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प्रदूषण नियमों के बीच दिल्ली HC का फैसला, कोर्ट आने वाले वकीलों को मिली छूट

Ratna Netam
6 Nov 2026 7:12 PM IST
प्रदूषण नियमों के बीच दिल्ली HC का फैसला, कोर्ट आने वाले वकीलों को मिली छूट
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नई दिल्ली। दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किए गए गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में रहने वाले अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मचारियों को निर्धारित शर्तों के तहत BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों से दिल्ली आने की छूट दे दी है। यह छूट केवल अदालत में कामकाज वाले दिनों में लागू होगी।न्यायमूर्ति अमित महाजन ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इस फैसले से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद जैसे NCR के इलाकों में रहने वाले उन वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिन्हें नियमित रूप से अदालतों में पेश होने के लिए दिल्ली आना पड़ता है।
31 जनवरी 2027 तक लागू है वाहन प्रवेश प्रतिबंध
दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग ने 23 जून 2026 को जारी अधिसूचना के तहत राजधानी में 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक बाहर पंजीकृत और BS-VI मानक से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। यह फैसला सर्दियों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों का हिस्सा है।इस नियम के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं है, जो निर्धारित BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। हालांकि, अधिसूचना में कुछ विशेष श्रेणियों के वाहनों को छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है।दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इसी प्रावधान का हवाला देते हुए वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों के लिए अलग से छूट देने की मांग की थी। अदालत ने अब इस मांग पर राहत देते हुए कहा है कि संबंधित श्रेणी के लोगों को अदालत के कार्यदिवसों में इस प्रतिबंध से छूट मिलेगी।
गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के वकीलों को राहत
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि बड़ी संख्या में अधिवक्ता NCR के अलग-अलग शहरों में रहते हैं और रोजाना अपने पेशेवर काम के लिए दिल्ली आते हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद के वकील शामिल हैं।बार एसोसिएशन का कहना था कि दिल्ली में रहने का खर्च अधिक होने के कारण कई अधिवक्ता और न्यायिक कर्मचारी आसपास के शहरों में रहते हैं। उन्हें नियमित रूप से अदालत की सुनवाई, मुवक्किलों से मुलाकात, चैंबर और अन्य न्यायिक कार्यों के लिए राजधानी पहुंचना पड़ता है।एसोसिएशन ने दलील दी कि यदि ऐसे लोगों को अपने पुराने वाहनों से दिल्ली आने से रोका जाता है तो उनकी पेशेवर जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती हैं। कई मामलों में वकीलों की उपस्थिति सुनवाई की निर्धारित तारीख और समय से जुड़ी होती है। ऐसे में प्रतिबंध के कारण अदालत में समय पर नहीं पहुंच पाने से उनके मुवक्किलों के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर की थी याचिका
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। एसोसिएशन ने NCR में रहने वाले अधिवक्ताओं को 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक लागू वाहन प्रवेश प्रतिबंध से छूट देने की मांग की थी।याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था कि वकीलों को अपने निजी वाहनों से दिल्ली आने की अनुमति दी जाए। इसके विकल्प के तौर पर एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग को 27 अक्टूबर को दिए गए अपने प्रतिवेदन पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने का निर्देश देने की भी मांग की थी।वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने बार एसोसिएशन की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में दलील दी कि वकील और न्यायिक कर्मचारी न्याय व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि उन्हें अदालत तक पहुंचने में कठिनाई होती है तो इसका असर पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है।याचिका अधिवक्ता अमित चौधरी के माध्यम से दाखिल की गई थी।
प्रदूषण नियंत्रण के नियम पूरी तरह खत्म नहीं
बार एसोसिएशन ने अपनी याचिका में यह भी स्पष्ट किया था कि वह प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी नियमों से छूट नहीं मांग रही है। मांग केवल उन अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मचारियों को सीमित राहत देने की थी, जिन्हें NCR से दिल्ली आकर अदालतों में अपने दायित्व पूरे करने होते हैं।एसोसिएशन ने कहा कि इस छूट को पेशेवर पहचान और वाहन से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन जैसी शर्तों के साथ लागू किया जा सकता है। इसका उद्देश्य नियमों का दुरुपयोग रोकना और वास्तविक जरूरतमंद लोगों को राहत देना है।बार एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी मांग GRAP के तहत लगाए जाने वाले अधिक कठोर प्रतिबंधों या बाध्यकारी न्यायिक आदेशों से किसी प्रकार की छूट देने की नहीं थी।
आम वाहन चालकों पर प्रतिबंध जारी रहेगा
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट करना जरूरी है कि गैर-BS-VI वाहनों पर लगाया गया प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अदालत की ओर से दी गई राहत विशेष रूप से NCR में रहने वाले अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मचारियों के लिए है और यह केवल अदालत के कार्यदिवसों पर लागू होगी।इसका मतलब है कि गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के सभी वाहन चालकों को इस फैसले का लाभ नहीं मिलेगा। आम वाहन मालिकों को पहले की तरह दिल्ली सरकार की अधिसूचना और लागू यातायात नियमों का पालन करना होगा।गौरतलब है कि 2 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ ने गैर-BS-VI वाहनों पर प्रवेश प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उस मामले में सरकार से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 27 नवंबर के लिए निर्धारित की गई है।
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए लागू है सख्ती
दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण सरकार ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।हालांकि, इस नियम से NCR में रहने वाले कामकाजी लोगों, विशेषकर वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। हाई कोर्ट के ताजा आदेश से न्यायिक कार्यों से जुड़े लोगों को राहत मिली है।इस फैसले के बाद अब अदालत के कार्यदिवसों में पात्र अधिवक्ता और न्यायिक कर्मचारी निर्धारित छूट के तहत अपने गैर-BS-VI वाहनों से दिल्ली आ सकेंगे। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू व्यापक प्रतिबंध आम वाहन चालकों के लिए पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।
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