व्यापार
PNB समेत कई बैंकों ने ग्राहकों को दिया झटका, जानें क्या बदला
Ashish verma
8 Oct 2026 5:27 PM IST

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Business : देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी किए जाने के बाद पंजाब नेशनल बैंक (PNB) समेत कई प्रमुख बैंकों ने कर्ज की ब्याज दरों में इजाफा किया है। इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। ब्याज दर बढ़ने से ग्राहकों की मासिक किस्त यानी EMI बढ़ सकती है या कर्ज चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक समेत कई बैंकों ने रेपो रेट से जुड़ी अपनी कर्ज दरों में बदलाव किया है। नई दरों का असर विशेष रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा, जिनके लोन की ब्याज दर सीधे आरबीआई के रेपो रेट से जुड़ी हुई है।
आरबीआई ने बढ़ाया रेपो रेट
भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले रेपो रेट 5.25 प्रतिशत था। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मौद्रिक नीति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक धन उपलब्ध कराता है। इस दर में बढ़ोतरी होने से बैंकों की उधारी लागत प्रभावित हो सकती है।
ऐसी स्थिति में बैंक अपनी कर्ज दरों में संशोधन कर सकते हैं। हालांकि, रेपो रेट बढ़ने का असर सभी प्रकार के लोन पर एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ग्राहक का लोन किस ब्याज दर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
PNB समेत इन बैंकों ने बढ़ाईं ब्याज दरें
रेपो रेट में बदलाव के बाद कई प्रमुख बैंकों ने अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट में बढ़ोतरी की है। इनमें पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक शामिल हैं।एचडीएफसी बैंक सहित अन्य कर्जदाताओं की ब्याज दरों में बदलाव की जानकारी भी सामने आई है। संशोधित दरें 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की खबर है।
हालांकि, अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें और उन्हें लागू करने की तारीखें अलग हो सकती हैं। इसलिए ग्राहकों को अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या लोन खाते में संशोधित दर की जानकारी देखनी चाहिए।
होम लोन लेने वालों की बढ़ सकती है EMI
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर लंबी अवधि के कर्ज पर दिखाई दे सकता है। खासकर होम लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि घर खरीदने के लिए लिया गया कर्ज आमतौर पर कई वर्षों तक चलता है।अगर किसी ग्राहक ने फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन लिया है, तो संबंधित दर बढ़ने पर उसकी मासिक किस्त में बढ़ोतरी हो सकती है।
कुछ बैंक मासिक किस्त बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प भी अपना सकते हैं। ऐसी स्थिति में ग्राहक की तत्काल EMI समान रह सकती है, लेकिन लंबे समय में उसे अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है।
50 लाख के होम लोन पर कितना पड़ेगा असर?
मान लीजिए किसी ग्राहक ने 50 लाख रुपये का होम लोन 25 साल के लिए 7.50 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर लिया है। यदि ब्याज दर बढ़कर 7.75 प्रतिशत हो जाती है, तो उसकी EMI में लगभग 800 रुपये प्रति महीने की बढ़ोतरी हो सकती है।
इस हिसाब से ग्राहक को सालाना करीब 9,600 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। वास्तविक बढ़ोतरी बकाया ऋण राशि, शेष अवधि और बैंक की रीसेट तारीख पर निर्भर करेगी।
कार लोन और पर्सनल लोन पर भी पड़ेगा प्रभाव
रेपो रेट से जुड़े फ्लोटिंग ब्याज दर वाले कार लोन और पर्सनल लोन ग्राहकों पर भी इसका असर हो सकता है। हालांकि, जिन ग्राहकों ने फिक्स्ड ब्याज दर पर कर्ज लिया है, उनकी ब्याज दर सामान्य तौर पर तय अवधि के दौरान अपरिवर्तित रहती है।जो लोग आने वाले दिनों में नया घर या वाहन खरीदने के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी बैंक की संशोधित ब्याज दरों को ध्यान में रखना होगा।
क्या सभी ग्राहकों की EMI तुरंत बढ़ जाएगी?
बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि सभी ग्राहकों की मासिक किस्त तत्काल बढ़ जाएगी।कई फ्लोटिंग रेट वाले कर्जों में ब्याज दर की समीक्षा एक निर्धारित अवधि के बाद होती है। इसे रीसेट डेट कहा जाता है। संबंधित तारीख आने पर नई दर लागू की जा सकती है।इसके अतिरिक्त, एमसीएलआर आधारित कर्ज और रेपो-लिंक्ड कर्ज में ब्याज दर बदलने की प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए प्रत्येक ग्राहक पर असर उसके लोन समझौते के अनुसार तय होगा।
बैंक ग्राहकों को अब क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद ग्राहकों को अपने लोन खातों की समीक्षा करनी चाहिए। बैंक द्वारा भेजे गए संदेश, ईमेल और ब्याज दर संबंधी सूचनाओं को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।जिन ग्राहकों पर पहले से बड़ा होम लोन है, वे बैंक से संपर्क करके EMI बढ़ाने, लोन अवधि में बदलाव करने या आंशिक भुगतान के विकल्पों की जानकारी ले सकते हैं।
यदि ग्राहक की आर्थिक स्थिति अनुमति देती है, तो अतिरिक्त मूलधन चुकाकर भविष्य के ब्याज खर्च को कम किया जा सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले लागू शुल्क और लोन की शर्तों की जांच करनी चाहिए।
एफडी ग्राहकों को मिल सकता है फायदा
जहां ब्याज दर बढ़ने से कर्ज लेने वालों का खर्च बढ़ सकता है, वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी कराने वाले ग्राहकों को भविष्य में फायदा मिलने की संभावना भी बन सकती है।यदि बैंक जमा पर ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो नई एफडी कराने वाले ग्राहकों को बेहतर रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, रेपो रेट बढ़ने के बाद सभी बैंक अपनी एफडी दरों में तुरंत बढ़ोतरी करें, यह जरूरी नहीं है।
कुल मिलाकर, आरबीआई के रेपो रेट में बढ़ोतरी और प्रमुख बैंकों द्वारा कर्ज दरों में संशोधन से फ्लोटिंग रेट वाले ऋण ग्राहकों का वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। ऐसे में ग्राहकों के लिए अपने लोन की नई ब्याज दर, मासिक किस्त और बची हुई भुगतान अवधि की जानकारी लेना महत्वपूर्ण हो गया है।
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