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राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा शिक्षा सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल
Ratna Netam
30 Sept 2026 9:49 PM IST

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नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने और सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित नहीं करती। राहुल गांधी का यह बयान उनके हालिया छात्र संवाद कार्यक्रमों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों की ही अगली कड़ी है।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मोदी जी सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ हैं। उनका पूरा सिस्टम शिक्षा से नफरत करता है क्योंकि वे नहीं चाहते कि छात्र सोचें या सवाल पूछें।” यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को सामाजिक और आर्थिक समानता से जोड़ते हुए दावा किया कि सवाल करने वाले छात्र सत्ता और मौजूदा व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं।
कांग्रेस नेता पिछले कुछ समय से विद्यार्थियों, परीक्षाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। 19 सितंबर को इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में भी उन्होंने इसी तरह का तर्क दिया था। उस कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि छात्र व्यवस्था के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे सवाल पूछते हैं। उन्होंने दावा किया था कि मौजूदा सिस्टम ऐसे युवाओं को पसंद करता है जो सवाल न करें और हर बात को स्वीकार कर लें।
इंदौर कार्यक्रम में राहुल गांधी ने पेपर लीक, स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति, शिक्षा पर सरकारी खर्च और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे भी उठाए थे। उन्होंने छात्रों से कहा था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं बल्कि सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और स्थापित धारणाओं को चुनौती देने की क्षमता विकसित करना भी होना चाहिए। उन्होंने सरकार पर सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया था। यह आरोप केंद्र सरकार ने स्वीकार नहीं किया है।
राहुल गांधी ने जुलाई में लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान भी विद्यार्थियों के सवाल उठाए थे। उस समय उन्होंने छात्र को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया था जो यह स्वीकार करता है कि उसका ज्ञान पूर्ण नहीं है और नई जानकारी के आधार पर अपने विचार बदल सकता है। उन्होंने युवाओं के विरोध और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से सुनने की जरूरत पर जोर दिया था।
बुधवार की पोस्ट में सामाजिक न्याय का मुद्दा जोड़ते हुए राहुल गांधी ने शिक्षा तक समान पहुंच को भी अपनी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया। कांग्रेस नेता लंबे समय से SC, ST और OBC समुदायों के प्रतिनिधित्व, जाति जनगणना और संस्थानों में भागीदारी का मुद्दा उठाते रहे हैं। कांग्रेस का तर्क है कि शिक्षा और सरकारी संस्थानों में सभी सामाजिक वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार शिक्षा और सामाजिक न्याय के खिलाफ होने के राहुल गांधी के आरोपों से अलग तस्वीर पेश करती है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में मंत्रालय को 1,39,289.48 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट अनुमान की तुलना में 8.27 प्रतिशत अधिक है। इसमें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के लिए 83,562.26 करोड़ रुपये तथा उच्च शिक्षा विभाग के लिए 55,727.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इस बजट को युवाओं, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार अवसरों को बढ़ाने वाला बताया है।
केंद्र सरकार का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में पहुंच, समानता, किफायती शिक्षा और समावेशन को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए कई छात्रवृत्ति योजनाएं चला रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और OBC विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित विभिन्न योजनाओं के जरिए उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं पर पिछले तीन वित्त वर्षों में 19,216 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है। सरकार इन आंकड़ों को शिक्षा में सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की अपनी नीति के प्रमाण के रूप में पेश करती है।
OBC, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और विमुक्त, घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू समुदायों के छात्रों के लिए भी छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सितंबर में केंद्र ने कहा था कि PM-YASASVI जैसी योजनाओं के माध्यम से स्कूल और कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता दी जा रही है।
ऐसे में राहुल गांधी का ताजा बयान शिक्षा नीति पर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। कांग्रेस जहां पेपर लीक, सरकारी शिक्षण संस्थानों, आरक्षण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर सरकार को घेर रही है, वहीं केंद्र शिक्षा बजट में वृद्धि, छात्रवृत्ति योजनाओं और नई शिक्षा नीति के जरिए समावेश बढ़ाने का दावा कर रहा है।
राहुल गांधी ने अपनी हालिया छात्र बैठकों के जरिए युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उनकी बुधवार की पोस्ट में भी इसी राजनीतिक संदेश को दोहराया गया कि लोकतांत्रिक और शैक्षणिक व्यवस्था में विद्यार्थियों को सवाल पूछने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। केंद्र की नीतियों को लेकर उनके आरोप राजनीतिक विवाद का विषय हैं और सरकार अपने शिक्षा बजट तथा कल्याणकारी योजनाओं को इन आरोपों के विपरीत अपने रिकॉर्ड के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
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