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प्रदर्शन का अधिकार और तकनीक सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी से छिड़ी बहस

Ratna Netam
15 Oct 2026 7:59 PM IST
प्रदर्शन का अधिकार और तकनीक सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी से छिड़ी बहस
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर को अधिसूचित विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई की। अदालत ने प्रदर्शनकारियों के अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के अधिकार पर विचार करते हुए कहा कि मौजूदा तकनीकी दौर में किसी की बात सुने जाने के अर्थ को तकनीक के संदर्भ में भी समझना होगा। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि वह इस बात की जांच करेगी कि प्रशासन ने यह निर्णय लेते समय संबंधित परिस्थितियों और प्रदर्शन स्थल की उपयोगिता पर पर्याप्त विचार किया था या नहीं।
जंतर-मंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता स्वाति मलिक की ओर से दाखिल याचिका में दिल्ली पुलिस के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया।याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है।अदालत के समक्ष तर्क दिया गया कि प्रदर्शनकारियों को ऐसे स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अनुमति मिलनी चाहिए, जहां उनकी आवाज सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।याचिकाकर्ता ने प्रदर्शन स्थल बदलने के निर्णय को नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।
तकनीक के संदर्भ में भी समझना होगा विरोध का अधिकार
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की बात सरकार तक पहुंचने या सुने जाने की अवधारणा को आधुनिक तकनीक के संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए।अदालत की यह टिप्पणी उस दलील के जवाब में आई, जिसमें कहा गया था कि विरोध-प्रदर्शन का स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां प्रदर्शनकारियों की बात सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंच सके।इस टिप्पणी से सुनवाई में यह सवाल सामने आया कि तकनीक और संचार के आधुनिक साधनों के दौर में किसी प्रदर्शन स्थल का भौगोलिक रूप से सत्ता के केंद्र के निकट होना कितना आवश्यक है।हालांकि, अदालत ने इस मुद्दे पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
11 अक्टूबर के आदेश को दी गई चुनौती
दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 के आदेश के जरिए जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था।इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और शाहदरा स्थित सीबीडी ग्राउंड को वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों के रूप में चिह्नित किया गया।इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों की ओर से विरोध जताया गया। जंतर-मंतर लंबे समय से केंद्र सरकार के समक्ष विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करने का महत्वपूर्ण स्थल रहा है।याचिका में इसी ऐतिहासिक महत्व और प्रशासनिक केंद्रों से निकटता को आधार बनाते हुए फैसले पर सवाल उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या सोच-समझकर लिया गया फैसला?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर का दर्जा समाप्त करने से पहले संबंधित परिस्थितियों का उचित आकलन किया था।अदालत ने पूछा कि क्या यह फैसला उसके पूर्व आदेश में की गई टिप्पणियों के आधार पर लिया गया या प्रशासन ने स्वतंत्र रूप से विचार किया था।दरअसल, दिल्ली पुलिस ने पहले हाई कोर्ट में कहा था कि प्रदर्शन स्थल बदलने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के आधार पर लिया गया है।हालांकि, गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश को जंतर-मंतर का दर्जा समाप्त करने का आधार नहीं बनाया गया था।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार
भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है।हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य संवैधानिक आधारों पर इन अधिकारों के इस्तेमाल पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।जंतर-मंतर से जुड़े वर्तमान विवाद में यही प्रश्न महत्वपूर्ण है कि प्रशासन द्वारा प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित करना और पुराने प्रदर्शन स्थल का दर्जा समाप्त करना संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप है या नहीं।
अब केंद्र और दिल्ली पुलिस के जवाब पर नजर
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले में उनका पक्ष मांगा है। अदालत प्रशासनिक निर्णय के आधार और प्रदर्शन स्थल की उपयोगिता की जांच करेगी।फिलहाल अदालत ने जंतर-मंतर का पुराना दर्जा बहाल करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।अब केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद आगे की न्यायिक कार्यवाही होगी। इस मामले का परिणाम राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के स्थानों से संबंधित नियमों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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