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8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी हलचल शुरू होने जा रही है। आयोग की टीम 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में दो दिवसीय बैठक करेगी। इस दौरान केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनसे जुड़े विभिन्न संगठनों, यूनियनों तथा संस्थानों के प्रतिनिधियों से बातचीत की जाएगी। बैठक में वेतन, भत्ते, पेंशन, फिटमेंट फैक्टर और दूसरी सेवा शर्तों से जुड़ी मांगें आयोग के सामने रखी जा सकती हैं। इसके बाद आयोग की अगली बड़ी बैठक 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में प्रस्तावित है।
8वां केंद्रीय वेतन आयोग इस समय अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले अलग-अलग हितधारकों की राय और मांगें जुटा रहा है। आयोग देश के कई शहरों में जाकर कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से चर्चा कर चुका है। बेंगलुरु की बैठक इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। यहां विभिन्न कर्मचारी संगठनों को अपनी समस्याओं, सुझावों और मांगों को सीधे आयोग के सामने रखने का मौका मिलेगा।
सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया था। इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। प्रोफेसर पुलक घोष आयोग के अंशकालिक सदस्य हैं, जबकि पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं। आयोग को केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी लाभों की समीक्षा करके अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी हैं। आयोग को अपने गठन के बाद निर्धारित अवधि में रिपोर्ट देने का जिम्मा मिला है।
7 और 8 अक्टूबर की बैठक खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि इसमें कर्मचारियों के कई लंबे समय से लंबित मुद्दे उठ सकते हैं। कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांगों में न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और बेहतर फिटमेंट फैक्टर शामिल है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर पुराने बेसिक पे को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है।
हालांकि अभी तक 8वें वेतन आयोग ने किसी नए फिटमेंट फैक्टर को अंतिम रूप नहीं दिया है। अलग-अलग कर्मचारी संगठन अपनी-अपनी मांगें आयोग के सामने रख रहे हैं। कुछ संगठनों ने ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग की है ताकि नए वेतन ढांचे में कर्मचारियों के बेसिक वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी हो सके। अंतिम फैसला आयोग की सिफारिश और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
वेतन के साथ पेंशनर्स की मांगें भी इन बैठकों में अहम रहेंगी। कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की ओर से पुरानी पेंशन योजना यानी OPS, न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी, पारिवारिक पेंशन में सुधार और रिटायरमेंट लाभ बेहतर करने जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रेच्युटी, चिकित्सा सुविधा और बीमा से जुड़े लाभों की समीक्षा की मांग भी की जा रही है।
कर्मचारी संगठनों के एजेंडे में महंगाई भत्ते यानी DA और महंगाई राहत यानी DR से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं। संगठनों की ओर से लंबे समय से यह मांग की जाती रही है कि महंगाई भत्ता एक निश्चित स्तर पर पहुंचने के बाद उसे बेसिक पे में मर्ज करने पर विचार किया जाए। हालांकि इस पर भी अभी आयोग या सरकार की ओर से कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
इसके अलावा MACP यानी मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन में सुधार की मांग भी महत्वपूर्ण है। कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलने वाले कर्मचारियों के लिए वित्तीय उन्नयन व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाना चाहिए। कुछ वर्गों के कर्मचारी जोखिम भत्ता, विशेष ड्यूटी भत्ता और काम की प्रकृति के आधार पर अतिरिक्त लाभ की मांग भी कर रहे हैं।
चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी बड़ी मांग सामने आ रही है। कई कर्मचारी और पेंशनर संगठन कैशलेस मेडिकल सुविधा को अधिक व्यापक और आसान बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा से जुड़े भत्ते, यात्रा भत्ता और दूसरे अलाउंस में भी बदलाव की मांग की जा सकती है।
8वें वेतन आयोग ने कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से पहले ही लिखित सुझाव और मेमोरेंडम मांगे थे। इन सुझावों को जमा करने की समय सीमा जून 2026 तक बढ़ाई गई थी। अब आयोग इन दस्तावेजों के साथ-साथ आमने-सामने की बैठकों में संगठनों की बात सुन रहा है।
आयोग की यह प्रक्रिया सिर्फ औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं है। अलग-अलग सरकारी विभागों से आंकड़े और वित्तीय जानकारी भी मांगी जा रही है। हाल ही में केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम यानी CGEGIS से जुड़ा डेटा भी विभिन्न कार्यालयों से मांगा गया है। इसका मकसद मौजूदा लाभों की समीक्षा के लिए वास्तविक आंकड़ों को समझना है। हालांकि डेटा मांगने का मतलब यह नहीं है कि किसी लाभ में बदलाव का फैसला हो चुका है।
बेंगलुरु की बैठक के बाद 8वें वेतन आयोग का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव मुंबई होगा। आयोग 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में हितधारकों के साथ बैठक करेगा। इच्छुक संगठनों और यूनियनों को 10 अक्टूबर तक बैठक के लिए आवेदन करने का मौका दिया गया है। आयोग ने साफ किया है कि बैठक का विस्तृत समय और स्थान संबंधित संगठनों को बाद में बताया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया को केंद्रीय कर्मचारी काफी उम्मीद के साथ देख रहे हैं। वेतन आयोग की सिफारिशों का असर केवल मौजूदा कर्मचारियों पर ही नहीं बल्कि पेंशनर्स पर भी पड़ता है। नया वेतन ढांचा लागू होने पर बेसिक पे, भत्ते, पेंशन और कई दूसरे वित्तीय लाभों में बदलाव हो सकता है।
हालांकि कर्मचारियों को यह भी समझना जरूरी है कि अभी चल रही बैठकें केवल परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं। 7 और 8 अक्टूबर की बैठक में उठने वाली सभी मांगें सीधे लागू नहीं होंगी। आयोग पहले विभिन्न संगठनों की मांगें, सरकार की वित्तीय स्थिति, महंगाई, आर्थिक परिस्थितियों और दूसरे कारकों का अध्ययन करेगा। इसके बाद अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को देगा।
अंतिम रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार यह तय करेगी कि कौन-कौन सी सिफारिशें स्वीकार की जाएंगी और नया वेतन ढांचा किस तारीख से लागू होगा। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित वेतन बढ़ोतरी, फिटमेंट फैक्टर या नए बेसिक पे को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।
कुल मिलाकर 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में होने वाली 8वें वेतन आयोग की बैठक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। इसमें कर्मचारी संगठन वेतन, पेंशन, भत्ते, फिटमेंट फैक्टर, OPS, चिकित्सा सुविधाओं और करियर प्रोग्रेशन समेत कई मांगें आयोग के सामने रख सकते हैं। इसके बाद 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में भी बैठक होगी। अब लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग इन मांगों को अपनी अंतिम सिफारिशों में कितना महत्व देता है।
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