TEHRAN, तेहरान: ईरान ने शनिवार को अमेरिका की ओर से घोषित नए आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की। ईरान ने इन्हें मनमाना बताते हुए कहा कि इनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर में शामिल 'संप्रभु समानता' के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। ये बातें ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने शनिवार को 'X' (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहीं।
बकाई ने कहा, "ईरान पर अमेरिका का नए आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान किसी एक देश के खिलाफ जारी गैर-कानूनी 'आर्थिक युद्ध' से कहीं बढ़कर है। यह संयुक्त राष्ट्र के हर स्वतंत्र सदस्य देश पर अपनी संप्रभुता थोपने जैसा है।"उन्होंने कहा कि कोई भी देश विदेशी बैंकों, कंपनियों या हवाई अड्डों को—जो अपने-अपने संप्रभु देशों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं—किसी तीसरे देश के साथ वैध व्यापार रोकने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा, "ऐसे 'सेकेंडरी प्रतिबंधों' (दूसरे देशों पर लागू होने वाले प्रतिबंधों) का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(1) में शामिल संप्रभु समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं और निकारागुआ मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा पुष्टि किए गए हस्तक्षेप पर लगी पारंपरिक रोक का भी उल्लंघन करते हैं।"बकाई ने आगे आरोप लगाया कि किसी संप्रभु देश को अपनी वैध नीतियों को बदलने के लिए मजबूर करने के मकसद से किया गया आर्थिक दबाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत काम माना जाता है।
उन्होंने कहा, "जब इन मांगों के साथ नौसैनिक नाकेबंदी (जो सैन्य आक्रामकता के बराबर है) को जोड़ दिया जाता है, तो ये अन्य सभी देशों की संप्रभुता को अस्थायी, सशर्त और किसी दूसरी ताकत की मर्जी से खत्म की जा सकने वाली चीज़ बना देती हैं।" उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिबंधों को मानने से न तो सुरक्षा की गारंटी मिलती है और न ही सम्मान; बल्कि इसका मतलब यह स्वीकार करना है कि बैंक, कंपनियां और हवाई अड्डे "सिर्फ विदेशी लाइसेंस के तहत" काम करते हैं।बकाई ने कहा, "इसका नतीजा यह होगा कि संयुक्त राष्ट्र-आधारित अंतर-राज्यीय प्रणाली के मूल आधार के तौर पर संप्रभुता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और यह पूरी तरह से पुराने जमाने के उपनिवेशवाद की ओर लौटने का रास्ता बन जाएगा।"उनके ये बयान वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का एक नया दौर शुरू करने की घोषणा के बाद आए हैं। यह घोषणा दोनों देशों के बीच जारी तनाव और पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता के माहौल में की गई है।
ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ अब तक के "सबसे कठोर आर्थिक अभियान" की घोषणा की और तेहरान को वित्तीय, व्यावसायिक या सरकारी मदद देने वाले देशों को "भारी आर्थिक नतीजों" की चेतावनी दी।अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इन उपायों का निशाना ईरान की आर्थिक जीवन-रेखाएं होंगी, जिनमें तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, एक्सचेंज हाउस, जहाज पंजीकरण और 'फ्रंट कंपनियां' (मुखौटा कंपनियां) शामिल हैं। उन्होंने इस अभियान को "इकोनॉमिक D-डे" भी कहा और अमेरिका के सहयोगियों से ईरान को अलग-थलग करने के लिए वॉशिंगटन का साथ देने की अपील की।