इंस्टाग्राम पर CSAM ऐड्स मामले में मेटा के जवाब की जांच कर रही सरकार

Update: 2026-07-13 11:26 GMT

नई दिल्ली : इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज़ मटीरियल (CSAM) से जुड़े विज्ञापनों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस पर मेटा का जवाब अब सरकार को मिल गया है और इसकी समीक्षा की जा रही है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को बताया कि जवाब की जांच पूरी होने के बाद मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।

आईटी सचिव ने कहा कि मेटा की ओर से भेजे गए जवाब को मंत्रालय ने प्राप्त कर लिया है। फिलहाल इसकी जांच की जा रही है और समीक्षा के आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में सरकार गंभीरता से काम कर रही है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड अब्यूज़ मटीरियल (CSEAM) से जुड़े कथित पेड ऐड्स को लेकर मेटा को नोटिस जारी किया था। मंत्रालय ने इंस्टाग्राम पर ऐसे सभी विज्ञापनों और कंटेंट को हटाने या निष्क्रिय करने के निर्देश दिए थे, जिनके जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को बढ़ावा मिलने की आशंका थी।

MeitY ने अपने नोटिस में मेटा से इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा था। मंत्रालय ने कंपनी से यह बताने को कहा था कि ऐसे कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर आने से रोकने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं और विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया को किस तरह मजबूत किया जा रहा है।

सरकार की यह कार्रवाई बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच की गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों को ऑनलाइन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री से बचाने की चुनौती लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार सोशल मीडिया कंपनियों से ज्यादा जवाबदेही की उम्मीद कर रही है।

नोटिस जारी होने के बाद मेटा ने भी अपने स्तर पर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी थी। कंपनी ने बताया कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए तकनीकी उपायों का इस्तेमाल कर रही है।

मेटा ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिटेक्शन सिस्टम और अन्य तकनीकों के जरिए ऐसे कंटेंट की पहचान करने की कोशिश कर रही है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि वह बड़े स्तर पर निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया चला रही है।

कंपनी ने युवाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि वह अपने सिस्टम, तकनीक और संसाधनों में लगातार निवेश कर रही है। इसके अलावा मेटा ने अपने ऐड रिव्यू प्रोसेस को मजबूत करने की बात भी कही थी, ताकि किसी भी आपत्तिजनक विज्ञापन को प्लेटफॉर्म पर जगह न मिल सके।

हालांकि, सरकार अब मेटा के जवाब की जांच कर रही है और यह देखा जा रहा है कि कंपनी की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण और उठाए गए कदम पर्याप्त हैं या नहीं। अगर जांच में किसी तरह की कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो सरकार आगे की कार्रवाई कर सकती है।

आईटी मंत्रालय पहले भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऑनलाइन सुरक्षा और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर निर्देश जारी करता रहा है। नए आईटी नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी सामग्री को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए रखें।

CSAM जैसे मामलों को सरकार बेहद गंभीर अपराध मानती है, क्योंकि इसमें बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा शामिल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी कंपनियों, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

फिलहाल मेटा के जवाब की समीक्षा जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कंपनी के खिलाफ कोई अतिरिक्त कदम उठाया जाएगा या नहीं। सरकार ने संकेत दिया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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