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संसद में मोदिया बिंद चश्मे के साथ पहुंचीं रेणुका चौधरी बीजेपी पर साधा निशाना

Ratna Netam
10 Aug 2026 3:30 PM IST
संसद में मोदिया बिंद चश्मे के साथ पहुंचीं रेणुका चौधरी बीजेपी पर साधा निशाना
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नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थकों पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को उन्होंने एक ऐसा चश्मा पहनकर सरकार पर तंज कसा, जिस पर ‘मोदिया बिंद’ लिखा हुआ था। रेणुका चौधरी ने इस चश्मे को लेकर कहा कि यह उन लोगों के लिए है, जिन्हें देश की गंभीर समस्याएं दिखाई नहीं देतीं और जो हर मुद्दे पर केवल सरकार की तारीफ करते हैं।
रेणुका चौधरी ने कहा कि यह चश्मा उन लोगों के इलाज के लिए है, जिन्हें कथित तौर पर देश में हो रही घटनाएं नजर नहीं आतीं। उन्होंने चोरी, पुल गिरने और नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को केवल सरकार की तारीफ करना दिखाई देता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर किसी को मोतियाबिंद है तो उसका इलाज भी कराया जाएगा। उनके इस बयान को लेकर संसद परिसर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
दरअसल, सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के बीच शुरू हुई। इस दौरान सरकार की ओर से चार विधेयक सदन में पेश किए गए। इनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक 2026, खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं। विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी के बीच इन विधेयकों को पेश किया गया।
विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। इसके अलावा अयोध्या स्थित राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी विपक्ष की ओर से लगातार उठाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए और संबंधित मामलों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बाद में दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। मानसून सत्र में इससे पहले भी कई मौकों पर विपक्ष के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। विपक्ष सरकार पर महत्वपूर्ण विधेयकों को पर्याप्त चर्चा के बिना आगे बढ़ाने का आरोप लगा रहा है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव भी संसद में जारी गतिरोध को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों पर सरकार से जवाब मांगा है। इसके साथ ही उन्होंने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं।
अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। विपक्ष का कहना है कि छात्रों से जुड़े मामले पर संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए।
वहीं, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष की आपत्तियों का जवाब दिए बिना सरकार विधेयकों को पारित कराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने FCRA में प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इससे नागरिक समाज तथा अल्पसंख्यक संस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने के लिए सरकार तैयार है। उन्होंने कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर सदन में जवाब देंगे। साथ ही उन्होंने विपक्ष से अपील की है कि जब सरकार की ओर से बयान दिया जाए तो सदन में हंगामा न किया जाए और चर्चा को शांतिपूर्वक आगे बढ़ने दिया जाए।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि संसद के मानसून सत्र में छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चंदे और FCRA जैसे मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष चर्चा के लिए सहमति बना पाते हैं या सदन में गतिरोध आगे भी जारी रहता है।
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