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भारत वियतनाम की दोस्ती को मिलेगी नई ताकत, अजीत डोभाल का हनोई दौरा
Ratna Netam
1 Nov 2026 8:27 PM IST

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हनोई/नई दिल्ली : 1 नवंबर। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे हैं। उनकी इस यात्रा को भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक सहयोग, रक्षा संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर संवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डोभाल वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों तथा साझा सुरक्षा हितों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे।भारत और वियतनाम के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देश रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं। अजीत डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।
भारतीय दूतावास ने दी आधिकारिक जानकारी
वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अजीत डोभाल के हनोई पहुंचने की पुष्टि की। दूतावास ने उनका स्वागत करते हुए बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आधिकारिक यात्रा पर वियतनाम पहुंचे हैं और इस दौरान वे दोनों देशों के बीच उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अनुरूप वियतनामी नेतृत्व से बातचीत करेंगे।यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक तथा सुरक्षा संवाद की निरंतरता का हिस्सा है। हालांकि, डोभाल किन नेताओं से मुलाकात करेंगे और बैठकों में किन प्रस्तावों पर अंतिम सहमति बनेगी, इसका विस्तृत कार्यक्रम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मई 2026 में रणनीतिक साझेदारी को मिला था नया दर्जा
भारत और वियतनाम ने मई 2026 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया था। वियतनाम के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई थी।तो लाम ने 5 से 7 मई 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय नेतृत्व के साथ उनकी महत्वपूर्ण बैठकें हुई थीं।मई में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और नई प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था।अजीत डोभाल ने भी उस समय नई दिल्ली में तो लाम से मुलाकात की थी। दोनों पक्षों ने भारत-वियतनाम संबंधों को मजबूत करने और साझा हितों से जुड़े विषयों पर संवाद जारी रखने की आवश्यकता जताई थी।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर रहेगा विशेष ध्यान
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा अधिकारियों के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग की व्यवस्था मौजूद है।हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण विषय है। भारत और वियतनाम समुद्री क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान तथा नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का समर्थन करते रहे हैं।दक्षिण चीन सागर से जुड़े क्षेत्रीय विवादों और समुद्री गतिविधियों के कारण भी सुरक्षा संबंधी संवाद का महत्व बढ़ जाता है।डोभाल की यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। हालांकि, किसी विशेष मुद्दे पर औपचारिक निर्णय की पुष्टि बैठकों के बाद ही हो सकेगी।
अक्टूबर में हुई थी चौथी सुरक्षा वार्ता
अजीत डोभाल की यात्रा से पहले भारत और वियतनाम के बीच 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में चौथी द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता आयोजित की गई थी।इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर और वियतनाम के उप सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल फाम थे तुंग ने की थी।वार्ता के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आतंकवाद निरोध, उभरती प्रौद्योगिकियों और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की थी।दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और साझा हितों से जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।यह सुरक्षा वार्ता वर्ष 2016 में हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाओं के बीच नियमित संपर्क और सहयोग को बढ़ावा देना है।
साइबर सुरक्षा और नई तकनीक भी अहम मुद्दे
डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। भारत और वियतनाम दोनों ही डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा तकनीकी विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।ऐसे में साइबर अपराध, महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे की सुरक्षा और नई तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों पर सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं।अक्टूबर में हुई सुरक्षा वार्ता में साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल किया जाना इस दिशा में दोनों देशों की रुचि को दर्शाता है।अजीत डोभाल की वर्तमान यात्रा इन विषयों पर उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकती है।
संसदीय संबंधों को मजबूत करने की भी पहल
हाल के दिनों में भारत और वियतनाम के बीच संसदीय स्तर पर भी संपर्क बढ़ा है।27 अक्टूबर को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान वियतनाम की सांसद माई डुंग थाई क्विन्ह और संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से मुलाकात की थी।बैठक में दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग, संस्थागत संपर्क, व्यापार, उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई थी।ओम बिरला ने विश्वास जताया था कि इस तरह के संसदीय आदान-प्रदान से भारत और वियतनाम के संबंधों को नई ऊर्जा मिलेगी।
व्यापार और निवेश में भी सहयोग की संभावनाएं
भारत और वियतनाम के बीच आर्थिक संबंध भी लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। दोनों देश आसियान क्षेत्र के साथ आर्थिक संपर्क, व्यापारिक अवसरों और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने में रुचि रखते हैं।वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वहीं, भारत इस क्षेत्र के देशों के साथ अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने पर जोर देता रहा है।भारत और वियतनाम के बीच सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, विनिर्माण, शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं।दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क इन क्षेत्रों में नई पहलों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है।
पहले भी वियतनाम का दौरा कर चुके हैं डोभाल
अजीत डोभाल इससे पहले जुलाई 2024 में वियतनाम गए थे। उस समय उन्होंने वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन महासचिव गुयेन फू त्रोंग के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।उस यात्रा के दौरान डोभाल ने वियतनामी नेतृत्व से मुलाकात कर भारत की ओर से संवेदना व्यक्त की थी।इस बार उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत उच्चस्तरीय बातचीत करना है।
भारत की एक्ट ईस्ट नीति में वियतनाम का महत्वपूर्ण स्थान
भारत की एक्ट ईस्ट नीति में वियतनाम एक महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मैत्रीपूर्ण संबंधों के साथ वर्तमान रणनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ मजबूत संबंध भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं। वियतनाम के साथ सहयोग से भारत को आसियान क्षेत्र में अपनी साझेदारी मजबूत करने के अवसर मिलते हैं।अजीत डोभाल की हनोई यात्रा को इसी व्यापक कूटनीतिक और रणनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।फिलहाल सभी की निगाहें डोभाल और वियतनामी नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों पर हैं। इन वार्ताओं के बाद जारी होने वाली आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगा कि दोनों देशों ने सुरक्षा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए किन कदमों पर सहमति बनाई है।
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