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उत्तर प्रदेश
मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से निकाला, अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर भी उठाए सवाल
jantaserishta.com
10 Sept 2026 11:59 AM IST

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब एक दिन पहले ही आकाश आनंद के ससुर और बसपा के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया था। मायावती ने इस फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन इसे काफी देर से उठाया गया कदम बताया।
मायावती ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट के जरिए आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को बसपा के राष्ट्रीय संयोजक पद की सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था। अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह अलग कर दिया गया है।
मायावती ने क्या कहा?
मायावती के मुताबिक, आकाश आनंद अगर पार्टी से अलग होकर स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो अब वह स्वतंत्र हैं। उन्होंने साफ किया कि आकाश को बसपा की किसी जिम्मेदारी में नहीं रखा जाएगा।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे सही कदम बताते हुए कहा कि अगर यह फैसला पहले ही लिया गया होता तो बसपा, बहुजन समाज और पार्टी से जुड़े आंदोलन को कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पार्टी और आंदोलन के व्यापक हित में आकाश आनंद और उनसे जुड़े मामलों को लेकर कई बार कड़े फैसले लेने पड़े।
अशोक सिद्धार्थ की नीयत पर भी सवाल
बसपा प्रमुख ने अपनी पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। उनका कहना था कि राजनीति से संन्यास लेने का फैसला अच्छी बात है, लेकिन यह फैसला पहले लिया जाना चाहिए था।
मायावती ने आरोप लगाया कि अगर अशोक सिद्धार्थ को आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और बसपा के हित की चिंता होती, तो वह पहले ही राजनीति से अलग होने की घोषणा कर देते। उनके मुताबिक, ऐसा नहीं होने से यह सवाल खड़ा होता है कि अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी तरह खत्म हुई हैं या नहीं।
आकाश आनंद की वफादारी पर उठाए सवाल
मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी के प्रति निष्ठा को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आकाश ने अपने ससुर के प्रति अपने जुड़ाव को राजनीतिक करियर से भी ऊपर रखा।
मायावती ने विशेष तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से जुड़ी अपनी पोस्ट को आकाश आनंद की ओर से दोबारा साझा किए जाने की उम्मीद की थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मायावती के अनुसार, पहले आकाश उनके सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करके पार्टी के प्रति अपनी वफादारी दिखाते रहे हैं।
परिवार और पार्टी के हित में किसे प्राथमिकता?
मायावती ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि अगर आकाश आनंद पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित की तुलना में पारिवारिक रिश्तों को ज्यादा महत्व देते हैं, तो वह पार्टी के लिए किस तरह प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ का ध्यान पार्टी और आंदोलन की सफलता से ज्यादा निजी और पारिवारिक हितों पर रहा। हालांकि, ये मायावती के राजनीतिक आरोप हैं और आकाश आनंद या अशोक सिद्धार्थ की ओर से इस पोस्ट पर उनकी प्रतिक्रिया खबर में सामने नहीं आई है।
2025 में भी आकाश आनंद को किया गया था बाहर
आकाश आनंद को बसपा से बाहर किए जाने का यह पहला मामला नहीं है। मायावती ने इससे पहले 3 मार्च 2025 को भी उन्हें पार्टी से निष्कासित किया था। हालांकि, बाद में आकाश आनंद के माफी मांगने के बाद करीब एक महीने में उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया था। इस बार पार्टी से बाहर करने से पहले मायावती ने आकाश आनंद को राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया था और उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद की जिम्मेदारियों से भी मुक्त कर दिया था।
अब अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास और आकाश आनंद के बसपा से पूरी तरह अलग होने के बाद पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खासकर उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति के बीच यह घटनाक्रम बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठन से जुड़े सवालों को और महत्वपूर्ण बना सकता है।
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