वॉशिंगटन/तेहरान : 1 नवंबर। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक नहीं बना सकता। अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही बहाल नहीं होने की स्थिति में वॉशिंगटन दूसरा रास्ता अपनाने के लिए तैयार है।इस बयान को फारस की खाड़ी में समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, मालवाहक जहाजों की आवाजाही और विभिन्न देशों की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
समुद्री मार्ग खोलने को लेकर अमेरिका का दबाव
अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। वॉशिंगटन ने ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में लगाए गए प्रतिबंधों और जहाजों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न करने की कार्रवाई का विरोध किया है।अमेरिकी विदेश विभाग ने इससे पहले भी ईरान पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को दबाव में रखने का आरोप लगाया था। सितंबर में विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा था कि अमेरिका समुद्री आवाजाही में बाधा डालने के ईरानी प्रयासों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाता रहेगा।अमेरिका ने अब फिर संकेत दिया है कि वह समुद्री मार्ग को पूरी तरह बहाल कराने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। हालांकि, दूसरे रास्ते से उसका आशय नई आर्थिक पाबंदियों, कूटनीतिक दबाव या सैन्य कार्रवाई से है, इसे लेकर किसी विशिष्ट नई योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है।संघर्ष शुरू होने से पहले इस रास्ते से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती थी। दुनिया के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर रहा है।सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे ऊर्जा उत्पादक देशों के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है। यहां व्यवधान आने से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।ऊर्जा आपूर्ति में बाधा का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, औद्योगिक उत्पादन, विमानन, बिजली उत्पादन और आवश्यक वस्तुओं की लागत भी इससे प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी गतिरोध
फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। इसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की।इस संघर्ष का व्यापक असर समुद्री व्यापार पर पड़ा। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई और बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाजों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं का इंतजार करना पड़ा।अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री और आर्थिक प्रतिबंध लगाए। वहीं, तेहरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी कार्रवाई उसके तेल निर्यात और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा रही है।दोनों पक्षों के बीच पहले भी संघर्ष विराम और समुद्री मार्ग बहाल करने को लेकर समझौते के प्रयास हुए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
ईरान ने भी रखी हैं अपनी शर्तें
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं।तेहरान की प्रमुख मांगों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंध समाप्त करना, आर्थिक पाबंदियों में राहत और क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने की व्यवस्था शामिल है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अक्टूबर में कहा था कि उनका देश समुद्री यातायात बहाल करने के लिए सात दिवसीय योजना प्रस्तुत कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है।ईरानी पक्ष का कहना है कि समुद्री सुरक्षा बहाल करने के लिए सैन्य दबाव कम करना और आपसी सहमति बनाना आवश्यक है।इस प्रकार जहां अमेरिका समुद्री मार्ग से निर्बाध आवाजाही की मांग कर रहा है, वहीं ईरान इसे व्यापक संघर्ष और आर्थिक प्रतिबंधों के समाधान से जोड़ रहा है।
कतर की मध्यस्थता में बातचीत जारी
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।रॉयटर्स की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी वार्ताकारों और कतर के मध्यस्थों के बीच दोहा में लगातार तीसरे दिन बातचीत हुई। इन चर्चाओं का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए समझौते का रास्ता तलाशना है।रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बहाल करने का मुद्दा प्रमुख है। हालांकि, अभी तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की गई है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन अन्य विकल्पों को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता
होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय से जारी व्यवधान ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता पैदा की है।तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। जहाजरानी कंपनियों को सुरक्षा, बीमा और परिवहन लागत से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समुद्री यातायात सामान्य नहीं होता है तो ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बना रह सकता है।भारत सहित कई एशियाई अर्थव्यवस्थाएं पश्चिम एशिया से ऊर्जा आयात करती हैं। इसलिए इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत के लिए भी महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बातचीत पर
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर केवल अमेरिका और ईरान ही नहीं, बल्कि यूरोपीय तथा एशियाई देश भी चिंतित हैं।ब्रिटेन सहित कई देशों ने पहले समुद्री मार्ग को बिना शर्त खोलने और अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों का सम्मान करने की मांग की थी। विभिन्न देशों ने कूटनीतिक दबाव, आर्थिक उपायों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की है।अब अमेरिका की चेतावनी के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कतर की मध्यस्थता में जारी बातचीत किसी समझौते तक पहुंचती है या दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है।फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिरता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।