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राहुल का दावा: राष्ट्रपति ने ‘वोट चोरी’ के आरोप नहीं नकारे

Ashish verma
9 Oct 2026 11:25 PM IST
राहुल का दावा: राष्ट्रपति ने ‘वोट चोरी’ के आरोप नहीं नकारे
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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद दावा किया कि उन्होंने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज नहीं किया और संबंधित सबूत प्रस्तुत करने को कहा है। शुक्रवार रात राष्ट्रपति भवन पहुंचे INDIA गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर ज्ञापन सौंपा। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ने जो सबूत जुटाए हैं, उन्हें राष्ट्रपति के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना भी बताई।
पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के साथ हुई चर्चा पर आश्चर्य व्यक्त किया। उनके अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने चुनावों में कथित हेरफेर और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। राहुल का दावा है कि राष्ट्रपति ने आरोपों से इनकार करने के बजाय सबूत लाने को कहा। उन्होंने राष्ट्रपति का धन्यवाद करते हुए कहा कि विपक्ष उपलब्ध सामग्री सौंपने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया का यह विवरण राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दिया गया है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव व्यवस्था तथा लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने और शिकायतों पर विचार करने का आग्रह किया है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग भी रखी। ये राजनीतिक आरोप और मांगें हैं; राष्ट्रपति द्वारा सबूत मांगने संबंधी दावा अपने आप में चुनावी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं है।
राष्ट्रपति से मिलने वाले दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला और सुप्रिया सुले शामिल थे। इनके अलावा एमए बेबी, डी. राजा, राजीव राय, मनोज झा और थोल थिरुमावलवन भी राष्ट्रपति भवन पहुंचे। विभिन्न विपक्षी दलों के इन नेताओं ने संयुक्त रूप से चुनावों की विश्वसनीयता, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे रखे। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों के समर्थन में राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा कि राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी और सबूत मांगे हैं। उन्होंने ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग दोहराई। ममता बनर्जी ने मुलाकात को लेकर राष्ट्रपति का रुख सकारात्मक बताया। उनके अनुसार, विपक्ष ने संविधान की रक्षा और कथित चुनावी गड़बड़ियों के मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। ममता ने भी संबंधित सबूत राष्ट्रपति को सौंपने की बात कही।
ज्ञापन में विपक्ष ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयुक्तों से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त करने की मांग शामिल है। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को तत्काल रद्द करने तथा उसके अनुसार गलत तरीके से हटाए गए 13.30 करोड़ नाम बहाल करने का आग्रह किया है। सभी चुनावों में बैलेट पेपर लागू करने और पिछले दो वर्षों के उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग भी रखी गई, जिनमें विपक्ष पुख्ता गड़बड़ी के सबूत होने का दावा करता है।
मुलाकात से पहले विपक्षी सांसद संसद भवन से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च के लिए निकले थे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें विजय चौक पर रोक दिया गया, जहां सांसदों ने विरोध दर्ज कराया। बाद में राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए निर्धारित प्रतिनिधिमंडल आगे गया। इससे पहले संसद के सेंट्रल हॉल में विपक्षी नेताओं ने बैठक कर अपनी रणनीति और राष्ट्रपति के सामने रखे जाने वाले मुद्दों पर चर्चा की थी। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध के बीच यह मुलाकात हुई।
विजय चौक पर मौजूद तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि केवल पद से हटाने से विपक्ष की शिकायतों का समाधान नहीं होगा। वहीं, उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में परिसीमन को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उसका लाभ भाजपा को पहुंचा। दोनों नेताओं के बयान विपक्ष की व्यापक शिकायतों का हिस्सा हैं। उनके आरोपों पर किसी नए न्यायिक निष्कर्ष या कार्रवाई की घोषणा इस मुलाकात में नहीं हुई।
राहुल गांधी ने कहा कि यही प्रतिनिधिमंडल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाकर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अपनी बात और ज्ञापन रखने की कोशिश करेगा। उन्होंने चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को उठाने के लिए उपलब्ध सभी रास्ते अपनाने की बात कही। राष्ट्रपति को सबूत सौंपने और न्यायिक स्तर पर मुद्दा रखने की ये घोषणाएं विपक्ष की आगे की योजना हैं। फिलहाल किसी नई याचिका की सुनवाई अथवा अदालत के आदेश का विवरण सामने नहीं आया है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव परिणामों पर विपक्ष के आरोपों से भाजपा तथा चुनाव आयोग इनकार करते रहे हैं। भाजपा चुनावी सफलता का कारण प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और आर्थिक नीतियों को बताती है। ऐसे में राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अब ध्यान उन दस्तावेजों पर रहेगा, जिन्हें विपक्ष सबूत के रूप में प्रस्तुत करने की बात कर रहा है। राहुल गांधी का दावा और ज्ञापन विपक्ष का पक्ष रखते हैं; आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही हो सकेगी।
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