सऊदी अरब की बढ़ी मुश्किल हूतियों ने पेरिम द्वीप पर किया कब्जा
नई चुनौती पेरिम द्वीप पर हूतियों का कब्जा
रियाद: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब को बड़ा रणनीतिक झटका लगा है। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित रणनीतिक पेरिम द्वीप पर नियंत्रण कर लिया है। पेरिम को मयून या मायून द्वीप के नाम से भी जाना जाता है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सूत्रों ने हूती लड़ाकों के द्वीप तक पहुंचने और सरकारी बलों के वहां से हटने की पुष्टि की है। हूती ने इसके साथ ही सामने स्थित तटीय शहर धुबाब पर भी नियंत्रण हासिल किया है। पेरिम द्वीप का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बीच स्थित है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा मार्गों में शामिल इस क्षेत्र में हूती की मौजूदगी बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय जहाजों और खासकर सऊदी अरब के तेल निर्यात को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला
इसी बीच सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। हमले के बाद पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। हमले में कुछ लोगों के घायल होने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है। नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है।
यह पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के लिए बेहद अहम मानी जाती है। हाल के महीनों में इसके जरिए प्रतिदिन करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल ले जाया जा रहा था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग 4 से 5 प्रतिशत के बराबर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बीच यह पाइपलाइन सऊदी तेल को लाल सागर की तरफ पहुंचाने के प्रमुख वैकल्पिक रास्तों में से एक बनी हुई थी। हालांकि इसे सीधे तौर पर “अरामको की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त” कहना अभी सावधानी से किया जाना चाहिए। ताजा रिपोर्टों के अनुसार ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन प्रणाली के पंप स्टेशनों को नुकसान पहुंचा है, जबकि पाइपलाइन के वास्तविक हिस्से को कितना नुकसान हुआ है, इसका पूरा विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।
तेल आपूर्ति पर बढ़ा खतरा
हूती के पेरिम द्वीप तक पहुंचने से सऊदी अरब के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों पर खतरा बढ़ा है तो दूसरी तरफ ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले ने वैकल्पिक तेल निर्यात व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार सऊदी कच्चे तेल की आपूर्ति तीन दशकों से अधिक समय के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा है कि समुद्री मार्ग दूसरे जहाजों के लिए सुरक्षित रहेगा, लेकिन सऊदी जहाज उनके पहले घोषित प्रतिबंध के दायरे में हैं। दूसरी ओर यमन की सरकार समर्थित सेनाएं हूती के कब्जे वाले रणनीतिक क्षेत्रों को वापस लेने के लिए जवाबी अभियान की तैयारी कर रही हैं। बाब-अल-मंदेब और होर्मुज दोनों ही वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते हैं। ऐसे में मौजूदा तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति, माल ढुलाई की लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।