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जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़, गुफा से 9 ग्रेनेड और AK-47 के कारतूस बरामद

राजौरी। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जंगल के भीतर एक संदिग्ध आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ किया है। जिले के कोटरंका क्षेत्र में चोर हिल-पंच गब्बर इलाके की एक प्राकृतिक गुफा से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को गुफा के अंदर छिपाकर रखे गए नौ यूबीजीएल ग्रेनेड, एक एके-47 राइफल की मैगजीन और 18 कारतूस मिले। सोमवार, 19 अक्टूबर की शाम हुई इस बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में अतिरिक्त तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि किसी अन्य संदिग्ध ठिकाने या छिपाकर रखे गए हथियारों का पता लगाया जा सके।
खुफिया सूचना के आधार पर चलाया तलाशी अभियान
जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को राजौरी जिले के कोटरंका तहसील अंतर्गत पंच गब्बर क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों और हथियार छिपाकर रखे जाने की सूचना मिली थी।
इसके आधार पर सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान चोर हिल इलाके के जंगल को घेरकर संदिग्ध स्थानों की जांच की गई।
सोमवार सुबह शुरू हुए अभियान के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने जंगल के भीतर मौजूद एक प्राकृतिक गुफा का पता लगाया।
गुफा की जांच करने पर वहां हथियारों और गोला-बारूद की मौजूदगी सामने आई। इसके बाद सुरक्षाबलों ने सामग्री को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया।
गुफा में छिपाकर रखे गए थे नौ ग्रेनेड
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, गुफा से नौ अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर यानी यूबीजीएल ग्रेनेड बरामद किए गए हैं।
इसके अलावा एक एके-47 मैगजीन और एके सीरीज की राइफल में इस्तेमाल होने वाले 18 कारतूस भी मिले हैं।
यूबीजीएल ग्रेनेड विशेष प्रकार के लॉन्चर से दागे जाते हैं। ऐसे गोला-बारूद की बरामदगी को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि इतनी मात्रा में गोला-बारूद का जंगल में छिपाकर रखा जाना किसी संदिग्ध गतिविधि की ओर संकेत करता है।
हालांकि, यह सामग्री किसने और कब गुफा में छिपाई थी, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से की कार्रवाई
इस अभियान में भारतीय सेना की रोमियो फोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम शामिल रही।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, अभियान में सेना की 60 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने भी भाग लिया।
सुरक्षाबलों ने सूचना मिलने के बाद संबंधित जंगल क्षेत्र की घेराबंदी की और तलाशी शुरू की।
अभियान के दौरान प्राकृतिक गुफा के भीतर छिपाकर रखी सामग्री बरामद होने के बाद पूरे क्षेत्र की सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी गई।
संबंधित सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गुफा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
कंडी थाना क्षेत्र में हुई बरामदगी
यह कार्रवाई कोटरंका तहसील के पंच गब्बर इलाके में हुई, जो कंडी पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
राजौरी जिले के कई हिस्सों में घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे इलाकों में तलाशी अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, प्राकृतिक गुफाओं का इस्तेमाल कभी-कभी संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोग छिपने या सामग्री रखने के लिए कर सकते हैं।
इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए जंगलों और दुर्गम इलाकों में तलाशी अभियानों को विशेष महत्व दिया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि बरामदगी के बाद भी आसपास के क्षेत्र में जांच जारी है।
संभावित आतंकी गतिविधियों की जांच
सुरक्षा अधिकारियों ने आशंका जताई है कि गुफा में छिपाए गए हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल किसी आतंकी गतिविधि में किया जा सकता था।
हालांकि, फिलहाल किसी विशेष आतंकी संगठन या व्यक्ति का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद सामग्री का संबंध किसी सक्रिय आतंकी समूह से है या इसे पहले से छिपाकर रखा गया था।
साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि संबंधित इलाके में किसी संदिग्ध व्यक्ति की आवाजाही हुई थी या नहीं।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, समय रहते हुई बरामदगी से संभावित खतरे को टालने में मदद मिली है।
कुछ दिन पहले भी मिला था विस्फोटक उपकरण
राजौरी क्षेत्र में हाल के दिनों में सुरक्षाबलों को संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने की घटनाएं सामने आई हैं।
इससे पहले इसी क्षेत्र में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी आईईडी मिलने की जानकारी सामने आई थी।
इस नई बरामदगी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण राजौरी और आसपास के इलाकों में निगरानी तथा तलाशी अभियानों का महत्व बढ़ गया है।
हालांकि, पूर्व में मिली विस्फोटक सामग्री और सोमवार को बरामद किए गए ग्रेनेड के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
राजौरी-पुंछ में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान
जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिले सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं।
पहाड़ी भूभाग और घने जंगलों के कारण कई स्थानों पर सुरक्षा बलों को विशेष निगरानी रखनी पड़ती है।
इन जिलों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के तहत सेना और पुलिस समय-समय पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाती हैं।
इस तरह के अभियानों का उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना, छिपाए गए हथियार बरामद करना और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा एजेंसियां खुफिया सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध इलाकों में कार्रवाई करती रहती हैं।
बरामद गोला-बारूद को कब्जे में लिया गया
गुफा से मिले नौ यूबीजीएल ग्रेनेड, एक एके-47 मैगजीन और 18 कारतूस सुरक्षाबलों ने कब्जे में ले लिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और प्रकरण दर्ज किया गया है।
जांच के दौरान बरामद सामग्री के स्रोत और उसे छिपाकर रखने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।
यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बरामद गोला-बारूद कितना पुराना है और इसे कब गुफा में रखा गया था।
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जंगलों में तलाशी अभियान जारी
संदिग्ध ठिकाने का पता चलने के बाद सुरक्षाबलों ने आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी रखा है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि आसपास अन्य स्थानों पर भी संदिग्ध सामग्री छिपाकर रखी गई हो सकती है।
हालांकि, अभी तक किसी अन्य हथियार की बरामदगी या संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षाबल क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सतर्क हैं और सुरक्षा संबंधी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
संभावित खतरे को रोकने में मिली सफलता
राजौरी जिले के चोर हिल-पंच गब्बर इलाके में हुई यह बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्राकृतिक गुफा से नौ ग्रेनेड और एके-47 के कारतूस मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि समय रहते गोला-बारूद बरामद होने से इसके संभावित दुरुपयोग को रोका जा सका है।
फिलहाल बरामद सामग्री के स्रोत, संदिग्ध ठिकाने के उपयोग और उससे जुड़े लोगों की पहचान को लेकर जांच जारी है।
सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता पूरे इलाके की तलाशी पूरी करना और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोकना है।





