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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे से मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा कीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अकी आबे से मिलकर उन्हें बेहद खुशी हुई और भारत के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव का वह विशेष सम्मान करते हैं। पीएम मोदी ने शिंजो आबे को भारत का करीबी मित्र और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री ने वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में स्थापित आबे मेमोरियल कॉरिडोर को दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक बताया। इस कॉरिडोर का उद्घाटन बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अकी आबे ने संयुक्त रूप से किया था।
अकी आबे से मुलाकात पर प्रधानमंत्री ने जताई खुशी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर अकी आबे से मुलाकात का उल्लेख करते हुए भारत के प्रति उनके लगाव की सराहना की।
उन्होंने कहा कि अकी आबे के साथ भारत का संबंध लंबे समय से बना हुआ है और वह इस जुड़ाव को बेहद महत्व देते हैं।
प्रधानमंत्री ने शिंजो आबे के साथ अपनी मित्रता को याद करते हुए उनके योगदान की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि पूर्व जापानी प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
प्रधानमंत्री के अनुसार, शिंजो आबे का भारत के प्रति विशेष स्नेह था और उन्होंने भारत-जापान साझेदारी को आगे बढ़ाने में सक्रिय योगदान दिया।
शिंजो आबे को बताया भारत का करीबी मित्र
प्रधानमंत्री मोदी ने शिंजो आबे को भारत का करीबी मित्र और दूरदर्शी नेता बताया।
उन्होंने कहा कि आबे के कार्यकाल में भारत और जापान के बीच संबंधों को नई दिशा मिली।
दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने में शिंजो आबे की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
प्रधानमंत्री मोदी और शिंजो आबे के बीच व्यक्तिगत मित्रता भी दोनों देशों के संबंधों का एक प्रमुख पहलू रही है।
शिंजो आबे ने जापान के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।
उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाया गया।
काशी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृति में वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर बनाया गया है।
बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अकी आबे ने इसका संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
इस अवसर पर भारत और जापान की मित्रता तथा शिंजो आबे के योगदान को याद किया गया।
कॉरिडोर में शिंजो आबे की भारत यात्रा, प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकातों और काशी से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।
इस स्मारक का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को भारत-जापान संबंधों की ऐतिहासिक यात्रा से परिचित कराना है।
कॉरिडोर देखकर भावुक हुईं अकी आबे
वाराणसी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान अकी आबे अपने दिवंगत पति की स्मृतियों को देखकर भावुक हो गईं।
उन्होंने कहा कि इस स्मारक ने उन्हें शिंजो आबे की काशी यात्रा की याद दिला दी।
अकी आबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत के लोगों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि अपने पति की स्मृति में बनाए गए इस कॉरिडोर को देखकर वह अत्यंत भावुक हैं।
अकी आबे ने यह भी कहा कि यदि शिंजो आबे जीवित होते, तो इस सम्मान से बहुत प्रसन्न होते।
उन्होंने काशी आने की अपनी पुरानी इच्छा पूरी होने पर भी खुशी जताई।
वर्ष 2015 में काशी आए थे शिंजो आबे
जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी का दौरा किया था।
इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में हिस्सा लिया था।
काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से शिंजो आबे प्रभावित हुए थे।
उनकी इस यात्रा को भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा गया।
अकी आबे ने भी बुधवार के कार्यक्रम में अपने पति की इसी यात्रा का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि शिंजो आबे काशी और गंगा नदी के प्रति विशेष सम्मान रखते थे।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भी दोस्ती का प्रतीक
वाराणसी का रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भारत और जापान की साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
इसका निर्माण जापान के आर्थिक सहयोग से किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2021 में इस केंद्र का उद्घाटन किया था।
उस अवसर पर प्रधानमंत्री ने शिंजो आबे को याद करते हुए कहा था कि काशी में इस परियोजना की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रधानमंत्री ने बताया था कि आबे के काशी दौरे के दौरान इस केंद्र के निर्माण के विचार पर दोनों के बीच बातचीत हुई थी।
इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाया गया और रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का निर्माण पूरा हुआ।
जापानी सहयोग से बना आधुनिक केंद्र
रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर वाराणसी के प्रमुख सांस्कृतिक और सार्वजनिक आयोजन स्थलों में शामिल है।
यह आधुनिक सुविधाओं से युक्त केंद्र है, जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इसकी वास्तुकला में भारतीय और जापानी सांस्कृतिक तत्वों का समावेश किया गया है।
भवन के बाहरी हिस्से में 108 रुद्राक्ष के प्रतीक लगाए गए हैं।
अकी आबे ने भी अपने संबोधन में इन रुद्राक्ष प्रतीकों का उल्लेख किया और केंद्र के निर्माण में दोनों देशों के सहयोग को याद किया।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी की मित्रता की यादें जुड़ी हुई हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने याद किया मोदी-आबे का संबंध
आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत और जापान के संबंधों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की मित्रता परस्पर विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित थी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, दोनों नेताओं के प्रयासों से भारत और जापान के बीच सहयोग को मजबूती मिली।
उन्होंने कॉरिडोर को शिंजो आबे की स्मृतियों और उनके योगदान को सम्मान देने वाला स्थान बताया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत बनाने में शिंजो आबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
काशी और क्योटो के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव
भारत और जापान की मित्रता में वाराणसी और जापान के क्योटो शहर का भी विशेष महत्व है।
दोनों शहर अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और शिंजो आबे के कार्यकाल में काशी और क्योटो के बीच सहयोग को बढ़ावा मिला था।
अकी आबे ने भी वाराणसी और क्योटो के बीच सांस्कृतिक समानताओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि दोनों शहरों की ऐतिहासिक पहचान और परंपराएं उन्हें विशेष बनाती हैं।
इस सांस्कृतिक जुड़ाव को भारत और जापान के बीच जनता के स्तर पर मित्रता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी भी हुई मजबूत
शिंजो आबे के कार्यकाल में भारत-जापान संबंधों का विस्तार केवल सांस्कृतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा।
दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचा विकास और रणनीतिक साझेदारी को भी बढ़ावा मिला।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत और जापान के तकनीकी सहयोग का प्रमुख उदाहरण है।
इसके अलावा औद्योगिक गलियारों और माल परिवहन से संबंधित परियोजनाओं में भी जापान की भागीदारी रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के उद्घाटन के दौरान भी जापान को भारत के विश्वसनीय विकास साझेदारों में शामिल बताया था।
शिंजो आबे की विरासत को मिलेगा स्थायी सम्मान
जुलाई 2022 में शिंजो आबे के निधन के बाद भारत सहित दुनिया के कई देशों में उनके योगदान को याद किया गया था।
भारत सरकार ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया था।
शिंजो आबे की स्मृति में वाराणसी में स्थापित कॉरिडोर उनके भारत से जुड़े व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों को संरक्षित करने का प्रयास है।
कॉरिडोर में प्रदर्शित तस्वीरें आगंतुकों को उनकी काशी यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ मित्रता की याद दिलाएंगी।
इससे आने वाली पीढ़ियों को भारत-जापान संबंधों के महत्वपूर्ण घटनाक्रम को समझने का अवसर मिलेगा।
भारत-जापान मित्रता का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अकी आबे के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए शिंजो आबे के योगदान को याद किया है।
काशी में उनके नाम पर स्थापित कॉरिडोर दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का प्रतीक है।
बुधवार को हुए उद्घाटन समारोह में अकी आबे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने भी शिंजो आबे के साथ उनकी मित्रता और भारत-जापान साझेदारी की विरासत को रेखांकित किया।
वाराणसी में स्थापित आबे मेमोरियल कॉरिडोर केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक सहयोग, आपसी सम्मान और ऐतिहासिक मित्रता को याद रखने का माध्यम है। प्रधानमंत्री मोदी ने शिंजो आबे को भारत का सच्चा मित्र बताते हुए उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया है।





