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इंद्रप्रस्थ रामलीला में पहुंचेंगे PM मोदी, सुरक्षा सख्त
Rajeshwari Nishad
20 Oct 2026 2:17 PM IST

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नई दिल्ली: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देश की राजधानी नई दिल्ली में भी विजयादशमी को लेकर खास तैयारियां की गई हैं। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित उत्सव ग्राउंड में आयोजित भव्य विजयादशमी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम ‘श्री रामलीला कमेटी इंद्रप्रस्थ’ की ओर से आयोजित किया जा रहा है। समारोह में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में प्रतीकात्मक रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।
दशहरा भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत का संदेश देता है। हर साल आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला विजयादशमी पर्व लोगों को सत्य, न्याय और सदाचार के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
आईपी एक्सटेंशन में होगा भव्य विजयादशमी समारोह
पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित उत्सव ग्राउंड में दशहरा समारोह को लेकर विशेष आयोजन की तैयारी की गई है। ‘श्री रामलीला कमेटी इंद्रप्रस्थ’ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भगवान श्रीराम की विजय का उत्सव मनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने से कार्यक्रम को विशेष महत्व मिला है। समारोह का प्रमुख आकर्षण प्रतीकात्मक रावण दहन होगा। इस परंपरा के जरिए लोगों को संदेश दिया जाएगा कि समाज में बुराई, अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता पर अच्छाई की जीत हमेशा महत्वपूर्ण रहती है।
दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। इस अवसर पर अलग-अलग समुदायों और परिवारों के लोग एक साथ जुटकर उत्सव मनाते हैं। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और रावण के साथ हुए युद्ध की कथा का मंचन किया जाता है।
क्या है दशहरे का धार्मिक महत्व?
दशहरे को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था। यह घटना बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में याद की जाती है।
रावण को विद्वान और शक्तिशाली माना जाता था, लेकिन उसके अहंकार और गलत कर्मों ने अंततः उसके पतन का मार्ग तैयार किया। रावण दहन इसी बात का प्रतीक है कि ज्ञान, शक्ति और संपत्ति होने के बावजूद यदि व्यक्ति गलत रास्ते पर चलता है, तो उसका परिणाम विनाशकारी हो सकता है।
दशहरे का एक अन्य धार्मिक संबंध देवी दुर्गा से भी है। मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इस तरह विजयादशमी को अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में शक्ति, साहस और धर्म की विजय के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
रावण दहन से मिलता है बुराइयों को त्यागने का संदेश
दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाने की परंपरा कई स्थानों पर निभाई जाती है। यह आयोजन लोगों को अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानने और उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है।
रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और दूसरी नकारात्मक प्रवृत्तियों से जोड़कर भी देखा जाता है। ऐसे में रावण दहन का संदेश केवल किसी पुतले को जलाने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना और समाज में सद्भाव को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री की मौजूदगी में आयोजित होने वाला आईपी एक्सटेंशन का समारोह भी विजयादशमी की इसी परंपरा और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करेगा। हालांकि, कार्यक्रम में होने वाली अन्य प्रस्तुतियों और गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी की पुष्टि आधिकारिक आयोजन विवरण से की जानी चाहिए।
देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है दशहरा
भारत के अलग-अलग राज्यों में दशहरा मनाने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश एक ही है—सत्य और अच्छाई की जीत। उत्तर भारत में रामलीला और रावण दहन प्रमुख आकर्षण होते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में देवी दुर्गा की आराधना और विजयादशमी से जुड़ी स्थानीय परंपराएं विशेष महत्व रखती हैं।
इस दिन कई लोग मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं, परिवार के सदस्यों और परिचितों से मिलते हैं तथा एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। कई जगहों पर मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
दिल्ली में भी दशहरे के अवसर पर विभिन्न रामलीला मैदानों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं, धार्मिक कथाओं और नैतिक मूल्यों से परिचित कराया जाता है।
विजयादशमी का संदेश आज भी प्रासंगिक
आज के दौर में दशहरे का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। समाज में आपसी सम्मान, ईमानदारी, न्याय और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को मजबूत करने की जरूरत हमेशा बनी रहती है। भगवान श्रीराम के आदर्श मर्यादा, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
आईपी एक्सटेंशन में आयोजित होने वाला विजयादशमी समारोह धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित उपस्थिति के बीच प्रतीकात्मक रावण दहन कार्यक्रम इस पर्व के मूल संदेश को सामने लाएगा। दशहरा लोगों को याद दिलाता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य, धैर्य और सदाचार का मार्ग ही अंततः समाज को सही दिशा देता है।
इस पावन अवसर पर विजयादशमी का संदेश यही है कि लोग अपने जीवन में सकारात्मकता अपनाएं, अहंकार और अन्याय से दूर रहें और अच्छाई की राह पर आगे बढ़ें।
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