यूनिसेफ रिपोर्ट का बड़ा खुलासा हर पांचवां बच्चा ऑनलाइन शोषण का शिकार
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा
नई दिल्ली: इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 12 से 17 वर्ष की उम्र के हर पांच में से एक बच्चे ने ऑनलाइन यौन शोषण या उत्पीड़न के किसी न किसी रूप का सामना किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 21 देशों में किए गए सर्वे में करीब 21 हजार इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले बच्चों को शामिल किया गया। अध्ययन में सामने आया कि बड़ी संख्या में बच्चे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनचाहे यौन कंटेंट, जबरन बातचीत और निजी तस्वीरों के दुरुपयोग जैसी घटनाओं का शिकार हुए।
सोशल मीडिया बना बड़ा माध्यम
यूनिसेफ के अनुसार, ऑनलाइन यौन शोषण के ज्यादातर मामले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आए हैं। फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि कई मामलों में आरोपी बच्चे से ऑनलाइन संपर्क बनाने के बाद उसे भावनात्मक रूप से प्रभावित करते हैं और फिर निजी जानकारी या तस्वीरें साझा करने के लिए दबाव डालते हैं। कई बार आरोपी बच्चे के जान-पहचान वाले भी होते हैं।
लाखों बच्चों पर पड़ा असर
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल देशों में करीब 2 करोड़ इंटरनेट उपयोग करने वाले बच्चे एक साल के दौरान ऑनलाइन यौन शोषण या उत्पीड़न से प्रभावित हुए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की थी जिन्हें बिना इच्छा के यौन सामग्री दिखाई गई या निजी तस्वीरें साझा करने के लिए मजबूर किया गया। यूनिसेफ ने कहा है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरे को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून, बेहतर निगरानी व्यवस्था और तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ाना जरूरी है।
AI से बढ़ी नई चुनौती
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग को भी गंभीर चिंता बताया गया है। AI की मदद से बच्चों की फर्जी अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार करने के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक करना, माता-पिता की निगरानी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही इस समस्या से निपटने के लिए बेहद जरूरी है।
शिकायत दर्ज कराने में भी बड़ी कमी
यूनिसेफ की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन शोषण के बहुत कम मामले ही आधिकारिक रूप से सामने आते हैं। कई बच्चे डर, शर्म या जानकारी की कमी के कारण शिकायत नहीं कर पाते। यूनिसेफ ने सरकारों और तकनीकी कंपनियों से अपील की है कि बच्चों के लिए सुरक्षित इंटरनेट वातावरण तैयार किया जाए, ताकि डिजिटल दुनिया उनके विकास का माध्यम बने, खतरे का नहीं।