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दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर विवाद राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से की बड़ी अपील

Ratna Netam
15 Oct 2026 7:52 PM IST
दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर विवाद राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से की बड़ी अपील
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नई दिल्ली। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी की भूमिका की जांच पूरी नहीं कर लेता, तब तक गौतम को राज्यपाल पद का कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिट्ठी की जानकारी साझा करते हुए इस मामले में न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
'चार साल बाद भी नहीं मिला VIP का जवाब'
राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ने कथित तौर पर एक वीआईपी के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया था, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई।उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के चार साल बाद भी उस कथित वीआईपी की पहचान स्पष्ट क्यों नहीं हो सकी।राहुल गांधी ने सीबीआई जांच की गति पर भी असंतोष जताया। उनका कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी पीड़ित परिवार को कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है।उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि मामले की जांच पूरी होने तक राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित निर्णय पर दोबारा विचार किया जाए।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर परिवार ने जताई आपत्ति
सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति की घोषणा के बाद अंकिता भंडारी के परिवार ने आपत्ति जताई है।परिवार का आरोप है कि हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने दुष्यंत गौतम का नाम लेते हुए जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति रोकने की मांग की है।हालांकि, दुष्यंत गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। मामले में उनकी किसी आपराधिक भूमिका का न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।राहुल गांधी की मांग भी इन आरोपों की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार करने से संबंधित है।
2022 में हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या
उत्तराखंड की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं।सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। अंकिता का शव 24 सितंबर 2022 को चिल्ला नहर से बरामद हुआ था।इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। हत्या के मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था।30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या सहित संबंधित अपराधों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।x20;
जांच में कथित VIP की भूमिका पर सवाल
अंकिता भंडारी के माता-पिता लंबे समय से मामले में कथित वीआईपी की पहचान और उसकी संभावित भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं।परिवार का कहना है कि हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता साबित होती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।मामले में तीन दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन परिवार कथित वीआईपी से जुड़े पहलू की जांच को लेकर संतुष्ट नहीं है।यही कारण है कि राज्यपाल की नियुक्ति के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
इंडिया गेट पर परिवार से मिले थे राहुल गांधी
राष्ट्रपति को पत्र लिखने से पहले राहुल गांधी ने नई दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी।इस दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं। दोनों नेताओं ने परिवार की मांगों को सुना और न्याय की लड़ाई में समर्थन व्यक्त किया।अंकिता के माता-पिता दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील भी की है।
राष्ट्रपति के फैसले पर रहेंगी निगाहें
राहुल गांधी ने अपनी चिट्ठी में कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा कराना आवश्यक है।उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद का कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति न दी जाए।फिलहाल राष्ट्रपति की ओर से इस पत्र पर किसी निर्णय की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा मिलने के बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों ने इस मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब राष्ट्रपति को भेजी गई राहुल गांधी की चिट्ठी और लंबित जांच की प्रगति पर निगाहें बनी हुई हैं।
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