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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने बुधवार को वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में ‘शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का उद्घाटन किया। इस कॉरिडोर को शिंजो आबे की स्मृति और भारत-जापान संबंधों में उनके योगदान को समर्पित किया गया है। कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी याद किया गया।उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे का स्वागत किया और उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम में शिंजो आबे से जुड़ी तस्वीरों और यादों को भी प्रदर्शित किया गया। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में तैयार इस स्मृति कॉरिडोर और फोटो गैलरी में आबे के भारत दौरे, विशेष रूप से वाराणसी यात्रा से जुड़ी तस्वीरों को स्थान दिया गया है।
अकी आबे इस मौके पर भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने पति को याद करते हुए कहा कि यदि शिंजो आबे आज जीवित होते तो इस स्मारक को देखकर बहुत खुश होते। उन्होंने कहा कि वाराणसी और जापान के बीच संबंधों को मजबूत करने में शिंजो आबे की विशेष भूमिका रही थी। उन्होंने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की स्थापना से जुड़ी शिंजो आबे की पहल को भी याद किया।दिसंबर 2015 में तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत दौरे पर वाराणसी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में हिस्सा लिया था। उनकी उस यात्रा को भारत-जापान संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटना माना गया था। इसी यात्रा के दौरान ली गई कई तस्वीरों को अब रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में प्रदर्शित किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने इसे शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव भी है।वाराणसी और जापान के क्योटो शहर के बीच भी लंबे समय से सहयोग का संबंध रहा है। दोनों शहरों के बीच सांस्कृतिक विरासत, शहरी विकास और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की पहल की गई थी। शिंजो आबे के कार्यकाल में भारत-जापान संबंधों को नई दिशा मिली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों ने भी द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर खुद भारत और जापान के सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। इस आधुनिक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण जापान के सहयोग से हुआ था। अब इसी परिसर में शिंजो आबे की स्मृति को समर्पित कॉरिडोर और फोटो गैलरी बनाई गई है, जिससे इस स्थान का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ गया है।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते आने वाले समय में और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीक, निवेश, आधारभूत ढांचे और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। योगी ने शिंजो आबे को भारत का एक सच्चा मित्र बताते हुए उनके योगदान को याद किया।
अकी आबे ने भी भारत और विशेष रूप से वाराणसी से अपने परिवार के भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिंजो आबे के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण था और वह दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते थे। कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने अपने पति को याद किया तो वह भावुक हो गईं।शिंजो आबे जापान के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल थे। उनके कार्यकाल में भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी, बुनियादी ढांचे में निवेश और सुरक्षा सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में संबंध मजबूत हुए। भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना सहित कई अहम परियोजनाओं में जापान की भागीदारी बढ़ी।वाराणसी में बना यह कॉरिडोर केवल एक स्मारक के रूप में नहीं, बल्कि भारत-जापान मित्रता की याद के रूप में भी देखा जा रहा है। इसमें शिंजो आबे की काशी यात्रा और भारत से जुड़ी उनकी यादों को तस्वीरों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को भी भारत-जापान संबंधों में उनके योगदान से परिचित कराना है।
कार्यक्रम के दौरान भारत और जापान के प्रतिनिधियों ने भी शिंजो आबे को श्रद्धांजलि दी। आयोजन में वाराणसी प्रशासन के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस समारोह ने एक बार फिर काशी और जापान के बीच बने विशेष रिश्ते को सामने रखा।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वाराणसी तेजी से वैश्विक सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। जापान के साथ सहयोग से शहर के विकास को नई दिशा मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करेगा।शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन के साथ वाराणसी में भारत-जापान मित्रता से जुड़ा एक और स्थायी प्रतीक जुड़ गया है। यह कॉरिडोर शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोने के साथ उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच बने मजबूत संबंधों को भी याद दिलाता रहेगा।
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