बांग्लादेश में खसरे का कहर, 1096 मौतें दर्ज; 1.88 लाख से ज्यादा संदिग्ध मामले
DHAKA ढाका: बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, देश में खसरे जैसे लक्षणों से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1,096 पहुंच गया है। बढ़ते संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार सुबह 8 बजे तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण नौ और बच्चों की मौत हुई है। इन सभी मौतों को फिलहाल संदिग्ध खसरा मामलों के रूप में दर्ज किया गया है।
इन नई मौतों के बाद बांग्लादेश में संदिग्ध खसरा मौतों की संख्या बढ़कर 995 हो गई है, जबकि लैब जांच से पुष्टि की गई मौतों की संख्या 101 बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में देश में खसरे के 1,228 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 1,88,041 हो गई है। वहीं, इसी अवधि में 113 नए पुष्ट खसरा मामले दर्ज किए गए हैं। अब तक देश में प्रयोगशाला जांच से प्रमाणित खसरा मरीजों की संख्या बढ़कर 21,212 हो चुकी है।
अस्पतालों में बढ़ा मरीजों का दबाव
DGHS के अनुसार, 15 मार्च से अब तक बांग्लादेश में खसरे के 1,66,310 संदिग्ध मरीज अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 1,59,519 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बच्चों में संक्रमण तेजी से फैलने के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। प्रशासन संक्रमण की रोकथाम और उपचार व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है।
टीकाकरण व्यवस्था पर उठे सवाल
बांग्लादेश में खसरे के बढ़ते मामलों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में इसे हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया गया है। ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) की रिपोर्ट में कहा गया है कि खसरा जैसी बीमारी को टीकाकरण के जरिए रोका जा सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा संकट अचानक नहीं आया, बल्कि लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों का परिणाम है। रिपोर्ट में टीका आपूर्ति में रुकावट, नियमित टीकाकरण में कमी, पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों में देरी और प्रशासनिक समस्याओं को संक्रमण बढ़ने के कारणों में शामिल किया गया है।
यूनिसेफ ने जताई थी चिंता
रिपोर्ट में यूनिसेफ का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2024 से 2026 के बीच टीकों की संभावित कमी को लेकर कई बार चेतावनी दी गई थी।
यूनिसेफ के अनुसार, बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुमोदित टीकों की खरीद अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रणाली के जरिए करता रहा है। हालांकि, बाद में खरीद प्रक्रिया में बदलाव किए गए।
फिलहाल बांग्लादेश में स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि खसरे की रोकथाम के लिए निगरानी, जांच और टीकाकरण अभियान को तेज करने की जरूरत है।