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जवाहर पंडित हत्याकांड में करवरिया बंधुओं को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Shantanu Roy
7 Oct 2026 6:18 PM IST
जवाहर पंडित हत्याकांड में करवरिया बंधुओं को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
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Prayagraj. प्रयागराज। करीब तीन दशक पुराने चर्चित जवाहर पंडित हत्याकांड में करवरिया बंधुओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत नहीं मिली है। अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व एमएलसी सूर्यभान करवरिया और रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू की दूसरी जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद तीनों अभियुक्तों के जेल से बाहर आने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
मामला प्रयागराज के राजनीतिक इतिहास की सबसे चर्चित आपराधिक घटनाओं में से एक माना जाता है। 13 अगस्त 1996 को तत्कालीन समाजवादी पार्टी विधायक जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित की इलाहाबाद के सिविल लाइंस इलाके में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि हमलावरों ने उन पर एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल मच गई थी। जवाहर पंडित की हत्या के मामले में लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया चली। कई वर्षों तक सुनवाई और साक्ष्यों पर विचार के बाद ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2019 में करवरिया बंधुओं समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की गई। इसी अपील के लंबित रहने के दौरान उम्रकैद की सजा काट रहे कपिल मुनि करवरिया, सूर्यभान करवरिया और रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू ने दूसरी बार जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की डिविजन बेंच ने की। अदालत ने अभियुक्तों की ओर से प्रस्तुत दलीलों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार किया। इसके बाद बेंच ने तीनों की दूसरी जमानत अर्जियां खारिज करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल तीनों अभियुक्तों को जेल में ही रहना होगा। हालांकि उनकी आपराधिक अपील पर सुनवाई की प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी। जमानत अर्जियां खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि मुख्य अपील पर फैसला हो गया है, बल्कि दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील अभी न्यायिक विचाराधीन है। जवाहर पंडित हत्याकांड प्रयागराज की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। 1996 में हुई इस वारदात के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर काफी चर्चित रहा। प्रयागराज में बाद के वर्षों में भी कई हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्याओं ने सुर्खियां बटोरीं, जिनमें वर्ष 2005 का तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड भी शामिल है। फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा आदेश से करवरिया बंधुओं को तत्काल जमानत मिलने की संभावना समाप्त हो गई है। अब सभी की निगाहें उनकी लंबित आपराधिक अपील की आगे की सुनवाई पर रहेंगी।
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