नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अक्टूबर 2026 में भारत के दोबारा दौरे पर आने की संभावना है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शनिवार को ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026’ में इस प्रस्तावित यात्रा की जानकारी दी। रुबियो का इसी वर्ष दूसरी बार भारत आना दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते उच्चस्तरीय संपर्क और रणनीतिक साझेदारी की अहमियत को दर्शाता है।
गोर के मुताबिक, रुबियो अक्टूबर में कई दिनों के लिए भारत आ सकते हैं। इसके बाद उनकी यात्रा ऑस्ट्रेलिया तक जारी रहेगी, जहां क्वाड की एक और बैठक प्रस्तावित है। ऐसे में उनकी आगामी यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एक साल में दूसरी बार भारत यात्रा
रुबियो इससे पहले 23 से 26 मई 2026 तक चार दिवसीय भारत दौरे पर आए थे। उस यात्रा के दौरान उन्होंने नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, जयपुर और आगरा का दौरा किया था। उनके कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ बैठकें शामिल थीं। इसके अलावा नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक भी हुई थी।
मई की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। ऐसे में अक्टूबर का प्रस्तावित दौरा इन क्षेत्रों में हुई बातचीत को आगे बढ़ाने का अवसर दे सकता है।
क्वाड पर भी रहेगा फोकस
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि रुबियो भारत यात्रा के बाद ऑस्ट्रेलिया जाएंगे, जहां क्वाड से संबंधित बैठक होगी। क्वाड में भारत और अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और रणनीतिक स्थिरता के लिए यह समूह महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
मई में रुबियो की भारत यात्रा के दौरान भी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। उस समय दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने और साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।
व्यापार और ऊर्जा पर बढ़ता सहयोग
भारत-अमेरिका संबंधों में सुरक्षा और रक्षा के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। अमेरिकी राजदूत गोर ने हाल के अपने बयानों में दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्रों में संभावनाओं पर जोर दिया है। अगस्त में भी गोर ने भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के साथ उन्नत विनिर्माण, तकनीक, अंतरिक्ष और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लेकर बातचीत की थी।
ऐसे में रुबियो का प्रस्तावित दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अहम माना जा रहा है। खासतौर पर ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और नई आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े विषयों पर बातचीत आगे बढ़ सकती है।
संबंधों को लेकर अमेरिका का भरोसा
सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत और लगातार विकसित हो रही साझेदारी बताया है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच सहयोग केवल किसी एक सरकार या तत्काल राजनीतिक परिस्थिति पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक साझा हित हैं।
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और उन्नत तकनीक जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं।
मोदी-रुबियो संपर्क भी महत्वपूर्ण
रुबियो की प्रस्तावित भारत यात्रा ऐसे समय में होगी जब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है। मई में भारत दौरे के दौरान रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की थी। उनकी यात्रा के दौरान अमेरिकी पक्ष ने व्यापार और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई थी।
अमेरिकी राजदूत गोर ने जून में भी संकेत दिया था कि रुबियो वर्ष समाप्त होने से पहले दोबारा भारत आने पर विचार कर रहे हैं। अब अक्टूबर की संभावित यात्रा को लेकर सामने आई जानकारी से इस दौरे की संभावना और मजबूत हुई है।
हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका अहम
अमेरिका के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। चीन के बढ़ते प्रभाव, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखलाओं के बीच भारत को अमेरिका एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
भारत भी अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक और आर्थिक सहयोग को अपने व्यापक राष्ट्रीय हितों के अनुरूप आगे बढ़ा रहा है। क्वाड के माध्यम से दोनों देश क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
अक्टूबर में मार्को रुबियो की संभावित दूसरी भारत यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह एक ही वर्ष में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को और गति देगी। व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और हिंद-प्रशांत सुरक्षा जैसे मुद्दों पर प्रस्तावित बातचीत से भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।