मिडिल ईस्ट में महासंग्राम अमेरिका की F-35 डील से बढ़ा तनाव
सऊदी को F-35 देने की तैयारी
वाशिंगटन : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी है। करीब 24.3 अरब डॉलर के इस रक्षा सौदे में F-35 लाइटनिंग II जेट्स के साथ इंजन, उपकरण और अन्य सैन्य सिस्टम शामिल हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस सौदे का उद्देश्य सऊदी अरब की रक्षा क्षमता को मजबूत करना और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है। F-35 दुनिया के सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट्स में शामिल है, जो दुश्मन की रडार प्रणाली से बचते हुए लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने की क्षमता रखता है। वहीं दूसरी ओर यमन में सक्रिय हूती संगठन ने लाल सागर क्षेत्र में अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने का दावा किया है। रिपोर्टों के अनुसार हूती लड़ाकों ने लाल सागर से जुड़े यमन के कई इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास की गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
लाल सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से तेल, गैस और अन्य सामानों की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है। हूती हमलों और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण कई बार जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरे की स्थिति बनी है। सऊदी अरब लंबे समय से अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए F-35 विमानों की मांग कर रहा था। इस डील को खाड़ी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस सौदे को पूरा होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।
मिडिल ईस्ट में एक तरफ जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देश अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हूती जैसे संगठन ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि F-35 सौदा तुरंत किसी युद्ध का परिणाम नहीं बदलेगा, लेकिन यह अमेरिका-सऊदी रक्षा संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में लाल सागर की सुरक्षा, यमन संघर्ष और क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।