भारत को उम्मीद, अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ की करेगा समीक्षा

Update: 2025-08-27 14:25 GMT

DELHI दिल्ली: भारत सरकार को उम्मीद है कि अमेरिका रूस से तेल खरीदने के चलते लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की समीक्षा करेगा। इस निर्णय से भारतीय वस्त्र, चमड़ा, रत्न और आभूषण जैसे प्रमुख उत्पादों का निर्यात सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने निर्यातकों के साथ सक्रिय बातचीत शुरू की है ताकि प्रभावित उद्योगों को राहत दी जा सके और अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाने के रास्ते तलाशे जा सकें। सरकार इन क्षेत्रों को वित्तीय सहायता देने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

वाणिज्य मंत्रालय इस सप्ताह रसायन, रत्न एवं आभूषण सहित कई क्षेत्रों के निर्यातकों के साथ बैठक करेगा। बैठक में निर्यात विविधीकरण और नए बाजारों में संभावनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही, बजट 2025-26 में घोषित "निर्यात संवर्द्धन मिशन" को तेजी से लागू करने की दिशा में भी काम हो रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि अगले 2-3 दिनों में हितधारकों से इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा की जाएगी। जानकारी के अनुसार, ऊंचे शुल्कों से 48 अरब डॉलर से अधिक के भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। वस्त्र एवं परिधान, रत्न-आभूषण, झींगा, चमड़ा और फुटवियर, पशु उत्पाद, रसायन, विद्युत और यांत्रिक मशीनरी जैसे क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। हालांकि, दवाओं, ऊर्जा उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक सामान पर ये शुल्क लागू नहीं होंगे।

भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर का माल निर्यात किया, जबकि अमेरिका से आयात 45.3 अरब डॉलर रहा। कुल मिलाकर, अमेरिका भारत के 437.42 अरब डॉलर के कुल निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा करता है तो इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, सरकार का उद्देश्य निर्यातकों को अचानक बढ़े शुल्क के असर से बचाना और वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है।

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