- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- जंतर मंतर पर धरना देने...
दिल्ली-एनसीआर
जंतर मंतर पर धरना देने से पहले जरूरी होगी पुलिस की मंजूरी
Ratna Netam
7 Oct 2026 7:08 PM IST

x
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर और सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने बुधवार को नियम स्पष्ट किए। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी भी तरह की बैठक, धरना, प्रदर्शन या विरोध कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सक्षम अधिकारी से पहले अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए आयोजकों को प्रस्तावित कार्यक्रम की तारीख से कम से कम 10 दिन पहले नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) के पास आवेदन देना होगा।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले और उसके बाद जारी पुलिस स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुरूप है, जो सार्वजनिक स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और सभाओं को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। पुलिस ने विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट के **मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ एवं अन्य** मामले का उल्लेख किया है। इस फैसले में अदालत ने जंतर-मंतर के सीमित उपयोग की अनुमति देते हुए पुलिस आयुक्त को ऐसी गतिविधियों के लिए उचित नियमन और दिशानिर्देश तैयार करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे स्थानीय निवासियों, कार्यालयों, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था के अधिकारों के साथ संतुलित करना भी जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने जंतर-मंतर क्षेत्र में सीमित और नियंत्रित तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने की व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक जंतर-मंतर पर कार्यक्रम आयोजित करने के इच्छुक संगठन या समूह को पहले अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन में कार्यक्रम की प्रकृति, आयोजकों की जानकारी, संभावित प्रतिभागियों की संख्या, समय और अन्य जरूरी विवरण देना पड़ सकता है। पुलिस संबंधित परिस्थितियों, सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ की संभावना और इलाके में दूसरे कार्यक्रमों को देखते हुए आवेदन पर निर्णय लेती है।
पुलिस ने साफ किया कि आवेदन कम से कम 10 दिन पहले जमा किया जाना चाहिए। बुधवार को जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि संबंधित आवेदन नई दिल्ली जिले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को दिया जाना जरूरी है। बिना मंजूरी आयोजित कार्यक्रम को नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और ऐसी स्थिति में पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
दिल्ली पुलिस ने इसके साथ ही सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस के अनुसार सेंट्रल विस्टा के कई प्रमुख इलाकों में प्रदर्शन, धरना और सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं है। इनमें इंडिया गेट, सी-हेक्सागन, मान सिंह रोड, जनपथ, राजपथ यानी मौजूदा कर्तव्य पथ और आसपास के लॉन शामिल हैं।
सेंट्रल विस्टा राजधानी का प्रमुख प्रशासनिक और सार्वजनिक क्षेत्र है। यहां संसद भवन, प्रमुख केंद्रीय सरकारी इमारतें, कर्तव्य पथ और इंडिया गेट जैसे महत्वपूर्ण स्थान स्थित हैं। यह इलाका बड़ी संख्या में पर्यटकों, सरकारी कर्मचारियों और आम लोगों की आवाजाही वाला क्षेत्र भी है। केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सेंट्रल विस्टा राष्ट्रीय समारोहों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रमों का प्रमुख स्थल है।
पुलिस का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में अनियंत्रित सभा या प्रदर्शन से यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और सार्वजनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। पुराने पुलिस आदेशों में भी इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा लॉन, राजपथ और आसपास के क्षेत्रों में सार्वजनिक बैठकों और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे यातायात अवरोध, सुरक्षा और सार्वजनिक शांति से जुड़े कारण बताए गए हैं।
दिल्ली पुलिस की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लगातार राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शन हो रहे हैं। हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर कई राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। कुछ प्रदर्शनों को पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आयोजित करने की कोशिश की गई, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और मामले भी दर्ज किए गए।
2 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कड़ी की थी। उस दौरान कई इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए थे। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और मध्य दिल्ली में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया था।
इसके बाद लगातार कई दिनों तक अलग-अलग समूह जंतर-मंतर और चुनाव आयोग की ओर मार्च करने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने कई जगह बैरिकेड लगाए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कई FIR भी दर्ज की गईं।
बुधवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया। विपक्ष SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग से जवाब और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े नियमों को सार्वजनिक रूप से दोहराया है। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं है, लेकिन वहां कार्यक्रम आयोजित करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन और अनुमति लेना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मूल उद्देश्य भी विरोध के अधिकार और स्थानीय निवासियों तथा सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करना था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए पुलिस को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे आसपास रहने वाले लोगों, कार्यालयों और यातायात को अनावश्यक परेशानी न हो।
इस तरह दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि जंतर-मंतर पर धरना या प्रदर्शन करने के लिए पहले से अनुमति जरूरी है और आवेदन कम से कम 10 दिन पहले देना होगा। वहीं सेंट्रल विस्टा के निर्धारित इलाकों में विरोध-प्रदर्शन और धरने की अनुमति नहीं है। हाल के राजनीतिक प्रदर्शनों के बीच जारी यह स्पष्टीकरण राजधानी में सार्वजनिक विरोध कार्यक्रमों के नियमों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Next Story





