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‘आतंकवाद का नया ट्रेंड’ इजरायली दूत ने भारत को किया अलर्ट
Kanchan Paikara
7 Oct 2026 7:13 PM IST

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नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की हालिया घटना के बाद भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार ने आतंकवाद के बदलते तरीकों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल जैसे देशों को नए तरह के आतंकी खतरों को लेकर लगातार सतर्क रहना होगा, क्योंकि आतंकी संगठन अपनी रणनीति और क्षमताओं में तेजी से बदलाव कर रहे हैं। अजार ने फ्लाईदुबई की घटना को एक बड़े सुरक्षा संकेत के रूप में देखते हुए कहा कि सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों से भी तेज गति से अपनी तैयारी मजबूत करनी होगी।
इजरायली दूत का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के अंदर गंभीर हिंसक घटना हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, ओमानी मूल के सह-पायलट ने भारतीय कप्तान स्मित मच्छर पर कथित तौर पर हमला किया और विमान को नीचे ले जाने की कोशिश की। घायल कप्तान ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने आरोपी को काबू किया। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। घटना की जांच कई देशों की एजेंसियां कर रही हैं और मकसद को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
‘आतंकी हमसे तेज हो रहे हैं’
रियुवेन अजार ने कहा कि आतंकवादी संगठन नई परिस्थितियों के हिसाब से लगातार अपने तरीकों को बदल रहे हैं। उनका कहना था कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे संभावित खतरों को पहले से पहचानें और उनसे निपटने के लिए अपनी रणनीति को लगातार अपडेट करें।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद केवल पारंपरिक हमलों तक सीमित नहीं रह गया है। अब विमानन, साइबर नेटवर्क, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और अंदरूनी सुरक्षा कमजोरियों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। फ्लाईदुबई की घटना ने खासतौर पर उस खतरे पर ध्यान खींचा है, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ ‘इनसाइडर थ्रेट’ यानी सिस्टम के अंदर मौजूद व्यक्ति से पैदा होने वाला खतरा कहते हैं।
भारत को क्यों किया आगाह?
इजरायली राजदूत ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवादी समूहों का प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित मानना ठीक नहीं होगा। उन्होंने भारत के आसपास के क्षेत्र में सक्रिय आतंकी संगठनों और कट्टरपंथी नेटवर्क का हवाला देते हुए कहा कि इन गतिविधियों की निगरानी जरूरी है। अजार का कहना था कि हमास जैसे संगठन दूसरे चरमपंथी समूहों को प्रेरित कर सकते हैं और इसलिए भारत व इजरायल को सुरक्षा सहयोग मजबूत रखना चाहिए।
हालांकि किसी भी संभावित आतंकी नेटवर्क या हमले के संबंध में भारतीय एजेंसियों की ओर से इस बयान के आधार पर कोई नया पुष्ट मामला घोषित नहीं किया गया है। अजार की टिप्पणी व्यापक सुरक्षा चेतावनी के रूप में सामने आई है।
फ्लाईदुबई घटना ने बढ़ाई विमानन सुरक्षा की चिंता
फ्लाईदुबई की घटना ने अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक अलग प्रकार का सवाल खड़ा कर दिया है। 9/11 के हमलों के बाद दुनिया भर में कॉकपिट दरवाजों को मजबूत किया गया था ताकि बाहरी व्यक्ति आसानी से अंदर प्रवेश न कर सके। लेकिन अगर खतरा खुद कॉकपिट के अंदर से पैदा हो, तो मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह सवाल अब फिर चर्चा में है।
इजरायल ने घटना के बाद देश आने वाले विदेशी एयरलाइन पायलटों की जांच और पहचान सत्यापन को और कड़ा करने की घोषणा की है। वहीं फ्लाईदुबई ने इजरायल रूट पर अपनी सेवाएं जांच के दौरान निलंबित कर दी थीं।
भारत में भी SOP की समीक्षा
फ्लाईदुबई की घटना के बाद भारत की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने भी विमानन सुरक्षा से जुड़ी मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं यानी SOP की समीक्षा शुरू की है। इसमें ग्राउंड स्क्रीनिंग, कॉकपिट एक्सेस, क्रू सिक्योरिटी और उड़ान के दौरान संभावित आपात स्थितियों से निपटने के उपायों को देखा जा रहा है।
इसका मकसद यह जांचना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था ऐसे किसी अंदरूनी खतरे से निपटने के लिए पर्याप्त है या नहीं। हालांकि इस समीक्षा के बाद कौन से नए नियम लागू होंगे, इसे लेकर अभी आधिकारिक रूप से विस्तृत फैसला सामने नहीं आया है।
भारतीय कप्तान की बहादुरी की तारीफ
इजरायली राजदूत ने भारतीय कप्तान स्मित मच्छर की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गंभीर हमले के बावजूद कप्तान ने सूझबूझ और साहस दिखाया। वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, जिससे यात्रियों और अन्य चालक दल के सदस्यों को हस्तक्षेप करने का मौका मिला।
घटना के दौरान विमान तेजी से नीचे आया था और हालात बेहद गंभीर हो गए थे। बाद में यात्रियों, बैकअप पायलटों और अन्य लोगों की मदद से विमान को सुरक्षित उतारा गया। भारतीय कप्तान को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आतंकवाद या मानसिक स्वास्थ्य का मामला? जांच जारी
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फ्लाईदुबई घटना के पीछे मकसद को लेकर जांच अभी जारी है। इजरायल के कुछ अधिकारियों ने इसे आतंकी हमला बताया है, जबकि शुरुआती जांच में सह-पायलट के अकेले काम करने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।इसलिए जांच पूरी होने से पहले इसे किसी व्यापक आतंकी नेटवर्क से निश्चित रूप से जोड़ना सही नहीं होगा।
‘लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं’
रियुवेन अजार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि नए प्रकार के खतरे सामने आने के साथ सुरक्षा एजेंसियों को तकनीक, इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना होगा।
उनके मुताबिक भारत और इजरायल दोनों लंबे समय से आतंकवाद से प्रभावित रहे हैं और ऐसे में दोनों देशों के बीच सूचनाओं और सुरक्षा अनुभवों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर फ्लाईदुबई की घटना ने विमानन सुरक्षा के उस पहलू को सामने ला दिया है, जिसमें खतरा किसी बाहरी यात्री की बजाय खुद चालक दल के भीतर से भी पैदा हो सकता है। इसी संदर्भ में इजरायली दूत की चेतावनी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि आतंकवाद के तरीके बदल रहे हैं और भारत सहित सभी देशों को संभावित नए खतरों को पहचानने तथा उनसे पहले तैयारी करने की जरूरत है।
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