नेपाल बाढ़ से मचा हाहाकार 584 की मौत 2482 लोग अब भी लापता
नेपाल बाढ़ से मचा हाहाकार
नई दिल्ली : नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण जलप्रलय ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी आपदा के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 584 तक पहुंच गई है, जबकि 2482 लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों, खराब मौसम और टूटे हुए संपर्क मार्गों के कारण रेस्क्यू टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों और चीन के तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में देखने को मिला है। तेज बहाव के कारण कई गांव, सड़कें, पुल और इमारतें तबाह हो गईं। कई इलाकों में मलबे के नीचे लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटा
इस त्रासदी में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्रियों के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। बताया गया है कि ये तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर लौट रहे थे। बाढ़ आने के समय यह समूह तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र स्थित इमिग्रेशन सेंटर के पास मौजूद था, जहां अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। ईशा फाउंडेशन के अनुसार, समूह में भारत समेत 19 देशों के लोग शामिल थे। इनमें 53 भारतीय मूल के लोग भी बताए जा रहे हैं। संस्था लगातार स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों के संपर्क में है और तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास कर रही है।
कई भारतीय तीर्थयात्री भी लापता
नेपाल जलप्रलय के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा, धार्मिक यात्रा और पर्यटन के लिए इस क्षेत्र में पहुंचे थे। खराब संचार व्यवस्था और रास्ते बंद होने के कारण परिजनों को अपने लोगों की जानकारी मिलने में परेशानी हो रही है। भारत सरकार और भारतीय दूतावास नेपाल प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित भारतीयों की जानकारी जुटाने और सहायता पहुंचाने में लगे हैं। विभिन्न राज्यों ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर अपने नागरिकों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में कई चुनौतियां
बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी इलाकों में फैला मलबा, खराब मौसम और टूटे हुए रास्ते हैं। कई स्थानों पर सड़क और पुल बह जाने से राहत दलों को पैदल और हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंचना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई दूरदराज के इलाकों से अभी तक पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत बढ़ती जा रही है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए मदद का इंतजार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी राहत कार्यों पर नजर बनाए हुए हैं।
परिवारों में बढ़ी चिंता
ईशा फाउंडेशन के लापता तीर्थयात्रियों सहित अन्य लोगों के परिवार लगातार अपने प्रियजनों की जानकारी मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कई परिवारों ने बताया कि अंतिम संपर्क के बाद से कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन और बचाव दलों से लोगों को उम्मीद है कि मलबे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा। नेपाल की यह जलप्रलय हाल के वर्षों की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक बन गई है। लगातार बढ़ता मृतकों का आंकड़ा और हजारों लोगों का लापता होना इस त्रासदी की भयावहता को दिखाता है। फिलहाल पूरा ध्यान राहत बचाव अभियान और लापता लोगों को खोजने पर केंद्रित है।