वॉशिंगटन: ईरान के साथ युद्ध की बढ़ती लागत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के सामने आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की ओर से कांग्रेस को दिए गए नए अनुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर तक संघर्ष की लागत लगभग 47.1 अरब डॉलर पहुंच गई है। सितंबर की शुरुआत में यह अनुमान 43.6 अरब डॉलर था। इस तरह करीब छह सप्ताह में लागत में लगभग 3.5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं और युद्ध की उपयोगिता तथा उसके खर्च पर बहस तेज है। 
हथियारों की भरपाई में सबसे बड़ी रकम
युद्ध की अनुमानित लागत में सबसे बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद की भरपाई का है। पेंटागन के विवरण के अनुसार, इस मद में लगभग 29 अरब डॉलर की जरूरत आंकी गई है। इनमें हमलावर हथियारों के साथ वे महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें भी शामिल हैं, जिन्हें दुश्मन की मिसाइलें रोकने के लिए दागा जाता है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पैट्रियट और थाड जैसी वायु रक्षा प्रणालियों के हथियारों के भंडार पर भी दबाव पड़ा है। एक पैट्रियट इंटरसेप्टर की कीमत ही लाखों डॉलर होती है। इसलिए युद्ध की लागत में केवल हमले करने का खर्च शामिल नहीं है; सैनिकों, सैन्य प्रतिष्ठानों और अन्य लक्ष्यों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल हथियारों की भरपाई भी बड़ी चुनौती है। 
सैन्य संचालन और उपकरणों के नुकसान का बोझ
ताजा विवरण में सैन्य अभियानों से संबंधित लागत करीब 11.9 अरब डॉलर बताई गई है। इसके अतिरिक्त खोए या नष्ट हुए सैन्य उपकरणों और प्लेटफॉर्म की भरपाई के लिए लगभग 6.1 अरब डॉलर का अनुमान है। इनमें विमान जैसे महंगे सैन्य संसाधन भी आते हैं। संचालन संबंधी आंकड़ों में अमेरिकी वायुसेना का खर्च लगभग 7.6 अरब डॉलर और थलसेना का करीब दो अरब डॉलर बताया गया है। नौसेना की परिचालन गतिविधियों का खर्च भी अरब डॉलर से अधिक है। सैनिकों की सहायता, हवाई परिवहन, जहाजों और विमानों के संचालन जैसी जरूरतें इस लागत का हिस्सा हैं। हथियारों तथा उपकरणों की भरपाई के लिए अनुमानित रकम को पहले ही किए जा चुके नकद भुगतान के समान नहीं माना जाना चाहिए। 
क्षतिग्रस्त ठिकानों की मरम्मत का खर्च शामिल नहीं
47.1 अरब डॉलर का आंकड़ा युद्ध की अंतिम कुल लागत नहीं है। उपलब्ध अमेरिकी सैन्य अनुमान में क्षेत्र के सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को ईरानी हमलों से पहुंचे नुकसान की मरम्मत का खर्च शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में पुनर्निर्माण पर निर्णय होने के बाद वित्तीय जरूरत और बढ़ सकती है। अमेरिकी प्रशासन ने ठिकानों को दोबारा बनाने की लागत इसलिए शामिल नहीं की है, क्योंकि अभी यह निर्धारित नहीं हुआ है कि किन प्रतिष्ठानों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इससे युद्ध के तत्काल संचालन और भविष्य में सामने आने वाले खर्च के बीच अंतर स्पष्ट होता है। फिलहाल घोषित आंकड़े संघर्ष के आर्थिक प्रभाव की पूरी तस्वीर पेश नहीं करते। 
जुलाई के अनुमान से भी काफी आगे पहुंची लागत
जुलाई में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने युद्ध की लागत लगभग 37.5 अरब डॉलर बताई थी। उसके मुकाबले नया अनुमान करीब 9.6 अरब डॉलर अधिक है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह वृद्धि 25 प्रतिशत से ज्यादा है। अमेरिका और इजरायल ने फरवरी में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। ट्रंप ने शुरुआत में संघर्ष कम समय तक चलने की उम्मीद जताई थी। लेकिन क्षेत्र में सैन्य तैनाती बनाए रखने, हथियारों की खपत और उपकरणों के नुकसान ने खर्च बढ़ाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात से होने वाली आमदनी पर दबाव बनाने के लिए नौसैनिक नाकाबंदी भी लागू की है। 
मध्यावधि चुनाव में जवाबदेही का सवाल
युद्ध अब अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी प्रमुख मुद्दा है। ऊर्जा की कीमतों पर संघर्ष के असर और लगातार बढ़ते सैन्य खर्च ने प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। तीन नवंबर के चुनाव से कांग्रेस के नियंत्रण का फैसला होगा, इसलिए रिपब्लिकन पार्टी के लिए यह बहस राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। डेमोक्रेटिक नेताओं ने युद्ध खत्म करने की मांग दोहराई है। सीनेट में अल्पमत के नेता चक शूमर ने प्रशासन पर स्पष्ट योजना और संघर्ष से निकलने की रणनीति के बिना आगे बढ़ने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन 1.5 ट्रिलियन डॉलर के सैन्य बजट प्रस्ताव और युद्ध सहित अन्य प्राथमिकताओं के लिए 95 अरब डॉलर के पैकेज को मंजूरी दिलाने की कोशिश कर रहा है। ये प्रस्तावित रकम मौजूदा युद्ध लागत से अलग हैं। आगे की सैन्य कार्रवाई और हथियारों की भरपाई से जुड़े फैसले तय करेंगे कि अमेरिकी करदाताओं पर अंतिम बोझ कितना बढ़ेगा।
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