नई दिल्ली/थिम्पू : 1 नवंबर। केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे से मुलाकात कर भारत और भूटान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, निवेश, संपर्क सुविधाओं और सांस्कृतिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी की सराहना की। रिजिजू ने भूटान की महत्वाकांक्षी गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के प्रति भारत का समर्थन दोहराते हुए कहा कि इसमें दोनों देशों के लिए विकास की अपार संभावनाएं हैं।किरेन रिजिजू 31 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक भूटान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से भी मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 बौद्ध स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया।भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की ओर से रविवार को जारी जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने विशेष मैत्रीपूर्ण संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की सकारात्मक प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। रिजिजू ने कहा कि गेलेफू परियोजना भूटान के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भूटान के प्रधानमंत्री ने किया विशेष स्वागत
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू शनिवार को भूटान पहुंचे थे। पारो हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर भूटान के विदेश मंत्री डीएन धुंग्येल, विदेश सचिव और दोनों देशों के राजनयिक प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।रिजिजू ने सोशल मीडिया पर इस स्वागत को सम्मानजनक और विशेष अनुभव बताया। उन्होंने जानकारी दी कि गेलेफू पहुंचने के बाद भूटान के प्रधानमंत्री स्वयं वाहन चलाकर उन्हें कार्यक्रम स्थल तक ले गए।दोनों नेताओं के बीच इस आत्मीय मुलाकात को भारत और भूटान के घनिष्ठ संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।रिजिजू की यात्रा का प्रमुख उद्देश्य गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाना है।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी पर विशेष चर्चा
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान की एक महत्वाकांक्षी विकास परियोजना है। इसे आधुनिक आर्थिक गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और नागरिकों के कल्याण को एक साथ जोड़ने वाले शहर के रूप में विकसित करने की योजना है।यह परियोजना भारत के असम राज्य की सीमा के निकट स्थित है। इसलिए इसके विकास का प्रभाव भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यापार, परिवहन, पर्यटन और निवेश के अवसरों पर भी पड़ सकता है।किरन रिजिजू ने परियोजना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए इसके क्षेत्रीय विकास में योगदान की संभावनाओं पर जोर दिया।परियोजना का उद्देश्य आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन और लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देना है। भूटान इस शहर को भविष्य के टिकाऊ शहरी विकास के एक नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।हालांकि, परियोजना से जुड़ी आर्थिक संभावनाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए निवेश, आधारभूत संरचना और संपर्क सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण होगा।
108 स्तूपों के ऐतिहासिक समारोह में हुए शामिल
रविवार को गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 बौद्ध स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा का विशेष समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने किया।इस परियोजना की परिकल्पना स्वयं भूटान के राजा ने की थी। उनके मार्गदर्शन में हजारों स्वयंसेवकों ने एक ही दिन में 108 स्तूपों की स्थापना की।ये स्तूप गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में आई यानी माउ नदी के किनारे लगभग 11.7 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं।प्रत्येक स्तूप की ऊंचाई लगभग 15 मीटर है और दो स्तूपों के बीच लगभग 108 मीटर की दूरी रखी गई है।इस आयोजन का उद्देश्य गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को वज्रयान बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ भूटान की आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रदर्शित करना है।
प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया गया 76वां स्तूप
इस समारोह का एक विशेष आकर्षण स्तूप संख्या 76 रहा। भूटान के राजा ने इसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया है।यह सम्मान गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के प्रति प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन और सहयोग के लिए दिया गया।भूटान के राजा, प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्तूप संख्या 76 पर एक साथ प्रार्थना की।इस अवसर पर रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भूटान के राजा के प्रति आभार व्यक्त किया।भारत सरकार ने इस पहल को दोनों देशों के बीच गहरे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक बताया है।
व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर
भारत और भूटान के बीच आर्थिक संबंधों में ऊर्जा क्षेत्र का विशेष महत्व है। दोनों देश लंबे समय से जलविद्युत परियोजनाओं और ऊर्जा व्यापार में सहयोग करते रहे हैं।भूटान की जलविद्युत क्षमता उसके आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है, जबकि भारत उसके प्रमुख व्यापारिक और विकास साझेदारों में शामिल है।दोनों देशों के बीच सड़क संपर्क, व्यापारिक बुनियादी ढांचे और निवेश को लेकर भी सहयोग जारी है।गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी जैसी परियोजनाओं से भविष्य में सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों और संपर्क सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।रिजिजू और भूटान के प्रधानमंत्री की बातचीत में इन क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की सकारात्मक दिशा की सराहना की गई।
पूर्वोत्तर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना
गेलेफू शहर भारत के असम राज्य के निकट स्थित है। ऐसे में प्रस्तावित माइंडफुलनेस सिटी के विकास से पूर्वोत्तर भारत को भी नए आर्थिक अवसर मिल सकते हैं।विशेष रूप से पर्यटन, परिवहन, व्यापार और सेवा क्षेत्र में सीमापार सहयोग बढ़ने की संभावनाएं हैं।भारत की एक्ट ईस्ट नीति के संदर्भ में भी भूटान के साथ संपर्क सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण है। बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल सकता है।हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ परियोजना के क्रियान्वयन और आवश्यक आधारभूत संरचना के विकास पर निर्भर करेगा।
भारत-भूटान की मित्रता को मिलेगी नई दिशा
भारत और भूटान के संबंध राजनीतिक और आर्थिक सहयोग के साथ साझा सांस्कृतिक परंपराओं पर भी आधारित हैं। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय यात्राएं और नियमित संवाद इस साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की वर्तमान यात्रा में गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को विशेष महत्व दिया गया है। भारत ने परियोजना के प्रति समर्थन दोहराते हुए इसे दोनों देशों के विकास के लिए उपयोगी पहल बताया है।रिजिजू और प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे की मुलाकात के बाद यह स्पष्ट है कि दोनों देश विकास सहयोग, ऊर्जा, निवेश, संपर्क सुविधाओं और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दे रहे हैं।गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के निर्माण और उससे जुड़ी भविष्य की योजनाओं पर भारत तथा भूटान के बीच सहयोग आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है।
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