपूर्ण होते हैं। संबंधित अधिकारी उपलब्ध कानूनी या प्रशासनिक विकल्पों का इस्तेमाल भी कर सकता है।
गौरव दहिया का मामला उनके पूर्व के विवादों के कारण ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। पहली पत्नी से तलाक लिए बिना कथित दूसरी शादी से जुड़े आरोपों ने वर्ष 2019 में उनके करियर को प्रभावित किया था। निलंबन के करीब चार साल बाद 2023 में उनकी वापसी हुई, जिससे ऐसा लगा था कि उनका प्रशासनिक करियर एक बार फिर पटरी पर लौट रहा है। लेकिन अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले ने उनके आईएएस करियर को सामान्य सेवानिवृत्ति की तारीख से करीब 18 साल पहले ही रोक दिया है।
दो अधिकारियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा यह संदेश देती है कि लंबे कार्यकाल या वरिष्ठ पद पर होने के बावजूद अधिकारियों के प्रदर्शन और आचरण का मूल्यांकन किया जा सकता है।
फिलहाल गौरव दहिया की अनिवार्य सेवानिवृत्ति उनके करियर के सबसे बड़े घटनाक्रमों में शामिल हो गई है। 2019 में निलंबन, 2023 में बहाली और उसके बाद अतिरिक्त विकास आयुक्त जैसे पद पर तैनाती के बाद अब समय से पहले सेवा समाप्त होने से उनका नाम एक बार फिर चर्चा में है। वहीं के. राजेश के खिलाफ हुई समान कार्रवाई ने गुजरात के प्रशासनिक हलकों में इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
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