बच्चों के स्क्रीन टाइम पर बढ़ती चिंता, OTT प्लेटफॉर्म्स पर पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग्स जरूरी

Update: 2026-05-23 11:05 GMT

Technology टेक्नोलॉजी : स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्ट टीवी अब बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लोकल सर्किल्स (LocalCircles) के हालिया सर्वे के अनुसार, 37 प्रतिशत माता-पिता का कहना है कि उनके बच्चे सबसे अधिक वीडियो कंटेंट और नेटफ्लिक्स तथा प्राइम वीडियो जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर समय बिताते हैं।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि कई घरों में एक ही ओटीटी अकाउंट का इस्तेमाल पूरा परिवार करता है, जिससे बच्चों के सामने कई बार ऐसे कंटेंट भी आ जाते हैं जो उनकी उम्र के लिए उपयुक्त नहीं होते। इस स्थिति ने पेरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिना निगरानी के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखने से बच्चों की मानसिक आदतों और व्यवहार पर असर पड़ सकता है। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग्स को सक्रिय करना बेहद जरूरी हो गया है।

अधिकांश ओटीटी प्लेटफॉर्म्स जैसे नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम वीडियो, डिज़्नी+ हॉटस्टार और अन्य सेवाएं पैरेंटल कंट्रोल और किड्स प्रोफाइल जैसी सुविधाएं देती हैं। इन फीचर्स की मदद से माता-पिता बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट सीमित कर सकते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बनाना चाहिए, जिसमें केवल उनकी उम्र के अनुसार ही कंटेंट उपलब्ध हो। इसके साथ ही पिन लॉक सिस्टम का उपयोग कर एडल्ट कंटेंट को सुरक्षित किया जा सकता है। कई प्लेटफॉर्म्स पर वॉच हिस्ट्री और टाइम लिमिट सेट करने की सुविधा भी मौजूद है, जिसका उपयोग बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।

डिजिटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल तकनीकी सेटिंग्स ही नहीं, बल्कि माता-पिता की निगरानी और संवाद भी जरूरी है। बच्चों से यह समझाना आवश्यक है कि वे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं और उसका उन पर क्या असर हो सकता है।

कुल मिलाकर, बदलते डिजिटल माहौल में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स को सक्रिय करना और नियमित निगरानी रखना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

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