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रेपो रेट बढ़ते ही सोना हुआ सस्ता, चांदी के भाव में भी हलचल

Kanchan Paikara
7 Oct 2026 9:05 PM IST
रेपो रेट बढ़ते ही सोना हुआ सस्ता, चांदी के भाव में भी हलचल
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। RBI के इस फैसले के बाद घरेलू कमोडिटी मार्केट में सोना और चांदी दोनों दबाव में दिखाई दिए। MCX पर सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी में भी तेज कमजोरी देखने को मिली। ऐसे में त्योहारी सीजन से पहले खरीदारों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या मौजूदा गिरावट में सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा या अभी और इंतजार करना चाहिए।
MCX पर सोना हुआ सस्ता
7 अक्टूबर को MCX पर दिसंबर एक्सपायरी वाला सोना सुबह के कारोबार में करीब 570 रुपये टूटकर 1,49,550 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। यह करीब 0.38 प्रतिशत की गिरावट थी। दिन के शुरुआती कारोबार में सोने ने करीब 1,49,350 रुपये का निचला और 1,49,736 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर छुआ।
दोपहर और बाद के कारोबार में भी सोना सीमित दबाव में रहा। अलग-अलग रिटेल और सर्राफा स्रोतों में भाव में थोड़ा अंतर दिखाई दिया, क्योंकि इनमें GST, स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और प्रीमियम शामिल होने का तरीका अलग होता है।
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार 7 अक्टूबर को भारत में 24 कैरेट सोने का संकेतात्मक भाव करीब 1,50,090 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव करीब 1,39,280 रुपये प्रति 10 ग्राम था। ये भाव GST और अन्य शुल्क के बिना संकेतात्मक स्तर हैं।
चांदी में ज्यादा गिरावट
सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। MCX पर दिसंबर एक्सपायरी वाली चांदी सुबह करीब 1,472 रुपये गिरकर 2,25,770 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई थी। बाद में गिरावट और बढ़ी और शाम करीब 4:36 बजे MCX पर चांदी 2,24,447 रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी, जो पिछले बंद भाव से 2,795 रुपये यानी करीब 1.23 प्रतिशत नीचे थी।
रिटेल मार्केट के एक अन्य संकेतात्मक आंकड़े के अनुसार भारत में चांदी का भाव 2,22,348 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह करीब 2,26,897 रुपये प्रति किलो था। यानी रिटेल संकेतात्मक भाव में भी करीब 4,549 रुपये प्रति किलो की गिरावट दिखाई दी।
RBI ने क्यों बढ़ाया रेपो रेट?
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत किया है। यह करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी पॉलिसी स्टांस को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इसका मतलब है कि RBI आने वाले समय में महंगाई के आंकड़ों के आधार पर और सख्त कदम उठाने का विकल्प खुला रख रहा है।
रेपो रेट बढ़ने पर सामान्य तौर पर ब्याज दरें ऊपर जाने की संभावना बढ़ती है। इससे ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक हो सकते हैं और बिना ब्याज वाली संपत्ति माने जाने वाले सोने पर कुछ दबाव आ सकता है।हालांकि सोने की कीमत केवल RBI की पॉलिसी से तय नहीं होती।
सोना क्यों गिरा?
सोने की कीमतों पर एक साथ कई घरेलू और वैश्विक कारक असर डालते हैं। इनमें अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और भारतीय रुपये की चाल शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि रेपो रेट बढ़ने के बावजूद बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर रहा। रुपया 96.8450 प्रति डॉलर तक पहुंचा, जो रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 के करीब था। कमजोर रुपया आमतौर पर भारत में आयातित सोने की कीमत को सहारा देता है क्योंकि सोने की अंतरराष्ट्रीय खरीद डॉलर में होती है।
यानी मौजूदा बाजार में एक तरफ ऊंची ब्याज दरों का दबाव है तो दूसरी तरफ कमजोर रुपये और वैश्विक अनिश्चितता से सोने को समर्थन भी मिल सकता है।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
अगर आप शादी, त्योहार या घरेलू उपयोग के लिए सोना खरीद रहे हैं और खरीदारी अगले कुछ दिनों या हफ्तों में करनी ही है, तो मौजूदा गिरावट में कुछ हिस्सा खरीदा जा सकता है। पूरी रकम एक ही दिन लगाने के बजाय खरीदारी को दो या तीन हिस्सों में बांटना कीमत के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम कर सकता है।
उदाहरण के लिए अगर आपको 30 ग्राम सोना खरीदना है तो पहले 10 ग्राम, फिर कीमत में गिरावट आने पर दूसरा हिस्सा और जरूरत के करीब बाकी खरीदारी की जा सकती है।लेकिन केवल इस उम्मीद में बड़ी खरीदारी करना कि सोना निश्चित रूप से तुरंत फिर रिकॉर्ड स्तर पर जाएगा, जोखिम भरा हो सकता है।
निवेश के लिए क्या रणनीति हो?
निवेश के लिहाज से विशेषज्ञ आमतौर पर सोने को पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के साधन के रूप में देखते हैं, न कि पूरी बचत लगाने वाले निवेश के रूप में।अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश बेहतर हो सकता है। गोल्ड ETF या अन्य रेगुलेटेड गोल्ड इन्वेस्टमेंट विकल्पों में भी निवेश किया जा सकता है, लेकिन उसमें भी बाजार जोखिम रहता है।फिजिकल गोल्ड खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी ध्यान में रखना चाहिए। ज्वेलरी बेचने पर मेकिंग चार्ज वापस नहीं मिलता, इसलिए केवल निवेश के लिए ज्वेलरी हमेशा सबसे कुशल विकल्प नहीं होती।
चांदी खरीदने वालों को ज्यादा सावधानी
चांदी में सोने की तुलना में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। चांदी की कीमत पर निवेश मांग के अलावा इंडस्ट्रियल डिमांड भी काफी असर डालती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का इस्तेमाल होने के कारण इसकी कीमत आर्थिक परिस्थितियों से तेजी से प्रभावित हो सकती है।इसलिए केवल एक दिन की बड़ी गिरावट देखकर पूरी रकम चांदी में लगाना जोखिमभरा हो सकता है।
रिटेल भाव अलग क्यों होते हैं?
MCX पर दिखने वाली कीमत और आपके शहर के ज्वेलर का भाव एक जैसा होना जरूरी नहीं है। रिटेल गोल्ड रेट में GST, मेकिंग चार्ज, स्थानीय प्रीमियम और ज्वेलर का मार्जिन शामिल हो सकता है।
इसी कारण खरीदारी से पहले अपने शहर के कम से कम दो या तीन ज्वेलर्स से भाव और मेकिंग चार्ज की तुलना करना बेहतर रहता है। BIS हॉलमार्क और HUID भी जरूर जांचना चाहिए।
कुल मिलाकर 7 अक्टूबर को RBI के रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के दिन सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। MCX पर सोना करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा, जबकि चांदी करीब 2.24 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक फिसली। अगर खरीदारी जरूरत के लिए है तो गिरावट में चरणबद्ध तरीके से खरीदना बेहतर रणनीति हो सकती है। लेकिन निवेश के लिए एक ही दिन की गिरावट को ‘सबसे निचला भाव’ मानकर पूरी रकम लगाना सही नहीं होगा, क्योंकि आने वाले दिनों में डॉलर, रुपये, वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाओं से सोना-चांदी दोनों में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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