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नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम सब्सिडियरी जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को लेकर बाजार में हलचल तेज हो गई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी इस महीने के तीसरे हफ्ते में अपना आईपीओ लॉन्च कर सकती है। प्रस्तावित शेड्यूल के अनुसार इश्यू 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक खुल सकता है। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बुक 19 अक्टूबर को खुलने की संभावना है और शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है। हालांकि, ये तारीखें अभी रिपोर्ट्स और सूत्रों पर आधारित संभावित तारीखें हैं और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इनमें बदलाव संभव है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ इस साल भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है। कंपनी की तैयारियां लगभग अंतिम चरण में पहुंचने की खबर है। विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों से मिले सकारात्मक रिस्पॉन्स ने भी इस इश्यू को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
21 अक्टूबर से खुलने की संभावना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल सकता है और 23 अक्टूबर को बंद हो सकता है। इससे पहले 19 अक्टूबर को एंकर बुक खोले जाने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह टाइमलाइन कायम रहती है तो 28 अक्टूबर को कंपनी के शेयर शेयर बाजार में लिस्ट हो सकते हैं।
हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अभी अंतिम प्राइस बैंड और आधिकारिक इश्यू शेड्यूल की घोषणा नहीं हुई है। बाजार की स्थिति, वैश्विक घटनाक्रम और निवेशकों की प्रतिक्रिया के आधार पर कंपनी तारीखों में बदलाव कर सकती है।
करीब 3.8 अरब डॉलर का हो सकता है इश्यू
रिपोर्ट्स में जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का आकार करीब 3.8 अरब डॉलर यानी लगभग 33 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है। अगर यह इश्यू इसी आकार में आता है तो यह भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा। कुछ रिपोर्ट्स में कंपनी का संभावित वैल्यूएशन करीब 143-146 अरब डॉलर बताया गया है।
हालांकि अंतिम इश्यू साइज, शेयर प्राइस और कंपनी का वैल्यूएशन आधिकारिक दस्तावेजों में तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जून 2026 में स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया था कि जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP को मंजूरी दी है। प्रस्तावित आईपीओ में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी करने की योजना बताई गई थी। इन शेयरों का फेस वैल्यू 10 रुपये प्रति शेयर है, जबकि इश्यू प्राइस बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के जरिए तय किया जाना है।
इससे यह स्पष्ट है कि जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ सिर्फ बाजार में लिस्टिंग की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कंपनी के लिए पूंजी जुटाने की बड़ी योजना भी है।
₹27,500 करोड़ के कर्ज पर भी नजर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को चुकाने के लिए किया जा सकता है। इससे कंपनी की बैलेंस शीट पर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
किसी बड़ी कंपनी के लिए कर्ज कम होना महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे भविष्य में ब्याज खर्च का दबाव घट सकता है और कारोबार के विस्तार के लिए वित्तीय क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि आईपीओ से जुटाई गई राशि के अंतिम इस्तेमाल की जानकारी कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
ग्रे मार्केट में दिख रहा जबरदस्त उत्साह
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में भी काफी हलचल है। बाजार से जुड़े अनऑफिशियल प्लेटफॉर्म्स पर शेयर के प्रीमियम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में हालिया ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 125-128 रुपये तक बताया गया है।
हालांकि ग्रे मार्केट का प्रीमियम आधिकारिक बाजार भाव नहीं होता। इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है और इसे शेयर की लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं माना जा सकता। इसलिए केवल GMP देखकर आईपीओ में निवेश का फैसला करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
निवेशकों में क्यों है इतना क्रेज?
जियो प्लेटफॉर्म्स को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी की सबसे बड़ी वजह इसका रिलायंस समूह से जुड़ा होना है। कंपनी के कारोबार का बड़ा हिस्सा टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं से संबंधित है। रिलायंस जियो ने पिछले वर्षों में भारत के डिजिटल और मोबाइल बाजार में बड़ा विस्तार किया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलीकॉम के साथ डिजिटल सेवाओं और टेक्नोलॉजी से जुड़े कारोबार भी शामिल हैं। यही कारण है कि निवेशक कंपनी को केवल एक टेलीकॉम कंपनी के तौर पर नहीं देखते, बल्कि इसे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी कंपनी के रूप में देखते हैं।
विदेशी निवेशकों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया
आईपीओ से पहले कंपनी की ओर से घरेलू और विदेशी निवेशकों के साथ बैठकें और रोडशो किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है।
बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी किसी बड़े आईपीओ के लिए महत्वपूर्ण होती है। अगर एंकर बुक को मजबूत रिस्पॉन्स मिलता है तो इससे बाजार में इश्यू को लेकर धारणा बेहतर हो सकती है। हालांकि वास्तविक सब्सक्रिप्शन आंकड़े आईपीओ खुलने के बाद ही सामने आएंगे।
खुदरा निवेशकों के लिए क्या मायने?
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ खुदरा निवेशकों के बीच भी काफी चर्चा में है। लेकिन किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले केवल कंपनी की लोकप्रियता या ग्रे मार्केट प्रीमियम को आधार नहीं बनाना चाहिए।
निवेशक को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाएं, वैल्यूएशन, कर्ज, जोखिम और आईपीओ से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल को समझना चाहिए। खास तौर पर अगर कंपनी का इश्यू आकार बहुत बड़ा है तो लिस्टिंग के बाद शेयर में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
अंतिम तारीखों और प्राइस बैंड का इंतजार
फिलहाल जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की संभावित टाइमलाइन को लेकर तस्वीर काफी हद तक सामने आ चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एंकर बुक 19 अक्टूबर, पब्लिक इश्यू 21 से 23 अक्टूबर और संभावित लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है।
लेकिन निवेशकों को अंतिम तारीख, प्राइस बैंड, लॉट साइज और अन्य जरूरी जानकारी के लिए कंपनी के आधिकारिक आईपीओ दस्तावेजों का इंतजार करना चाहिए। बाजार की परिस्थितियों के कारण प्रस्तावित तारीखें बदल भी सकती हैं।
कुल मिलाकर, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा इवेंट बनने की तैयारी में है। बड़े इश्यू साइज, रिलायंस समूह की ब्रांड वैल्यू, डिजिटल कारोबार और ग्रे मार्केट में दिख रहे प्रीमियम ने निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। अब सबकी नजर आईपीओ के अंतिम प्राइस बैंड और आधिकारिक तारीखों पर है। वहीं, निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि ग्रे मार्केट के प्रीमियम को लिस्टिंग की गारंटी न मानें और निवेश का फैसला कंपनी के फंडामेंटल व जोखिम को समझकर ही लें।
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