बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: चार और बच्चों की मौत, मृतकों की संख्या हुई 1057
Dhaka. ढाका। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर होता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों से चार और बच्चों की मौत हुई है। इसके साथ ही 2026 में देश में खसरे से पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,057 हो गई है। बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, चारों नई मौतों को खसरे से हुई संदिग्ध मौतों की श्रेणी में रखा गया है। इसके बाद संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 956 हो गई है, जबकि खसरे से 101 मौतों की पुष्टि हुई है। यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) ने यह जानकारी दी।
पिछले 24 घंटों के दौरान खसरे के 1,148 नए संदिग्ध मामले सामने आए। इसके साथ ही देश में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,79,814 हो गई है। वहीं, खसरे के 88 नए मामलों की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई, जिसके बाद पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 20,562 हो गई। डीजीएचएस के मुताबिक, 15 मार्च से अब तक खसरे जैसे लक्षणों वाले 1,58,589 मरीजों को बांग्लादेश के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 1,52,225 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।
देश में खसरे के मामलों में तेज बढ़ोतरी के बीच एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पैरवी समूह ने हाल ही में 2026 के प्रकोप को बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया। समूह ने इस बात पर भी चिंता जताई कि टीकाकरण के जरिए इस बीमारी की रोकथाम संभव है।
कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी रिपोर्ट ‘प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश 2026 मीजल्स आउटब्रेक’ में कहा कि आम लोगों को खसरे का यह प्रकोप अचानक सामने आया संकट लग सकता है, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से यह अप्रत्याशित नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट के पीछे कई कारण रहे। इनमें 2024-25 के दौरान मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के समय टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में व्यवधान, नियमित टीकाकरण में चूक, निर्धारित पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों को रद्द किया जाना, टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाली आबादी की समय रहते पहचान नहीं होना शामिल है।
जीसीडीजी के मुताबिक, बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से स्वीकृत टीकों की खरीद संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला के माध्यम से करता रहा था, हालांकि अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था की जगह खुली निविदा प्रक्रिया के जरिए खरीद प्रणाली अपना ली।
रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से कहा गया कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच पांच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों के जरिए अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित कमी को लेकर बार-बार आगाह किया था।