व्यापार

जियो के मेगा IPO में बैंकरों को झटका, फीस ने किया हैरान

Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 4:26 PM IST
जियो के मेगा IPO में बैंकरों को झटका, फीस ने किया हैरान
x
नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। देश के इस सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बावजूद आईपीओ संभालने वाले निवेश बैंकरों के लिए यह सौदा उतना फायदेमंद साबित नहीं हुआ, जितनी उम्मीद की जा सकती थी। इसकी वजह है फीस का कम होना। करीब 30,213 करोड़ रुपये के इस आईपीओ के लिए 19 बैंकों को कुल लगभग 196 करोड़ रुपये फीस मिलने का अनुमान है। यानी इश्यू के आकार के मुकाबले बैंकों की फीस करीब 0.65 प्रतिशत रही। इससे पहले कई बड़े आईपीओ में बैंकरों को इससे अधिक फीस मिली थी।
निवेशकों ने जमकर लगाया पैसा
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुला था और 23 अक्टूबर 2026 को बंद हुआ। इस दौरान निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में भारी दिलचस्पी दिखाई।आईपीओ को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। यानी उपलब्ध शेयरों की तुलना में निवेशकों ने करीब 22 गुना अधिक शेयरों के लिए आवेदन किया।इसमें सबसे ज्यादा मांग संस्थागत निवेशकों की ओर से आई। योग्य संस्थागत खरीदारों यानी क्यूआईबी की श्रेणी 70.55 गुना सब्सक्राइब हुई। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी को 14 गुना और खुदरा निवेशकों की श्रेणी को 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।इससे पता चलता है कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाई।
19 बैंकों को मिली करीब ₹196 करोड़ की फीस
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को संभालने के लिए 19 बैंकों ने काम किया। इनमें निवेश बैंकिंग और इश्यू प्रबंधन से जुड़े संस्थान शामिल थे।उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इन बैंकों को कुल लगभग 1.96 अरब रुपये यानी करीब 196 करोड़ रुपये फीस के तौर पर मिलेंगे।जब इस रकम की तुलना 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ आकार से की जाती है, तो फीस करीब 0.65 प्रतिशत बैठती है।यही वजह है कि निवेशकों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बावजूद बैंकरों के लिए यह सौदा कम कमाई वाला माना जा रहा है।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बैंकों को वास्तविक नुकसान होने की पुष्टि नहीं है। मामला मुख्य रूप से दूसरे बड़े आईपीओ की तुलना में कम फीस मिलने का है।हुंडई, पेटीएम और स्विगी के आईपीओ से तुलनाजियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से बैंकरों की कमाई की तुलना पिछले कुछ बड़े सार्वजनिक निर्गमों से की जा रही है।
कंपनी आईपीओ का आकार बैंकरों की फीस
हुंडई मोटर इंडिया (2024) ₹27,800 करोड़ ₹490 करोड़
पेटीएम (2021) ₹18,300 करोड़ ₹320 करोड़
स्विगी (2024) ₹11,300 करोड़ ₹280 करोड़
जियो प्लेटफॉर्म्स (2026) ₹30,213 करोड़ ₹196 करोड़
ये आंकड़े प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार हैं।इस तुलना से साफ है कि जियो का आईपीओ आकार के लिहाज से बड़ा होने के बावजूद बैंकरों को मिलने वाली फीस पिछले कुछ चर्चित आईपीओ की तुलना में कम है।
आखिर क्यों कम हुई बैंकरों की कमाई?
इसकी प्रमुख वजह निवेश बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा बताई जा रही है।
बड़े आईपीओ में काम करने का अवसर निवेश बैंकों के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है। ऐसे सौदों में शामिल होने से उनकी बाजार में पहचान बढ़ती है और भविष्य में दूसरे बड़े ग्राहकों से काम मिलने की संभावना मजबूत हो सकती है।
इसी कारण कई बैंक बड़े और चर्चित इश्यू में भूमिका हासिल करने के लिए कम फीस पर भी काम करने को तैयार हो जाते हैं।जियो जैसे बड़े आईपीओ में शामिल होने का फायदा सिर्फ तत्काल फीस तक सीमित नहीं होता। ऐसे सौदे निवेश बैंक की बाजार में रैंकिंग, अनुभव और भविष्य के कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं।
जियो के आईपीओ का आकार कितना बड़ा है?
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ करीब 30,213 करोड़ रुपये का था। इस इश्यू के बाद कंपनी का मूल्यांकन ऊपरी मूल्य दायरे पर लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठा।इस आकार ने इसे भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल कर दिया।
कंपनी का कारोबार दूरसंचार, डिजिटल सेवाओं और तकनीक आधारित समाधानों से जुड़ा है। जियो के पास 50 करोड़ से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ताओं का बड़ा आधार है, जो कंपनी के कारोबार के पैमाने को दर्शाता है।
आईपीओ से मिली रकम का क्या होगा?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा उसकी सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने के लिए निर्धारित किया गया है।इश्यू से प्राप्त राशि में से करीब 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल निर्धारित शर्तों के अनुसार कर्ज के पूर्ण या आंशिक भुगतान में किया जाएगा। शेष राशि सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए रखी गई है।कर्ज का बोझ कम होने से कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की निवेश योजनाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक परिणाम कंपनी के आगामी वित्तीय प्रदर्शन पर निर्भर करेंगे।
28 अक्टूबर को शेयर बाजार में होगी लिस्टिंग
आईपीओ के बाद अब निवेशकों की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में शुरुआत पर है। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होने निर्धारित हैं।निवेशक यह देखना चाहेंगे कि मजबूत सब्सक्रिप्शन के बाद शेयर किस कीमत पर कारोबार शुरू करते हैं।हालांकि, आईपीओ का कई गुना सब्सक्राइब होना लिस्टिंग पर मुनाफे की गारंटी नहीं देता। शेयर की कीमत बाजार की स्थिति, कंपनी के मूल्यांकन और निवेशकों की मांग से प्रभावित होगी।
बैंकरों के लिए कम फीस, लेकिन बड़ा अवसर
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के लिहाज से बड़ी कामयाबी रहा, लेकिन फीस के मोर्चे पर निवेश बैंकों को अपेक्षाकृत कम कमाई हुई।करीब 196 करोड़ रुपये की फीस 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इश्यू के आकार के मुकाबले सीमित है।फिर भी ऐसे बड़े सौदों में शामिल होने से बैंकों को प्रतिष्ठा, अनुभव और भविष्य में बड़े कारोबार के अवसर मिल सकते हैं।
Next Story