UK : ब्रिटेन में सूखे और जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए लोगों से रोजमर्रा के कामों में पानी की खपत कम करने की अपील की जा रही है। इसी कड़ी में दक्षिण एशियाई समुदायों को ध्यान में रखकर तैयार की गई सलाह चर्चा में है। इसमें परिवारों से चावल को जरूरत से ज्यादा बार न धोने और मुस्लिम समुदाय से वुज़ू के दौरान पानी का सावधानी से इस्तेमाल करने जैसे सुझाव दिए गए हैं।

इस अभियान का मकसद रोजमर्रा की छोटी आदतों में बदलाव करके पानी की खपत कम करना है। दक्षिण एशियाई परिवारों में चावल भोजन का अहम हिस्सा है और इसे पकाने से पहले कई बार पानी से धोया जाता है। अभियान में चावल को केवल दो बार धोने जैसे उपाय के जरिए पानी बचाने की सलाह दी गई है।
इसी तरह मुस्लिम समुदाय में नमाज से पहले किए जाने वाले वुज़ू को लेकर भी पानी की बर्बादी से बचने का संदेश दिया गया है। वुज़ू धार्मिक शुद्धिकरण की प्रक्रिया है, जिसमें हाथ, मुंह, नाक, चेहरा, हाथ-पैर और सिर के हिस्से को पानी से साफ किया जाता है। सलाह का जोर धार्मिक प्रक्रिया को बदलने के बजाय जरूरत से ज्यादा बहते पानी के इस्तेमाल को कम करने पर है।
ब्रिटेन में लंबे समय तक कम बारिश और गर्म मौसम के कारण कई क्षेत्रों में जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। ऐसी परिस्थितियों में जल कंपनियां और संबंधित संस्थाएं लोगों से घरों में पानी की खपत कम करने की अपील करती हैं। इसमें कम समय तक शॉवर लेने, नल खुला न छोड़ने, बगीचे में पानी का समझदारी से इस्तेमाल करने और लीकेज ठीक कराने जैसे सामान्य सुझाव भी शामिल होते हैं।
दक्षिण एशियाई समुदायों के लिए अलग तरीके से संदेश तैयार करने के पीछे उद्देश्य पानी बचाने की सलाह को उनकी रोजमर्रा की आदतों से जोड़ना है। चावल धोना ऐसी ही एक घरेलू गतिविधि है, जिसमें थोड़ी सावधानी से पानी की खपत कम की जा सकती है।
वहीं वुज़ू के दौरान नल को लगातार खुला रखने के बजाय नियंत्रित मात्रा में पानी इस्तेमाल करने की सलाह पहले भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चर्चाओं में दी जाती रही है। पानी बचाने की इस तरह की कोशिशों में धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवहार का सम्मान बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि समुदाय-विशेष को लक्ष्य बनाकर दिए गए सुझावों पर बहस भी हो सकती है। आलोचकों का सवाल हो सकता है कि जल संकट से निपटने की जिम्मेदारी केवल घरेलू उपभोक्ताओं या किसी विशेष समुदाय पर केंद्रित नहीं होनी चाहिए। पानी की पाइपलाइन में लीकेज, कृषि, उद्योग और जल प्रबंधन जैसे बड़े मुद्दों पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी होती है।
घरेलू स्तर पर पानी बचाने के छोटे उपाय तभी ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं, जब उनके साथ व्यापक स्तर पर जल प्रबंधन में भी सुधार किया जाए। ऐसे में लोगों की व्यक्तिगत आदतों में बदलाव और जल कंपनियों तथा प्रशासन की जिम्मेदारियों को एक साथ देखना महत्वपूर्ण है।
सूखे की स्थिति लंबी चलने पर जलाशयों और नदियों के स्तर पर असर पड़ सकता है। इसके कारण कुछ क्षेत्रों में पानी के इस्तेमाल पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। बगीचों में होजपाइप के इस्तेमाल जैसी गतिविधियों पर रोक ऐसे उपायों का हिस्सा हो सकती है।
जल संरक्षण अभियान का व्यापक संदेश यही है कि घर में इस्तेमाल होने वाली हर बूंद महत्वपूर्ण है। खाना पकाने से लेकर नहाने, सफाई और धार्मिक गतिविधियों तक जहां संभव हो पानी की बर्बादी कम करने से सामूहिक स्तर पर बड़ी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है।
दक्षिण एशियाई परिवारों को चावल सीमित बार धोने और मुस्लिम समुदाय को वुज़ू के दौरान जरूरत भर पानी इस्तेमाल करने की सलाह इसी व्यापक जल संरक्षण अभियान का हिस्सा है। इन सुझावों की चर्चा के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि सूखे से निपटने के लिए व्यक्तिगत प्रयासों के साथ जल आपूर्ति व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी बराबर ध्यान दिया जाए।

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