इजराइल में सत्ता को लेकर सियासी खींचतान तेज, लिबरमैन के फैसले से गठबंधन के समीकरण उलझे
इजराइल : आम चुनाव के बाद नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पूर्व रक्षा मंत्री और यिसराइल बेतेनु पार्टी के प्रमुख अविगडोर लिबरमैन ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुद पार्टी और अरब राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। लिबरमैन ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी ऐसी सरकार में शामिल नहीं होगी जो नेतन्याहू या अरब दलों के समर्थन पर निर्भर हो। उनके इस रुख ने इजराइल में नई गठबंधन सरकार बनाने की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।यरुशलम, 29 अक्टूबर 2026। इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के बीच सरकार गठन को लेकर बातचीत और बयानबाजी शुरू हो गई है। चुनाव के शुरुआती परिणामों में किसी भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में पूर्व रक्षा मंत्री अविगडोर लिबरमैन ने अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करते हुए नेतन्याहू की लिकुद पार्टी और अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक दलों के साथ सरकार बनाने की संभावना से दूरी बना ली है।इजराइल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। शुरुआती मतगणना में किसी भी प्रमुख गुट को यह संख्या हासिल नहीं हुई है।
'न बीबी, न तिबी' के नारे के बीच गठबंधन पर विवाद
इजराइली राजनीति में 'बीबी' प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का लोकप्रिय उपनाम है, जबकि 'तिबी' अरब नेता अहमद तिबी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।चुनाव के बाद अहमद तिबी ने सोशल मीडिया पर 'या तो बीबी या तिबी' का संदेश देते हुए विपक्षी दलों से सहयोग करने की अपील की थी।इस बयान के बाद इजराइल में इस बात पर बहस तेज हो गई कि क्या नेतन्याहू विरोधी दल अरब पार्टियों के समर्थन से नई सरकार बना सकते हैं।लिबरमैन ने स्पष्ट किया कि वह न तो नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होना चाहते हैं और न ही ऐसी सरकार का समर्थन करेंगे जो अरब राजनीतिक दलों पर निर्भर हो।उनकी पार्टी का यह रुख गठबंधन की बातचीत में महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है।
चुनाव परिणामों में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं
27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद सामने आए शुरुआती आंकड़ों ने इजराइल की राजनीतिक तस्वीर को जटिल बना दिया है।29 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 89.8 प्रतिशत मतों की गणना के बाद नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान था।वहीं, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को लगभग 48 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया।अरब नेतृत्व वाली पार्टियों में जॉइंट लिस्ट को लगभग 12 और मंसूर अब्बास की रा'म पार्टी को सात सीटें मिलने की संभावना जताई गई।इन आंकड़ों के अनुसार, अरब दल नई सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, मतगणना पूरी नहीं हुई है और अंतिम आधिकारिक परिणाम 4 नवंबर को आने की उम्मीद है।
नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की रणनीति
लिबरमैन लंबे समय से नेतन्याहू की राजनीतिक नीतियों के आलोचक रहे हैं। चुनाव परिणामों के बाद उन्होंने लिकुद पार्टी के नेताओं से नेतन्याहू का साथ छोड़ने और विपक्षी खेमे के साथ आने की अपील की।लिबरमैन का कहना है कि इजराइल में एक नई दक्षिणपंथी सरकार बनाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए लिकुद के कुछ सांसदों को वर्तमान नेतृत्व से अलग होना होगा।उन्होंने लिकुद के भीतर असंतुष्ट नेताओं से राजनीतिक बदलाव की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया।हालांकि, अभी तक ऐसी किसी व्यापक टूट या नए गठबंधन के गठन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अरब पार्टियों के समर्थन पर विपक्ष में मतभेद
इजराइल में विपक्षी दलों के बीच सबसे बड़ी चुनौती अरब राजनीतिक पार्टियों के साथ सहयोग के सवाल पर सामने आई है।पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और अविगडोर लिबरमैन ने अरब दलों के समर्थन पर निर्भर सरकार बनाने का विरोध किया है।दूसरी ओर डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने विपक्षी दलों से अरब पार्टियों के साथ बातचीत करने की अपील की है।गोलन का तर्क है कि अरब नागरिकों के मतों को राजनीतिक प्रक्रिया से अलग नहीं किया जाना चाहिए।वहीं, गादी आइजेनकोट ने अरब दलों के साथ सहयोग के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। इनमें इजराइल को यहूदी राष्ट्र के रूप में मान्यता देने और हमास की निंदा करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अहमद तिबी ने विपक्ष से दिखाई एकजुटता की उम्मीद
अरब नेता अहमद तिबी ने चुनावी नतीजों के बाद विपक्षी दलों से एकजुट होकर नई सरकार बनाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा हैउनका कहना है कि यदि विपक्षी दल राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएं तो सरकार गठन के लिए आवश्यक समर्थन जुटाया जा सकता है।अरब पार्टियों ने नागरिक अधिकारों, समानता, स्थानीय समुदायों में अपराध नियंत्रण और आवास संबंधी समस्याओं को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया हैजॉइंट लिस्ट से जुड़े नेताओं का कहना है कि संभावित गठबंधन की बातचीत समान राजनीतिक भागीदारी के आधार पर होनी चाहिए।हालांकि, विपक्ष के भीतर अरब दलों के साथ सहयोग को लेकर अभी सहमति नहीं बन सकी है।
मंसूर अब्बास की पार्टी भी चर्चा में
इजराइल की अरब नेतृत्व वाली रा'म पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास ने चुनाव परिणामों के बाद गठबंधन की संभावनाओं पर बातचीत के संकेत दिए हैं।उनकी पार्टी को शुरुआती अनुमानों में सात सीटें मिलती दिखाई दे रही हैंअब्बास का कहना है कि चुनाव में अरब मतदाताओं की भागीदारी ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत किया है।हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नई सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच पर्याप्त सहमति आवश्यक है।उनकी पार्टी की संभावित भूमिका को लेकर नेतन्याहू विरोधी गुट में अलग-अलग विचार सामने आए हैं।
राष्ट्रपति ने नेताओं से बातचीत की अपील की
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने चुनाव के बाद राजनीतिक दलों से गठबंधन की बातचीत खुले दृष्टिकोण के साथ करने की अपील की है।उन्होंने राजनीतिक नेताओं से देश में स्थिर सरकार बनाने के लिए विकल्प तलाशने को कहा है।इस बीच नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच सत्ता साझा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है।हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि हर्जोग दोनों नेताओं के बीच बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने की व्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं।
लिबरमैन के फैसले से गठबंधन की चुनौती बढ़ी
इजराइल में सरकार गठन की प्रक्रिया अब प्रमुख राजनीतिक दलों के आपसी समझौतों और अंतिम चुनाव परिणामों पर निर्भर करेगी।लिबरमैन द्वारा लिकुद और अरब दलों के साथ गठबंधन से दूरी बनाने के बाद विपक्षी खेमे के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती बनी हुई है।यदि किसी भी राजनीतिक गठबंधन को आवश्यक 61 सांसदों का समर्थन नहीं मिलता, तो नए चुनाव की संभावना भी उत्पन्न हो सकती है।ऐसी स्थिति में नई सरकार बनने तक बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।फिलहाल इजराइल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विपक्षी दल अपने मतभेद दूर कर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटा पाएंगे, या देश को एक बार फिर राजनीतिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।