इस्लामाबाद। बलोच मानवाधिकार संगठन **‘पांक’ (Paank)** ने याह्या वाहिद मरी और हलील सय्यद की कथित हत्या को लेकर चिंता जताई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि दोनों बलोच युवकों को जुलाई में जबरन गायब किया गया और बाद में पाकिस्तान के **काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD)** ने उनकी हत्या कर दी।पांक ने इसे **‘एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग’ (बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्या)** बताते हुए घटना की निंदा की है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पांक ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
बलोच मानवाधिकार संगठन पांक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म **X** पर एक पोस्ट के जरिए इस मामले की जानकारी दी।संगठन के अनुसार, **23 वर्षीय याह्या वाहिद मरी** और **28 वर्षीय हलील सय्यद** को कथित तौर पर **5 जुलाई 2026** को बलूचिस्तान के **हब चौकी** इलाके में हलील सय्यद के घर से जबरन ले जाया गया था।पांक का दावा है कि दोनों युवक इसके बाद लंबे समय तक लापता रहे और उनके परिवारों को उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
दो महीने से ज्यादा समय तक लापता रहने का दावा
संगठन के मुताबिक, याह्या वाहिद मरी और हलील सय्यद दो महीने से ज्यादा समय तक गायब रहे। इसके बाद पाकिस्तान के CTD ने दावा किया कि दोनों की मौत कराची के **मंगहोपीर इलाके** में हुए एक सशस्त्र अभियान के दौरान हुई।CTD की ओर से कथित तौर पर बताया गया कि यह कार्रवाई आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा थी।
CTD के दावे पर पांक ने जताई आपत्ति
पांक के अनुसार, CTD ने दावा किया था कि दोनों लोग प्रतिबंधित संगठन **बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF)** से जुड़े हुए थे।CTD के दावे में यह भी कहा गया कि अभियान के दौरान उनके पास से हथियार बरामद किए गए, जिनमें एक कलाश्निकोव राइफल और एक पिस्तौल शामिल थी।हालांकि, पांक ने इस आधिकारिक दावे को खारिज कर दिया है। संगठन का कहना है कि दोनों युवक पहले से ही हिरासत में थे और बाद में उन्हें कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया।
मानवाधिकार संगठन ने उठाई जांच की मांग
पांक ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि जबरन गायब किए जाने और हिरासत में मौत जैसे मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।मानवाधिकार संगठनों की ओर से लंबे समय से पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में लापता होने के मामलों को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
बलूचिस्तान में मानवाधिकार मुद्दे
बलूचिस्तान पाकिस्तान का एक संवेदनशील क्षेत्र है, जहां लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। क्षेत्र में अलगाववादी समूहों की गतिविधियों के साथ-साथ सुरक्षा अभियानों को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं।मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा अभियानों के दौरान नागरिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां अक्सर आतंकवाद और हथियारबंद समूहों के खिलाफ कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बताती हैं।
फर्जी मुठभेड़ के आरोप
पांक ने इस घटना को कथित **‘फर्जी एनकाउंटर’** बताया है। संगठन का आरोप है कि दोनों युवकों की मौत कानूनी प्रक्रिया के बिना हुई।ऐसे मामलों में मानवाधिकार संगठन आमतौर पर पारदर्शी जांच, जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग करते हैं।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल इस मामले को लेकर पांक के आरोप और CTD के दावे अलग-अलग हैं। मामले की वास्तविक स्थिति को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।आने वाले समय में यदि कोई आधिकारिक जांच या बयान सामने आता है तो घटना से जुड़ी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।