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68 साल पुराना दीवाली गीत आज भी है खास, गीता दत्त की आवाज ने रच दिया था इतिहास
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 7:24 PM IST

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एंटरटेनमेंट : दीपावली का त्योहार हो और घरों में बॉलीवुड के गाने न बजें, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। दीयों की रोशनी, रंग-बिरंगी सजावट, मिठाइयों और पटाखों के बीच संगीत इस त्योहार की रौनक को और बढ़ा देता है। बॉलीवुड में भी दिवाली को लेकर कई यादगार गाने बनाए गए हैं। इनमें कुछ गाने खुशियों और उत्साह से भरे हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो त्योहार के बीच अपनों से दूर होने का दर्द बयां करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी सिनेमा में दिवाली पर आधारित गाना पहली बार कब आया था और इसे किस गायिका ने अपनी आवाज दी थी?
हिंदी सिनेमा में दिवाली गीतों का इतिहास काफी पुराना है। इस परंपरा की शुरुआती कड़ियों में साल 1941 में रिलीज हुई फिल्म 'खजांची' का गीत 'दिवाली फिर आ गई सजनी' शामिल है। इस गीत को मशहूर गायिका शमशाद बेगम ने अपनी आवाज दी थी। उस दौर के प्रसिद्ध संगीतकार गुलाम हैदर ने इसका संगीत तैयार किया था। गीत में ढोल और तालियों की लय के जरिए दिवाली के उत्सवी माहौल को खूबसूरती से पेश किया गया था। इसे हिंदी फिल्मों के शुरुआती दिवाली गीतों में गिना जाता है।
1941 की फिल्म 'खजांची' से हुई शुरुआत
फिल्म 'खजांची' का नाम हिंदी सिनेमा के शुरुआती लोकप्रिय संगीत वाली फिल्मों में लिया जाता है। साल 1941 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन मोती बी. गिडवानी ने किया था और इसका संगीत गुलाम हैदर ने तैयार किया था। उस दौर में फिल्मी गानों में लोक संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय था।इसी फिल्म का दिवाली गीत 'दिवाली फिर आ गई सजनी' त्योहार के उल्लास को सामने लेकर आया। शमशाद बेगम की आवाज ने इस गीत को खास पहचान दी। गाने में दिवाली के आगमन, घरों में तैयारियों और त्योहार की खुशियों का अहसास देखने को मिलता है।उस समय फिल्मों में त्योहारों को कहानी से जोड़कर दिखाने का चलन विकसित हो रहा था। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े भारतीय त्योहार को संगीत के माध्यम से पर्दे पर पेश करना दर्शकों के लिए खास अनुभव था।
1943 में आया 'घर-घर में दिवाली है' गीत
दिवाली पर आधारित एक और बेहद महत्वपूर्ण गीत साल 1943 में रिलीज हुई फिल्म 'किस्मत' में सुनाई दिया था। इस गाने के बोल थे 'हर घर में दिवाली है, मेरे घर में अंधेरा'। इसे मशहूर गायिका अमीरबाई कर्नाटकी ने अपनी आवाज दी थी। फिल्म में अशोक कुमार और मुमताज शांति मुख्य भूमिकाओं में थे। गीतकार प्रदीप और संगीतकार अनिल बिस्वास ने इस गाने को तैयार किया था।इस गीत की खासियत यह थी कि इसमें दिवाली की खुशियों के बीच एक महिला के व्यक्तिगत दुख और अकेलेपन को दिखाया गया था। जब दुनिया के हर घर में रोशनी और उत्सव का माहौल होता है, तब किसी एक व्यक्ति के जीवन में अंधेरा भी हो सकता है। गीत ने त्योहार के सामाजिक और भावनात्मक पक्ष को सामने रखा।यही वजह है कि यह गीत केवल दिवाली की रौनक का चित्रण नहीं करता, बल्कि समाज में मौजूद अमीरी-गरीबी और व्यक्तिगत पीड़ा जैसे विषयों को भी छूता है।
1944 में जोहराबाई ने गाया 'आई दिवाली'
साल 1944 में फिल्म 'रतन' का गाना 'आई दिवाली, आई दिवाली' भी काफी लोकप्रिय हुआ। इस गीत को जोहराबाई अंबालेवाली ने अपनी आवाज दी थी। इसके बोल डीएन मधोक ने लिखे थे, जबकि संगीत नौशाद ने तैयार किया था।फिल्म 'रतन' में करण दीवान, मंजू और स्वर्णलता जैसे कलाकार नजर आए थे। इस फिल्म के संगीत ने नौशाद को बड़ी पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'आई दिवाली' गीत को हिंदी फिल्मों के पुराने और चर्चित दिवाली गीतों में शामिल किया जाता है।गीत में दिवाली के दौरान घरों में होने वाली सजावट, रोशनी और खुशियों का सुंदर चित्रण किया गया था। आज भी पुराने हिंदी फिल्मी गीतों के शौकीन इस गाने को खास पसंद करते हैं।
लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गीतों ने भी बढ़ाई रौनक
समय के साथ हिंदी फिल्मों में दिवाली से जुड़े गानों का अंदाज बदलता गया। साल 1961 में आई फिल्म 'नजराना' का गीत 'मेले हैं चिरागों के, रंगीन दिवाली है' काफी लोकप्रिय हुआ। इसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस गीत में दीपावली की चमक और रोशनी को खूबसूरती से दिखाया गया था।इसके बाद साल 1964 में आई फिल्म 'हकीकत' का गाना 'आई अबके साल दिवाली' लोगों के दिलों में खास जगह बनाने में सफल रहा। इसे लता मंगेशकर ने गाया था और संगीत मदन मोहन ने दिया था। इस गीत की खास बात यह थी कि इसमें युद्ध के माहौल के बीच त्योहार की खुशियों और अपनों से दूर रहने की पीड़ा को दर्शाया गया था।वहीं, साल 1973 में रिलीज हुई धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की फिल्म 'जुगनू' का गीत 'दीप दिवाली के झूठे' भी त्योहार के लोकप्रिय गीतों में शामिल हुआ। इस गाने को किशोर कुमार और सुषमा श्रेष्ठ ने आवाज दी थी। इसका संगीत एसडी बर्मन ने तैयार किया था।
2000 के बाद भी दिवाली गीतों का जारी रहा जादू
नई सदी में भी बॉलीवुड ने दिवाली को लेकर कई यादगार गाने दिए। साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया' का गाना 'आई है दिवाली' काफी लोकप्रिय हुआ। इस गाने में गोविंदा, जूही चावला, तब्बू और फिल्म के अन्य कलाकार नजर आए थे। इसे उदित नारायण, अलका याज्ञनिक, कुमार सानू और अन्य गायकों ने अपनी आवाज दी थी।इसके बाद 2005 में आई फिल्म 'होम डिलीवरी' का गाना 'हैप्पी दिवाली' भी त्योहार के दौरान खूब सुनाई दिया। इसे सुनिधि चौहान और बच्चों के समूह ने गाया था। विशाल-शेखर ने इसका संगीत तैयार किया था।हाल के वर्षों में भी दिवाली पर आधारित गाने फिल्मों और म्यूजिक वीडियो के जरिए सामने आते रहे हैं। इन गानों में आधुनिक संगीत के साथ पारंपरिक त्योहार की झलक देखने को मिलती है।
दिवाली गीतों में खुशियों के साथ छिपा है भावनाओं का संसार
बॉलीवुड के दिवाली गीतों की सबसे खास बात यह है कि इनमें केवल रोशनी और जश्न नहीं दिखाया गया, बल्कि प्रेम, विरह, परिवार, सामाजिक असमानता और अपनों की याद जैसे भाव भी शामिल किए गए हैं।1941 के 'दिवाली फिर आ गई सजनी' से लेकर आज के 'हैप्पी दिवाली' जैसे गानों तक हिंदी सिनेमा ने इस त्योहार को अलग-अलग अंदाज में पर्दे पर उतारा है। यही कारण है कि पुराने और नए गानों का अपना अलग महत्व है।इस दीपावली घर सजाते समय और परिवार के साथ खुशियां मनाते हुए इन सदाबहार गीतों को अपनी प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। पुराने गानों की मिठास और नए संगीत की ऊर्जा मिलकर त्योहार के उत्साह को दोगुना कर सकती है।
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