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नमो भारत स्टेशनों पर दिखेगी देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत
Ratna Netam
8 Oct 2026 4:57 PM IST

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नई दिल्ली। नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को आने वाले समय में आधुनिक परिवहन सुविधाओं के साथ भारत की समृद्ध कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिल सकता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के बीच इस उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य नमो भारत स्टेशन परिसरों को केवल आवागमन के केंद्र के रूप में विकसित करने तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें कला, साहित्य, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी उपयोग में लाना है।
समझौते के तहत दोनों संस्थाएं नमो भारत स्टेशनों पर विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन की संभावनाओं पर मिलकर काम करेंगी। इनमें कला प्रदर्शनियां, साहित्यिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कार्यशालाएं, व्याख्यान और जन-जागरूकता से संबंधित आयोजन शामिल हो सकते हैं। इस पहल के माध्यम से यात्रियों को अपने दैनिक सफर के दौरान भारतीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
NCRTC और IGNCA के बीच यह सहयोग विशेष रूप से दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह कॉरिडोर देश के दो ऐतिहासिक शहरों दिल्ली और मेरठ को जोड़ता है। दोनों शहरों का भारतीय इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।दिल्ली सदियों से राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही है। यहां विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों की स्थापत्य कला, साहित्य, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के उदाहरण देखने को मिलते हैं। वहीं, मेरठ और उसके आसपास के क्षेत्रों का इतिहास भी अत्यंत समृद्ध रहा है।
मेरठ का संबंध प्राचीन भारतीय परंपराओं और महाभारत काल से जुड़ी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक मान्यताओं से बताया जाता है। इसके अतिरिक्त 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत से भी इस शहर का गहरा संबंध है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में मेरठ का विशेष महत्व रहा है।ऐसे में दिल्ली और मेरठ को जोड़ने वाले नमो भारत कॉरिडोर पर सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन यात्रियों को इन शहरों की विरासत के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने का माध्यम बन सकता है।समझौते के अनुसार, दोनों संस्थाएं नमो भारत स्टेशन परिसरों में विशेष रूप से तैयार की गई कला और सांस्कृतिक प्रदर्शनियों के आयोजन की संभावनाएं तलाशेंगी। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से भारत की विविध कलात्मक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा साहित्यिक कार्यक्रम भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय साहित्य, लेखन और सांस्कृतिक विचारों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। सार्वजनिक परिवहन केंद्रों पर इस प्रकार के आयोजन होने से यात्रियों को साहित्य और संस्कृति के प्रति अपनी रुचि बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।कार्यशालाओं और व्याख्यानों के आयोजन की संभावनाओं पर भी दोनों संस्थाएं काम करेंगी। इन कार्यक्रमों में कला, संस्कृति, विरासत और संबंधित विषयों पर जानकारी साझा की जा सकेगी। साथ ही लोगों को विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य सांस्कृतिक गतिविधियों को पारंपरिक संग्रहालयों और सभागारों से आगे बढ़ाकर ऐसे स्थानों तक पहुंचाना है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। नमो भारत स्टेशन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान हैं।दैनिक यात्रियों के अलावा इन स्टेशनों का उपयोग विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और विभिन्न आयु वर्ग के नागरिक करते हैं। ऐसे में स्टेशन परिसरों में सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होने पर अलग-अलग वर्गों के लोगों तक भारतीय कला और विरासत से जुड़ी जानकारी पहुंचाई जा सकती है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र भारत की कला, संस्कृति और विरासत से जुड़े अनुसंधान, दस्तावेजीकरण तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्यरत एक प्रमुख संस्थान है। यह संस्थान भारतीय कला और सांस्कृतिक परंपराओं के अध्ययन तथा संरक्षण से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है।वहीं, NCRTC राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आधुनिक क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था के विकास से जुड़ी संस्था है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरों के बीच परिवहन संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
दोनों संस्थाओं की साझेदारी आधुनिक परिवहन और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। इसके माध्यम से स्टेशन परिसरों के सार्वजनिक उपयोग को व्यापक बनाने और यात्रियों के अनुभव में सांस्कृतिक गतिविधियों को शामिल करने की योजना है।समझौते के अंतर्गत विरासत से जुड़ी विशेष प्रस्तुतियों के आयोजन पर भी विचार किया जाएगा। इन गतिविधियों के जरिए यात्रियों को भारतीय इतिहास और कला की विभिन्न परंपराओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
इसी प्रकार जनभागीदारी आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य केवल प्रदर्शनियां लगाना नहीं, बल्कि ऐसे अवसर तैयार करना भी है, जहां लोग भारतीय कला और संस्कृति के अलग-अलग पहलुओं को समझ सकें।आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था में स्टेशन परिसरों का उपयोग अब केवल ट्रेन पकड़ने और उतरने तक सीमित नहीं रहा है। कई शहरों में सार्वजनिक परिवहन केंद्रों को नागरिक सुविधाओं और सामाजिक गतिविधियों के लिए भी विकसित किया जा रहा है। NCRTC और IGNCA की प्रस्तावित साझेदारी इसी दिशा में एक सांस्कृतिक पहल के रूप में देखी जा सकती है।
हालांकि, नमो भारत के किन-किन स्टेशनों पर सबसे पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। इसी तरह प्रदर्शनियों, साहित्यिक आयोजनों और कार्यशालाओं की तारीखों तथा विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा भी अभी सामने नहीं आई है।समझौता ज्ञापन के बाद दोनों संस्थाएं संभावित गतिविधियों की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगी। कार्यक्रमों के स्वरूप और आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं का निर्धारण आगे की प्रक्रिया में किया जाएगा।
इस पहल की विशेषता यह है कि यात्रियों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए किसी अलग सांस्कृतिक स्थल तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि प्रस्तावित गतिविधियां स्टेशनों पर आयोजित होती हैं, तो लोग अपनी नियमित यात्रा के दौरान भी कला और विरासत से जुड़ी प्रस्तुतियों का अनुभव कर सकेंगे।दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस साझेदारी को विशेष महत्व प्रदान करती है। एक ओर राजधानी दिल्ली की विविध सांस्कृतिक परंपराएं हैं, तो दूसरी ओर मेरठ का प्राचीन विरासत और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा इतिहास है।फिलहाल NCRTC और IGNCA के बीच हुआ समझौता नमो भारत स्टेशन परिसरों में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होगा कि यात्रियों को कला, साहित्य और भारतीय विरासत से जुड़ने के कितने नए अवसर उपलब्ध होते हैं।
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