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फार्मा और मेडटेक सेक्टर को बड़ा बढ़ावा 41 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर मुहर
Ratna Netam
30 Sept 2026 10:00 PM IST

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नई दिल्ली। देश के फार्मा और मेडिकल टेक्नोलॉजी सेक्टर में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ‘प्रमोशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन फार्मा मेडटेक सेक्टर’ (PRIP) योजना के तहत पहली बार मंगाए गए प्रस्तावों की प्रक्रिया पूरी करते हुए 41 रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के लिए करीब 1,600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
जारी जानकारी के अनुसार मंजूर किए गए इन 41 प्रोजेक्ट्स के जरिए लगभग 3,020 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निजी निवेश आने की उम्मीद है। सरकारी सहायता और निजी निवेश को मिलाकर इन परियोजनाओं में कुल रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D निवेश करीब 4,620 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
सरकार का लक्ष्य PRIP योजना के माध्यम से भारतीय फार्मा और मेडटेक सेक्टर को केवल कम लागत वाले उत्पादन पर आधारित मॉडल से आगे बढ़ाकर रिसर्च और इनोवेशन आधारित क्षेत्र के रूप में विकसित करना है। योजना को औषधि विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय संचालित कर रहा है और इसका कुल वित्तीय परिव्यय 5,000 करोड़ रुपये रखा गया है।
मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स का दायरा फार्मा और मेडटेक इनोवेशन की पूरी वैल्यू चेन तक फैला हुआ है। इनमें नई दवाओं की खोज, नई जैविक दवाओं के विकास, क्लिनिकल डेवलपमेंट, जटिल जेनेरिक दवाओं और नई मेडिकल टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इससे शुरुआती रिसर्च से लेकर किसी उत्पाद को बाजार के लिए तैयार करने तक अलग-अलग चरणों में काम करने वाली कंपनियों और संस्थानों को सहायता मिलने की उम्मीद है।
PRIP योजना में नई दवाओं के अलावा कॉम्प्लेक्स जेनेरिक और बायोसिमिलर तथा नई मेडिकल डिवाइस को प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसके तहत AI और मशीन लर्निंग आधारित मेडिकल उपकरण, सॉफ्टवेयर आधारित मेडिकल डिवाइस, जेनेटिक टेक्नोलॉजी पर आधारित डायग्नोस्टिक उपकरण, सर्जिकल रोबोटिक्स और नई इन-विट्रो डायग्नोस्टिक तकनीकों जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
मंजूर प्रोजेक्ट्स में शुरुआती चरण की रिसर्च के साथ ऐसे प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जो टेक्नोलॉजी या दवा विकास के अपेक्षाकृत आगे के स्तर पर पहुंच चुके हैं। PRIP के मौजूदा ढांचे में शुरुआती चरण के प्रोजेक्ट्स के लिए स्टार्टअप और MSME को सहायता देने की व्यवस्था है, जबकि बाद के चरण की परियोजनाओं में बड़ी कंपनियां भी वित्तीय सहायता हासिल कर सकती हैं।
योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दवा खोज से लेकर उसके व्यावसायिक इस्तेमाल तक लगने वाले समय और वित्तीय जोखिम को कम करना भी है। नई दवा या मेडिकल डिवाइस विकसित करने में लंबा समय और बड़ी पूंजी लग सकती है। कई रिसर्च प्रोजेक्ट शुरुआती या क्लिनिकल चरण में पर्याप्त फंडिंग नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पाते। सरकार की कोशिश है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को वित्तीय समर्थन देकर भारत में ही नई दवाओं और तकनीकों के विकास की संभावनाएं बढ़ाई जाएं।
41 परियोजनाओं के लिए लगभग 1,600 करोड़ रुपये की सहायता के मुकाबले करीब 3,020 करोड़ रुपये के निजी निवेश की उम्मीद को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि सरकारी सहायता के साथ निजी कंपनियां भी इन रिसर्च परियोजनाओं में बड़ी राशि लगाने की तैयारी कर रही हैं। कुल 4,620 करोड़ रुपये का संभावित R&D निवेश भारतीय फार्मा-मेडटेक रिसर्च इकोसिस्टम के विस्तार में मदद कर सकता है।
PRIP योजना में उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष जोर है। सरकार चाहती है कि विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों में विकसित तकनीकों को केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उद्योग के सहयोग से उन्हें बाजार तक पहुंचाने योग्य उत्पादों में बदला जाए। आधिकारिक योजना के उद्देश्यों में इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग और दवा तथा मेडिकल डिवाइस के तेजी से विकास एवं व्यावसायीकरण को प्रमुख स्थान दिया गया है।
भारत दुनिया के प्रमुख फार्मा उत्पादकों में शामिल है, लेकिन सरकार का फोकस अब नई दवाओं, नई जैविक तकनीकों और अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में घरेलू रिसर्च क्षमता बढ़ाने पर है। PRIP को इसी बदलाव के लिए तैयार की गई प्रमुख योजनाओं में से एक माना जा रहा है। केंद्र ने इससे पहले भी कहा था कि योजना का उद्देश्य भारतीय फार्मा-मेडटेक सेक्टर को लागत आधारित विकास से इनोवेशन आधारित विकास की ओर ले जाना है।
योजना के तहत सात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च यानी NIPER में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का भी प्रावधान है। इन केंद्रों के जरिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और उद्योग की जरूरतों के मुताबिक अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की योजना है।
पहले चरण में चुने गए प्रोजेक्ट्स की सूची में नई केमिकल और बायोलॉजिकल दवाओं के साथ कॉम्प्लेक्स जेनेरिक और नई मेडिकल डिवाइस पर काम करने वाली इकाइयां शामिल हैं। PRIP के आधिकारिक पोर्टल पर चयनित संस्थाओं और कंपनियों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। इनमें शुरुआती चरण और बाद के चरण की दोनों तरह की परियोजनाएं शामिल हैं।
इन प्रोजेक्ट्स से यह भी उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में भारत की आयात निर्भरता कम करने, घरेलू मेडिकल टेक्नोलॉजी विकसित करने और वैश्विक बाजार के लिए नए उत्पाद तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही फार्मा और मेडटेक रिसर्च से जुड़े स्टार्टअप, वैज्ञानिक, शोध संस्थान और कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
पहली कॉल में 41 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने के बाद PRIP का अगला चरण भी शुरू हो चुका है। योजना के आधिकारिक पोर्टल पर दूसरी कॉल के तहत शुरुआती और बाद के चरण की परियोजनाओं से नए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
करीब 4,620 करोड़ रुपये के संभावित कुल R&D निवेश वाले इन 41 प्रोजेक्ट्स को सरकार भारत के फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में रिसर्च आधारित विकास को गति देने की दिशा में अहम शुरुआत के रूप में देख रही है। अब इन परियोजनाओं की प्रगति और उनसे विकसित होने वाली नई दवाओं तथा मेडिकल टेक्नोलॉजी पर नजर रहेगी।
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