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राम मंदिर की जमीन और चंदे पर विवाद जयराम रमेश ने उठाए सवाल
Ratna Netam
22 Oct 2026 2:55 PM IST

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नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े जमीन के सौदों और श्रद्धालुओं से प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण और चंदे के प्रबंधन से जुड़े गंभीर सवालों का अब तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है।जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि अयोध्या में जमीन के सौदों और चंदे के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। इसके बावजूद कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने संबंधित मामलों की जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई।
जमीन के सौदों को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर पहले सामने आए विवादों का भी मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि मंदिर निर्माण के नाम पर हुए कुछ जमीन सौदों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे, लेकिन उन सवालों का स्पष्ट और विस्तृत जवाब जनता के सामने नहीं रखा गया।रमेश ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर निर्माण के लिए जुटाई गई धनराशि और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सवाल उठाने वालों को संतोषजनक जानकारी देने के बजाय मामले को राजनीतिक विवाद बताकर टालने की कोशिश की जाती रही है।
चंदे में कथित गड़बड़ी की जांच पर भी विवाद
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला भी पिछले कुछ महीनों से विवादों में रहा है। इस प्रकरण में विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।सितंबर 2026 में जयराम रमेश ने इस जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि जांच का दायरा सीमित रखा गया है। उन्होंने जानना चाहा था कि चढ़ावे के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका की व्यापक जांच क्यों नहीं की गई। कांग्रेस ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच और वित्तीय व्यवस्थाओं के फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी उठाई थी।
BJP-RSS और VHP की जवाबदेही पर जोर
जयराम रमेश ने भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका को लेकर भी सवाल किए। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिर निर्माण और उससे संबंधित व्यवस्थाओं में प्रभाव रखने वाले संगठनों को श्रद्धालुओं के सामने वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।कांग्रेस नेता का कहना है कि देशभर के श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के साथ मंदिर के लिए योगदान दिया है। इसलिए धनराशि के संग्रह, उसके इस्तेमाल और कथित गड़बड़ियों की जांच से जुड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।
जांच में सामने आ चुके हैं महत्वपूर्ण तथ्य
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे की नकदी को बिना अनुमति हटाने की 105 घटनाएं सीसीटीवी फुटेज में सामने आई थीं। हालांकि जांच दल ने चांदी की ईंटों सहित कुछ अन्य कीमती चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितता नहीं मिलने की जानकारी भी दी थी।वहीं, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने पहले एसआईटी जांच का हवाला देते हुए कहा था कि चढ़ावे की चोरी से अलग अन्य गड़बड़ी सामने नहीं आई है।इस प्रकार जांच और उसके निष्कर्षों को लेकर कांग्रेस और संबंधित संगठनों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
राम मंदिर के मुद्दे पर फिर तेज हुई सियासत
कांग्रेस का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि सभी संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।जयराम रमेश के ताजा आरोपों के बाद राम मंदिर की जमीन और चंदे से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं पर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। हालांकि जमीन सौदों में कथित अनियमितताओं और संबंधित संगठनों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को अभी सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में जांच के प्रमाणित निष्कर्ष और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होंगे।
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