Washington: वॉशिंगटन: ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयर बेस से जुड़े संदिग्ध बम साजिश मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ब्रिटिश अधिकारियों के साथ मिलकर की गई कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा कि यह एक सफल संयुक्त अभियान था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन की एजेंसियों ने मिलकर इस मामले में काम किया। उन्होंने दावा किया कि संदिग्ध लोगों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी और जांच के बाद उन्हें पकड़ लिया गया।
ट्रंप ने कहा, “ब्रिटेन के साथ काम करना शानदार रहा। यह एक बेहतरीन काम था। हम उन्हें काफी समय से निगरानी में रखे हुए थे और आखिरकार हमने उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि संदिग्ध लोग बड़े नुकसान की योजना बना रहे थे। ट्रंप के अनुसार, उनका उद्देश्य एयर बेस को नुकसान पहुंचाना था। हालांकि, उन्होंने इस मामले में संदिग्धों की पहचान या कथित साजिश से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
RAF फेयरफोर्ड ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है, जहां अमेरिकी वायुसेना के विमान भी समय-समय पर तैनात रहते हैं। इस कारण सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की गतिविधियों को लेकर विशेष सतर्क रहती हैं। मामले से जुड़े अधिकारियों की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित हमले की योजना किसने बनाई थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसियां घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
ट्रंप के बयान के बाद सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ब्रिटेन के साथ सहयोग को सफल बताते हुए दोनों देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी की सराहना की। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां संभावित खतरे, संदिग्ध गतिविधियों और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने के लिए काम कर रही हैं। फिलहाल मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अमेरिका और ब्रिटेन लंबे समय से सुरक्षा और खुफिया मामलों में सहयोग करते रहे हैं। दोनों देशों की एजेंसियां आतंकवाद और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान करती हैं। RAF फेयरफोर्ड मामले में आगे की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कथित साजिश की प्रकृति क्या थी और इसके पीछे कौन लोग थे।
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