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दलाल स्ट्रीट पर लगातार दूसरे दिन तेजी, सेंसेक्स 76 हजार के पार
Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 2:18 PM IST

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बिज़नेस : दिवाली से पहले भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की गई है। मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 800 अंक तक उछल गया, जबकि निफ्टी ने 23,650 के स्तर को पार किया। इससे पहले सोमवार को सेंसेक्स में 1,200 अंकों से अधिक की तेजी दर्ज की गई थी। बाजार की इस जबरदस्त बढ़त से निवेशकों में उत्साह है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों को तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
शेयर बाजार में आई इस तेजी का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों पर भी देखने को मिला। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी, वित्तीय सेवाओं और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में खरीदारी का माहौल बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
सोमवार को सेंसेक्स 1,233 अंक चढ़कर हुआ था बंद
सोमवार, 2 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी तेजी दर्ज की गई थी। बीएसई सेंसेक्स 1,233.25 अंक यानी 1.66 प्रतिशत बढ़कर 75,692.78 के स्तर पर बंद हुआ था।वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 387.70 अंक यानी 1.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,440.80 पर बंद हुआ था।इस तेजी में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का सबसे बड़ा योगदान रहा। सोमवार को रिलायंस के शेयरों में करीब 11.6 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई थी।इसके अलावा मेटल, सीमेंट और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली।
मंगलवार को भी बाजार में खरीदारी जारी
सोमवार की तेजी के बाद मंगलवार को भी बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा।सुबह करीब 9:28 बजे सेंसेक्स 707.90 अंक बढ़कर 76,400.68 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 180.80 अंक चढ़कर 23,621.60 पर पहुंच गया था।कारोबार के दौरान सेंसेक्स की बढ़त लगभग 800 अंकों तक पहुंची और निफ्टी 23,650 के ऊपर निकल गया।इंडिगो और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में करीब तीन प्रतिशत तक तेजी देखी गई। इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और इंफोसिस जैसे शेयरों में भी खरीदारी दर्ज की गई।
1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
शेयर बाजार में तेजी का सबसे महत्वपूर्ण कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है।भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है।हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है।मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रही थी।विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में गिरावट से भारत का आयात बिल कम होने की उम्मीद बढ़ती है। इससे महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ने वाला दबाव भी कुछ हद तक कम हो सकता है।इसी उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है।
2. विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला सहारा
शेयर बाजार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से मिल रहे सकारात्मक संकेतों का भी फायदा हुआ है।पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे थे। हालांकि, हाल के कारोबारी सत्रों में उनके रुख में बदलाव के संकेत दिखाई दिए हैं।रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने नकद बाजार में करीब 6,300 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे बड़ी कंपनियों के शेयरों में मांग बढ़ सकती है।हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ दिनों की खरीदारी को विदेशी निवेश के स्थायी रुझान में बदलाव मानना जल्दबाजी होगी।
3. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव की उम्मीद
बाजार में तेजी की एक और बड़ी वजह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी एलटीसीजी टैक्स को लेकर बढ़ती उम्मीदें हैं।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी निवेशकों की ओर से इक्विटी निवेश पर लगने वाले पूंजीगत लाभ कर की संरचना की समीक्षा करने की मांग पर विचार करने की बात कही है।इस बयान के बाद निवेशकों में उम्मीद बढ़ी है कि भविष्य में सरकार पूंजीगत लाभ कर से जुड़े नियमों की समीक्षा कर सकती है।हालांकि, सरकार की ओर से किसी टैक्स कटौती या नियम में बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।फिलहाल बाजार में तेजी का यह कारण संभावित नीतिगत बदलाव से जुड़ी उम्मीदों पर आधारित है।
4. कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे
भारतीय कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है।कई बड़ी कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे कॉरपोरेट कमाई को लेकर बाजार का भरोसा मजबूत हुआ है।विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज के बेहतर नतीजों ने सोमवार की तेजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य प्रमुख क्षेत्रों की कंपनियों के प्रदर्शन पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियों की कमाई में सुधार जारी रहता है, तो शेयर बाजार को आगे भी सहारा मिल सकता है।
5. वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेत
भारतीय बाजार को वैश्विक स्तर पर बेहतर होते निवेश माहौल का भी फायदा मिल रहा है।अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद तथा कूटनीतिक बातचीत से जुड़े संकेतों ने निवेशकों की चिंता कुछ हद तक कम की है।इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया है।इसके अलावा एशियाई शेयर बाजारों में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला।वैश्विक जोखिम कम होने की उम्मीद से निवेशक उभरते बाजारों की ओर दोबारा रुख कर सकते हैं।
6. गिरावट के बाद सस्ते शेयरों में खरीदारी
विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्ष 2026 में बाजार में आई गिरावट के बाद कई बड़ी कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन पहले की तुलना में आकर्षक हुआ है।ऐसे में निवेशक चुनिंदा मजबूत कंपनियों के शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं।विशेषज्ञ इस प्रक्रिया को वैल्यू बाइंग कहते हैं। इसमें निवेशक उन कंपनियों को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो और जिनके शेयरों का मूल्यांकन अपेक्षाकृत उचित हो।
क्या शेयर बाजार बनाएगा नया रिकॉर्ड?
दिवाली से पहले आई तेजी ने निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को तेजी के दौरान बिना सोच-समझे खरीदारी करने से बचने की सलाह दी है।फिलहाल दलाल स्ट्रीट पर दिवाली से पहले उत्साह का माहौल है। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र की तेजी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। हालांकि, यह तेजी कितने समय तक कायम रहेगी और बाजार नए रिकॉर्ड बनाएगा या नहीं, यह आने वाले कारोबारी सत्रों में स्पष्ट होगा।
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