वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 सितंबर (शुक्रवार) को 'पेट्रियट डे' (देशभक्ति दिवस) घोषित किया है। यह दिन 9/11 के उन आतंकी हमलों की 25वीं बरसी है, जिनमें न्यूयॉर्क, वर्जीनिया और पेन्सिलवेनिया में 2,977 लोगों की जान चली गई थी।
बुधवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस से जारी एक घोषणा में ट्रंप ने कहा, "11 सितंबर, 2001 के उस भयानक दिन को बीते हुए एक चौथाई सदी (25 साल) बीत चुके हैं और अमेरिकियों की एक पूरी पीढ़ी अब बड़ी हो चुकी है, जिसे उस मनहूस दिन की कोई प्रत्यक्ष याद नहीं है।"
उन्होंने देश भर में पीड़ितों और उस दिन की घटनाओं को याद करने के संकल्प को फिर से दोहराने का आह्वान किया।
ट्रंप ने कहा, "समय बीतने के साथ वह बात कभी धुंधली नहीं पड़नी चाहिए जो हमारे देश की अंतरात्मा में हमेशा चमकती रहेगी। ग्राउंड ज़ीरो की राख के बीच, हमने 'कभी न भूलने' का पक्का संकल्प लिया था - एक ऐसा संकल्प जिसे हर अमेरिकी के दिल में फिर से जगाया जाना चाहिए, हर क्लासरूम में सिखाया जाना चाहिए और हमारे देश के हर समुदाय में उसका सम्मान किया जाना चाहिए।"
इस घोषणा में बताया गया कि कैसे 11 सितंबर, 2001 को अपहरणकर्ताओं ने चार कमर्शियल विमानों पर कब्ज़ा कर लिया था और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर तथा पेंटागन पर हमला किया था। चौथा विमान पेन्सिलवेनिया के शैंक्सविले के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जब यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं का मुकाबला किया।
ट्रंप ने यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 में सवार यात्रियों के साहस को रेखांकित किया, जिनमें टॉड बीमर भी शामिल थे, जिन्होंने विमान को वापस अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश में अहम भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, "अपनी जान देकर, उन 40 देशभक्तों ने एक शांत मैदान को पवित्र भूमि में बदल दिया - और अमेरिकी लोगों के अटूट संकल्प की एक ऐसी मिसाल कायम की जो हमेशा याद रखी जाएगी।"
राष्ट्रपति ने उन पुलिस अधिकारियों, फायरफाइटर्स, इमरजेंसी कर्मियों, बचाव कर्मियों और स्वयंसेवकों का भी सम्मान किया जिन्होंने हमलों के बाद मदद के लिए कदम उठाए। घोषणा के अनुसार, न्यूयॉर्क शहर में बचाव और लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में लगभग 100 इमरजेंसी और फर्स्ट रिस्पॉन्डर एजेंसियों ने हिस्सा लिया था।
ट्रंप ने कहा, "आतंकवादियों ने हमारे हौसले को तोड़ने की कोशिश की - वे नाकाम रहे। उन्होंने हमें बांटने की कोशिश की - वे ऐसा नहीं कर सके। उन्होंने हमें डराने की कोशिश की - लेकिन इसके बजाय, उन्होंने न्याय के लिए दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को जगा दिया।"
उन्होंने हमलों के बाद हुए संघर्षों में सेवा देने वाले अमेरिकी सशस्त्र बलों के सदस्यों को भी श्रद्धांजलि दी, जिनमें वे लोग भी शामिल थे जो मारे गए या जिन्हें शारीरिक और मानसिक चोटें आईं।
राष्ट्रपति ने कहा, "हमारा देश उनका ऐसा कर्जदार है जिसे कभी चुकाया नहीं जा सकता।" ट्रंप ने कहा कि जिन खतरों की वजह से ये हमले हुए थे, वे अभी खत्म नहीं हुए हैं और उन्होंने देश-विदेश में लगातार सतर्क रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन "ताकत के ज़रिए शांति" की नीति अपनाकर अमेरिका की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, "हमें यह पक्का करना होगा कि 11 सितंबर की यादें इतिहास में कहीं खो न जाएं, बल्कि वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक अमेरिकियों की जीवंत विरासत के तौर पर बनी रहें।"
ट्रंप ने अमेरिका के सभी विभागों, एजेंसियों और संस्थाओं को निर्देश दिया कि वे 2,977 पीड़ितों के सम्मान में अमेरिकी झंडे को आधा झुकाकर रखें। उन्होंने राज्यों और क्षेत्रों के गवर्नरों, संगठनों और आम लोगों को भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
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